एड्स के मरीजों के लिए खुशखबरी

जिला अस्पताल में खुलेगा एआरटी सेंटर, नहीं जाना होगा भोपाल

एड्स के मरीजों के लिए खुशखबरी

बैतूल. बैतूल जिले में एड्स जैसी ला इलाज बीमारी से ग्रसित हो रहे है। दिनों दिन इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। लेकिन वहीं दूसरी खबर लोगो को खुश कर देने वाली है। एड्स पीडि़त मरीजो को अपने इलाज के लिए बैतूल से कई किलोमीटर दूर भोपाल का सफर तय करना होता था। लेकिन अब उन्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं है क्योंकि बैतूल जिला अस्पताल में ही एड्स के मरीजों को इसकी दवा उपलब्ध कराई जाएगी।

एंटी रेडिकल ट्रीटमेंट सेंटर खुलेगा
जिले के एड्स के मरीजों को अब दवा शुरू करने भोपाल नहीं जाना पड़ेगा। जिला अस्पताल में जल्द ही एआरटी(एंटी रेडिकल ट्रीटमेंट)सेंटर खुलेगा। इसके शुरू होने के बाद एड्स के मरीजों को सभी दवाएं इसी सेंटर पर मिल सकेगी। सेंटर की नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गेनाइजेशन दिल्ली से स्वीकृति भी मिल गई है। जिला अस्पताल में एड्स की जांच कराने आने वाले मरीजों को एड्स पॉजिटीव निकलने पर दवा की शुरुआत करने भोपाल जाना पड़ता है। यहां सीडी चार एवं सीडी आठ की जांच होने पर ही मरीजों की दवाएं शुरू की जाती है। इस जांच के बाद मरीजों को दवाएं दी जाती है।


सेंटर की मिली स्वीकृति
अब मरीजों को जांच और दवाएं शुरू करने के लिए भोपाल नहीं जाना पड़ेगा। एआरटी सेंटर की स्वीकृति नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गेनाइजेशन दिल्ली से मिलने के बाद अब यह जिला अस्पताल में ही संभव हो सकेगा। जिला आदिवासी बाहुल्य होने से बैतूल को प्रााथमिकता से एआरटी सेंटर खुलने की स्वीकृति मिली है। इसके लिए बैतूल से ही एड्स नियत्रंण के नोडल अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों द्वारा प्रयास किया गया है। बैतूल एड्स नियंत्रण नोडल ऑफिसर डॉ. राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि भारत सरकार से जिले में एआरटी सेंटर खोलने की स्वीकृति मिल गई है। इस सेंटर के खुलने के बाद दवाएं शुरू करने भोपाल नहीं जाना पड़ेगा। अस्पताल से ही दवाएं मिल सकेगी।

डिफाल्टर हो जाते हैं मरीज
मरीजों को एड्स की पुष्ठि होने पर अभी दवा की शुरुआत भोपाल से की जाती है। छह माह तक भोपाल से दवाएं मिलती है। मरीजों को हर महीने भोपाल जाना पड़ता है। मरीज गरीब होने से भोपाल ही नहीं पहुंचते हैं और डिफाल्टर हो जाते हैं। मरीजों का पुख्ता इलाज नहीं होता है। जिससे बीमारी बढ़ जाती है और मरीजों की मौत तक हो जाती है।

जिले में एड्स के छह सैकड़ा मरीज
जिले में एड्स के वर्तमान में लगभग 601 मरीज है। इतने ही मरीजों का इलाज किया जा रहा है। 59 मरीजों की मौत हो चुकी है। वर्ष 2004 से अभी तक कुल 660 मरीज सामने आए हैं। वर्ष 2019 में एड्स के नए 43 मरीज सामने आए थे।

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