किसान ऋण माफी योजना मैं लाखों का घपला, कर दी फर्जी सूची अपलोड

दोषी कर्मचारियों पर होगी एफ.आई.आर.

झाबुआ। आदिवासी बाहुल्य जिले का फायदा उठाकर वरिष्ठ अधिकारी कर्मचारी किस तरह अपने पद का दुरुपयोग कर शासन को चूना लगाने में लगे हैं जिसका ताजा उदाहरण थांदला सोसाइटी में किसान ऋण माफी योजना में देखने को मिला, जहां पर फर्जी नामों की सूची अपलोड कर दी गई ओर लाखों के भ्रष्टाचार को अंजाम दे दिया गया।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक म.प्र.शासन द्वारा जय किसान ऋण माफी योजना के अंतर्गत झाबुआ जिले की थांदला सोसायटी को ऋण माफी योजना के पात्र 2,252 कृषकों के लिए राज्य शासन से कुल राशि 23 करोड़ 31 लाख 54 हजार की डिमाण्ड करना थी। किन्तु सोसायटी ने इस राशि से अधिक अर्थात 29 करोड़ 42 लाख की मांग हेतु फर्जी सूची पोर्टल पर अपलोड कर दी। इस षड़यंत्र के माध्यम से सोसायटी ने 6 करोड़ 10 लाख 30 हजार रूपए अधिक प्राप्त करने की डिमाण्ड कर दी। वर्तमान स्थिति में राज्य शासन ने कुल 8 करोड़ 6 लाख 18 हजार 644 रूपए की ऋण माफी की राशि सोसायटी को दी है, उसमें से राशि डेड़ करोड का घोटाला जांच में प्रमाणित हुआ है। चूंकि फर्जी डिमाण्ड ही कुल 8 करोड़ 6 लाख रूपए की हो चुकी है। यह तथ्य ही इंगित करता है कि यदि आगामी समय में राज्य शासन से डिमाण्ड अनुसार राहत प्रदान होती तो बडे़ पैमाने पर घोटाला करने की योजना सोसायटी द्वारा बना ली गई थी। उपायुक्त सहकारिता अम्बरीष वैद्य ने ऐसी गंभीर स्थिति पाए जाने पर थांदला सोसायटी के विशेष ऑडिट हेतु निरीक्षकों की टीम गठित कर दी है ताकि इस पूरे षड़यंत्र का खुलासा हो सके।
सहकारिता उपायुक्त को जब प्रमाणिकता सहित शिकायत प्राप्त हुई तब उन्होंने विभाग की ऑडिट विंग के प्रभारी सहायक आयुक्त डी.सी.भिंडे़ के प्रभार में निरीक्षक हितेश साहू एवं ऑडीटर भूपेन्द्र जामोद का जांच दल गठित किया।इस जांच दल को सोसायटी की व्हाउचर्स, लेजर, स्टेटेमेण्टस, हजारों खातों का मिलान सहित सैकड़ों हितग्राहियों के कथन लेने में बहुत कठिन परिश्रम करना पड़ा। जांच अधिकारी डी.सी.भिंडे़ ने बताया राशि 1 करोड़ 45 लाख 2 हजार 856 रूपए घोटाला किया जाना उन्होंने पूरी तरह प्रमाणित पाया है। चूंकि यह फर्जीवाडा अनुमान से अधिक भी हो सकता है। अतः उनके बताए गए तथ्यों को उपायुक्त उम्बरीष वैद्य ने तत्काल संज्ञान में लेकर विशेष ऑडिट हेतु टीम गठित की है। विशेष ऑडिट एक वैधानिक प्रावधान है। ऑडिट पूर्ण होने पर पूरी संभावना है कि घोटाले की राशि बहुत अधिक मात्रा में हो सकती है। उपायुक्त अम्बरीष वैद्य का कहना है कि प्रारंभिक रूप से इस डेड़ करोड़ के घोटाले पर वे तत्काल दोषियों के विरूद्ध कठोरतम कार्यवाही करेंगे ही, साथ ही इसमें शामिल पाए गए किसी भी अधिकारी अथवा कर्मचारी के विरूद्ध पुलिस प्रकरण दायर कराएंगे।

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