किसान संघर्ष समिति का 23 वां स्थापना दिवस मनाया गया।मामा बालेश्वर दयाल को श्रद्धांजलि भी देगे

आज मामा जी की 22 वी पुण्यतिथि पर होगी श्रद्धांजलि बामणिया में

झाबुआ जिले में किसान संघर्ष समिति के प्रदेश सचिव राजेश वैरागी ने बताया कि आज बामनिया में किसान संघर्ष समिति का स्थापना दिवस मनाया गया। उन्होंने बताया कि राजस्थान ,मध्यप्रदेश, गुजरात के हजारों आदिवासियों द्वारा कल मामा बालेश्वर दयाल जी की समाधि पर पंहुचकर श्रद्धांजलि और चढ़ावा अर्पित करेंगे।
किसान संघर्ष समिति का आज 23 वां स्थापना दिवस कार्यक्रम मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में उत्साह पूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 23 वर्ष में पहली बार हम किसान संघर्ष समिति का स्थापना दिवस संस्थापक अध्यक्ष टंटी चौधरी जी के बिना मना रहे हैं। जिन्होंने मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की मुलताई तहसील के परमंडल ग्राम वासियों के साथ मिलकर मुलताई किसान आंदोलन की नींव रखी थी। इस आंदोलन में 24 किसान शहीद हुए थे तथा 350 किसानों को गोली लगी थी। 17 वर्ष बाद चार लोग, डॉ सुनीलम, स्व. प्रहलाद स्वरूप अग्रवाल, शेषु सूर्यवंशी तथा रामू पंवार को आजीवन कारावास की सजा हुई थी। इसके बावजूद भी आंदोलन जारी रहा ।
टंटी चौधरी जी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वे लगातार यह कहते थे कि किसान संघर्ष समिति के रूप में किसानों के बीच में हमने संगठन का जो बीज बोया है, वह इतना विशाल पेड़ बने जिसका फल भी किसान को लगातार मिले और छाया भी मिलती रहे।
उन्होंने बताया कि 25 दिसंबर 1997 को मुलताई तहसील परिसर में किसान संघर्ष समिति गठित करने वाले हजारों किसानों को याद करते हुए कहा कि स्थापना से लेकर आज तक किसान संघर्ष समिति ने मुलतापी सहित पूरे क्षेत्र में किसानों से जुड़े सभी मुद्दों पर सड़कों पर सक्रिय भूमिका निभाई है तथा जब किसानों ने मौका दिया तब 10 वर्ष तक 1998 से 2008 के बीच किसानों का पक्ष भी मजबूती से मध्यप्रदेश की विधानसभा में रखा है।
किसान संघर्ष समिति की उपलब्धियां बताते हुए उन्होंने कहा कि किसान अपनी समस्याओं को लेकर बिना किसी नेता की मदद के स्वयं संगठित होकर प्रशासन के समक्ष धरना, प्रदर्शन और ज्ञापन देने लगे हैं। उन्होंने बताया कि किसान संघर्ष समिति ने देश में पहली बार फसल बीमा के मुद्दे को देश के राजनीतिक एजेंडा में लाया । अनावरी तय करने की इकाई बनाने में कामयाबी हासिल की और बिजली बिल माफी में सफलता हासिल की, प्राकृतिक आपदा में इल्ली के प्रकोप और गेरूआ रोग को जुड़वाया, गांव गांव में शराब बंदी आंदोलन चलाया।
उन्होंने बताया कि देश में विभिन्न संगठनों के साथ मिलकर समन्वय चलाने में किसान संघर्ष समिति की अग्रणी भूमिका रही है। इन समन्वयों में जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, भूमि अधिकार आंदोलन, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति शामिल है।
उन्होंने बताया कि किसान संघर्ष समिति प्रदेश के विभिन्न जिलों में गत 29 दिनों से 3 किसान विरोधी कानून रद्द करने, बिजली संशोधन बिल वापस लेने तथा सभी कृषि उत्पादों की लागत से डेढ़ गुना दाम पर खरीद कानूनी तौर पर सुनिश्चित करने की मांग को लेकर आंदोलनरत है।

उन्होंने किसानों से बढ़ चढ़कर इस ऐतिहासिक आंदोलन में हिस्सा लेने की अपील की।
किसान संघर्ष समिति द्वारा भीलांचल के गांधी मामा बालेश्वर दयाल का 23 वा स्मृति दिवस भी किसान संघर्ष समिति द्वारा मनाया जा रहा है जिन्होंने आजादी के पहले और आजादी के बाद किसानों की कर्जा मुक्ति किसानों को सूदखोरों से बचाने, जमीदारी प्रथा समाप्त कराने, भूमि सुधार लागू कराने तथा स्वावलंबी गांव निर्माण के लिए समाजवादी चिंतक और समाज सुधारक के तौर पर आजीवन कार्य किया ।
स्थापना दिवस के दौरान किसानों ने 500 किसान संगठनों द्वारा अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति एवं संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा चलाए जा रहे अनिश्चितकालीन आंदोलन को सफल बनाने के लिए हर तरह की कुर्बानी देने का संकल्प लिया। इस अवसर पर अडानी अंबानी के सामानों का बहिष्कार करने का संकल्प भी लिया गया। कार्यक्रम में प्रस्ताव पारित कर किसान संघर्ष समिति की जिला इकाइयों ने 27 दिसंबर को प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम का थाली बजाकर विरोध करने , 1 जनवरी को संविधान की प्रस्तावना पढ़कर आंदोलन को तेज करने का संकल्प लेने के कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है ।
उन्होंने कहा कि सरकार 3 कानूनों को लेकर तमाम दावे कर रही है। सरकार को यह बताना चाहिए कि अध्यादेश के तौर पर 8 महीने से लागू इन कानूनों से किसानों की आय में कितनी वृद्धि हुई है? उन्होंने कहा कि किसानों की वास्तविक आय महंगाई एवं अन्य कारणों से 30% घटी है । देश में 15 करोड़ बेरोजगार हुई है लेकिन अडानी अंबानी की संपत्ति में डेढ़ लाख करोड़ का इजाफा हुआ है। इससे यह साबित हो गया है कि कानून अडानी अंबानी को दुनिया के 10 अमीरों की श्रेणी में पहुंचा रहे हैं। दूसरी ओर किसान गरीब होता जा रहा है । 80 करोड़ भारतीय एक और दो रूपये किलो के अनाज पर आश्रित होने के लिए मजबूर हुए हैं।
इस अवसर पर किसान संघर्ष समिति के विजय मचार, मूर्ति मेडा, सुशीला मेडा किसान सघर्ष समिति जिला अध्यक्ष गोपाल डामोर,गणपत पाटीदार, वालजी डामोर, मुन्ना कटारा , धर्मा डामोर जीतरा गरवाल उपस्थित उपस्थित रहे।

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