ग्रामीण विकास में केंद्रीय बजट के सकारात्मक प्रभाव पर वेबिनार में प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ

नमस्कार।

मंत्रीमंडल के मेरे सभी सहयोगी, राज्यों सरकारों के प्रतिनिधि‍, सामाजिक संस्थाओं से जुड़े साथी, विशेषरूप से नॉर्थ ईस्ट के दूर-दूर के इलाकों से जुड़े साथी!

देवियों और सज्जनों,

बजट के बाद, बजट घोषणाओं को लागू करने के दिशा में आज आप सभी स्टेकहोल्डर्स से संवाद अपने आप में एक बहुत अहम है। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास हमारी सरकारी की पोलिसी और एक्शन इसका मूलभूत परिणाम सूत्र है। आज की थीम- ”Leaving no citizen behind” ये भी इसी सूत्र से निकली है। आजादी के अमृतकाल के लिए जो संकल्प हमने लिए हैं, वो सबके प्रयास से ही सिद्ध हो सकते हैं। सबका प्रयास तभी संभव है जब विकास सबका होगा, हर व्यक्ति, हर वर्ग, हर क्षेत्र को विकास का पूरा लाभ मिलेगा। इसलिये बीते सात सालों में हमने देश के हर नागरिक, हर क्षेत्र के सामर्थय को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। देश के गांव और गरीब को पक्के घर, toilets, गैस, बिजली, पानी, सड़क जैसी बेसिक सुविधाओं से जोड़ने की योजनाओं का मकसद यही है। देश ने इनमें बहुत सफलता भी पाई है। लेकिन अब समय है इन योजनाओं के saturation का, इनके शत-प्रतिशत लक्ष्यों को हासिल करने का। इसके लिए हमें नई रणनीति भी अपनानी पड़ेगी। मॉनिटरिंग के लिए, अकाउंटेबिलिटी के लिए, टेक्नोलॉजी का भरपूर उपयोग करते हुए। नई व्यवस्थाओं को विकसित करना होगा। हमें पूरी ताकत लगानी होगी।

साथि‍यों,

इस बजट में सरकार द्वारा सैचुरेशन के इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप दिया गया है। बजट में पीएम आवास योजना, ग्रामीण सड़क योजना, जल जीवन मिशन, नॉर्थ ईस्ट की कनेक्टिविटी, गांवों की ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी, ऐसी हर योजना के लिए जरूरी प्रावधान किया गया है। ये ग्रामीण क्षेत्रों, नॉर्थ ईस्ट बॉर्डर के इलाकों और एस्पीरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स में सुविधाओं की सैचुरेशन की तरफ बढ़ने के प्रयासों का ही हिस्सा है। बजट में जो वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम घोषि‍त किया गया है, वो हमारे सीमावर्ती गांवों के विकास के लिए बहुत अहम है। Prime Minister’s Development Initiative for North East Region यानि पीएम-डिवाइन नॉर्थ ईस्ट में समय सीमा के भीतर विकास योजनाओं के शत-प्रतिशत लाभ को सुनिश्चित करने में बहुत मदद करेगा।

साथियों,

गांवों के विकास में वहां घर और ज़मीन की प्रॉपर डिमार्केशन बहुत आवश्यक है। स्वामित्व योजना से इसमें बहुत मदद मिल रही है। अभी तक इसके तहत 40 लाख से अधिक प्रॉपर्टी कार्ड्स जारी किए जा चुके हैं। लैंड रिकॉर्ड्स के रजिस्ट्रेशन के लिए एक नेशनल सिस्टम और एक यूनीक लैंड आइडेंटिफिकेशन पिन, एक बहुत बड़ी सुविधा होगी। रैवेन्यु डिपार्टमेंट पर सामान्य ग्रामीण की निर्भरता कम से कम हो हमें ये सुनिश्चित करना है। लैंड रिकॉर्ड्स के डिजिटाइजेशन और डिमार्केशन से जुड़े समाधानों को आधुनिक टेक्नॉलॉजी से जोड़ना आज की ज़रूरत है। मैं समझता हूं कि सभी राज्य सरकारें अगर समय-सीमा तय करके काम करेंगी, तो गांव के विकास को बहुत अधिक गति मिलेगी। ये ऐसे रिफॉमर्स हैं, जो गांवों में इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट्स के निर्माण की गति को बढ़ाएंगे और गांवों में बिजनेस एक्टिविटी को भी प्रोत्साहित करेंगे। अलग-अलग योजनाओं में 100 परसेंट लक्ष्य पाने के लिए हमें नई टेक्नॉलॉजी पर भी फोकस करना होगा, ताकि तेज़ी से प्रोजेक्ट्स भी पूरे हों और क्वालिटी भी कंप्रोमाइज़ ना हो।

साथियों,

इस साल के बजट में पीएम आवास योजना के लिए 48 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इस साल 80 लाख घर बनाने का जो लक्ष्य है, उसे भी तय समय में पूरा करने के लिए तेजी से काम करना होगा। आप सभी जानते हैं कि आज देश के 6 शहरों में अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए नई टेक्नॉलॉजी का प्रयोग करते हुए, 6 लाइट हाउस प्रोजेकक्ट्स पर काम कर रहे हैं। इस प्रकार की टेक्नॉलॉजी गांवों के घरों में कैसे उपयोग हो, हमारे इकोसेंसटिव ज़ोन्स में हो रही कंस्ट्रक्शन के लिए हम नई टेक्नॉलॉजी का उपयोग कैसे कर सकते हैं, इनके समाधानों पर एक सार्थक और गंभीर चर्चा आवश्यक है। गांवों में, पहाड़ी क्षेत्रों में, नॉर्थ ईस्ट में सड़कों की मेंटेनेंस भी एक बहुत बड़ी चुनौती होती है। स्थानीय geographical conditions के अनुसार लंबे समय तक टिक सके, ऐसे मटीरियल की पहचान, उसका समाधान भी बहुत ज़रूरी है।

साथियों,

जल जीवन मिशन के तहत लगभग 4 करोड़ कनेक्शन देने का टारगेट हमने रखा है। इस टारगेट को हासिल करने के लिए आपको अपनी मेहनत और बढ़ानी होगी। मेरा हर राज्य सरकार से ये भी आग्रह है कि जो पाइपलाइन बिछ रही हैं, जो पानी आ रहा है, उसकी क्वालिटी पर भी हमें बहुत ध्यान देने की ज़रूरत है। गांव के स्तर पर लोगों में एक सेंस ऑफ ऑनरशिप आए, Water Governance को बल मिले, ये भी इस योजना का एक लक्ष्य है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए हमें 2024 तक हर घर तक नल से जल पहुंचाना है।

साथियों,

गांवों की डिजिटल कनेक्टिविटी अब एक aspiration भर नहीं है, बल्कि आज की ज़रूरत है। ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी से गांवों में सुविधाएं ही नहीं मिलेंगी, बल्कि ये गांवों में स्किल्ड युवाओं का एक बड़ा पूल तैयार करने में भी मदद करेगा। गांवों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी से सर्विस सेक्टर का विस्तार जब होगा तो देश का सामर्थ्य और ज्यादा बढ़ेगा। ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी में अगर कहीं कोई दिक्कतें आ रही हैं, तो उनकी पहचान और उनका समाधान हमें ढूंढना ही होगा। जिन-जिन गांवों में काम पूरा हो चुका है, वहां क्वालिटी और इसके प्रॉपर यूज़ के प्रति जागरूकता फैलाना भी उतना ही ज़रूरी है। शत-प्रतिशत पोस्ट ऑफिस को कोर बैंकिंग सिस्टम में लाने का फैसला भी एक बड़ा कदम है। जनधन योजना से फाइनेंशियल इंक्लूजन का जो अभियान हमने शुरु किया था, उसको सैचुरेशन तक पहुंचाने में इस कदम से बल मिलेगा।

साथियों,

ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक बड़ा आधार हमारी मातृ शक्ति है, हमारी महिला शक्ति है। फाइनेंशियल इंक्लुज़न ने परिवारों में महिलाओं की आर्थिक फैसलों में अधिक भागीदारी सुनिश्चित की है। सेल्फ हेल्प ग्रुप्स के माध्यम से महिलाओं की इस भागीदारी को और ज्यादा विस्तार दिए जाने की जरूरत है। हम ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा स्टार्ट-अप्स को कैसे लेकर जाएं, इसके लिए भी आपको अपने प्रयास बढ़ाने होंगे।

साथियों,

इस बजट में घोषित सभी कार्यक्रमों को हम समय सीमा के भीतर कैसे पूरा कर सकते हैं, सभी मंत्रालयों, सभी स्टेकहोल्डर्स का convergence कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं, इसको लेकर इस वेबिनार में विस्तृत चर्चा अपेक्षित है। मुझे विश्वास है कि ‘Leaving no citizen behind’ का लक्ष्य ऐसे ही प्रयासों से पूरा होगा।

मेरा ये भी आग्रह है कि इस प्रकार की समिट में हम सरकार की तरफ से ज्यादा कुछ बोलना नहीं चाहते हैं। हम आपको सुनना चाहते हैं, हम आपके अनुभवों को जानना चाहते हैं। हम हमारे गांव की क्षमता कैसे बढ़े, पहले तो गवर्नेंस की दृष्टि से, आप सोचिए कभी, क्या कभी गांव के अंदर जितनी सरकारी एजेंसियों का कोई न कोई रोल होता है, वो गांव को स्तर पर कभी दो-चार घंटे एक साथ बैठकर के उस गांव में साथ मिलकर के क्या कर सकते हैं, चर्चा की है। मैं लंबे अर्से तक राज्य में मुख्यमंत्री रहकर के आया हूं, मैं अनुभव करता हूं कि ये हमारी आदत नहीं है। एक दिन में एग्रीकल्चर वाला जाएगा, दूसरे दिन में इरिगेशन वाला जाएगा, तीसरे दिन हेल्थ वाला जाएगा, चौथे दिन एजुकेशन वाला जाएगा और एक-दूसरे को कोई पता नहीं होगा। क्या उस गांव में कोई दिन तय करके जितनी संबंधि‍त एजेंसी एक साथ बैठे, गांव के लोगों के साथ बैठे, गांव की elected body के साथ बैठे। बैठकर के आज हमारे गांव के लिए पैसे उतने समस्या नहीं हैं जितने की हमारे साइलो खत्म करना, convergence होना और उसका लाभ लेना।

अब आप सोचेंगे भई, नेशनल एजुकेशन पोलिसी और ग्रामीण विकास का क्या लेना देना। अब आप साचिए नेशनल एजुकेशन पोलिसी में एक विषय है कि भई आप स्थानीय जो हुनर है उससे बच्चों को परिचित करवाइए। आप स्थानीय इलाकें में टूर के लिए जाईये। क्या कभी हम सोच सकते हैं कि हमारे जो वाइब्रेंट बॉर्डर विलेज की कल्पना है, हम उस ब्लॉक में जो स्कूल हैं उसको आइडेंटिफाइ करें। कहीं पर आठवी कक्षा के बच्चे, कहीं पर नौवी कक्षा के बच्चों का, कहीं दसवीं कक्षा के बच्चे। दो दिन के लिए एक रात वहां स्टे करना जो आखि‍री विलेज है, उसका टूर करें। विलेज को देखें, विलेज के पेड़-पौधों को देखें, वहां के लोगों के जीवन को देखें। वाइब्रेंसी आना शुरु हो जाएगा।

तहसील सेंटर पर रहने वाला बच्चा चालीस पचास सौ किलोमीटर जाकर के आखि‍री बॉर्डर विलेज जाएगा, अपनी बॉर्डर को देखेगा, अब है तो वो एजुकेशन का कार्यक्रम लेकिन हमारे वाइब्रेंट बॉर्डर विलेज के लिए वो काम आ सकता है। तो हम ऐसी कुछ व्यवस्थाएं विकसित कर सकते हैं क्या?

अब हम तय करें कि तहसील लेवल की जितनी स्पर्धाएं होंगी। वो सरे कार्यक्रम हम बॉर्डर विलेज पर करेंगे, अपने आप वाइब्रेंसी आना शुरू हो जाएगा। उसी प्रकार से हम कभी सोचें कि हमारे गांव में ऐसे कितने लोग हैं जो कहीं न कहीं सरकार में काम करते हैं। कितने लोग हैं जो हमारे गांव के हैं लेकिन अब सरकार में से निवृत्त होकर के या तो गांव में रहते हैं या नजदीक ही कहीं नगर में रहते हैं। अगर ऐसी व्यवस्था है तो क्या कभी सरकार से जुड़े हुए या सरकार की पेंशन पर या सरकार की पे पर जिनका संबंध है, क्या साल में एक बार ये सब लोग इकट्ठे हो सकते हैं गांव में? चलो भई ये मेरा गांव है, मैं तो चला गया, नौकरी कर रहा हूं, शहर चला गया। लेकिन आइए अपन बैठते हैं, अपने गांव के लिए हम सरकार में रहे हैं, सरकार को जानते हैं, व्यवस्था करो, चलो मिलकर के काम करते हैं। यानी ये हुआ नई रणनीति, क्या कभी हमने सोचा है कि हम गांव का जन्मदिन तय करें और गांव का जन्मदिन मनाएंगे। गांव के लोग 10-15 दिन का उत्सव मनाकर के गांव की आवयकताओं की पूर्ति के लिए आगे आएंगे। गांव के साथ ये जुड़ाव वही गांव को समृद्ध करेगा जितना बजट से होगा, उससे भी ज्यादा ये सबके प्रयास से होगा।

हम नई रणनीति के साथ, अब जैसे हमारे कृषि‍ विज्ञान केंद्र है, क्या हम तय कर सकते हैं, भई हमारे गांव में दो सौ किसान हैं, चलो इस बार 50 किसान प्राकृतिक कृषि‍ की तरफ हम ले जाएंगे। कभी हम सोच सकते हैं क्या? हमारे यहां जो एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटीज हैं, उसमें ज्यादातर ग्रामीण परिवेश के बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। क्या कभी rural development का पूरा चित्र हमने इन यूनिवर्सिटीज में जाकर के उन बच्चों के सामने रखा है, जो वेकेशन में अपने गांव जाते हैं, गांव के लोगों के साथ बैठते हैं। थोड़े पढ़े-लिखे हैं तो सरकार की योजनाओं को जानेंगे, समझेंगे, अपने गांव के लिए करेंगे। यानी हम कुछ नई रणनीति पर सोच सकते हैं क्या? और हमें पता होना चाहिए कि आज भारत में ज्यादातर राज्यों में output से ज्यादा outcome पर बल देने की आवश्यकता है। आज गांव में काफी मात्रा में धन जाता है। उन पैसों का सही समय पर अगर उपयोग हो, तो हम गांव की स्थि‍ति बदल सकते हैं।

हम गांव के अंदर एक प्राकर से विलेज सेक्रेटेरिएट, और जब मैं विलेज सेक्रेटेरिएट कहूंगा तो हम सोचेंगे कि एक बिल्डिंग होना चाहिए। सबके लिए बैठने के लिए चैम्बर, वो मैं नहीं कह रहा हूं। भले ही हम कोई जहां आज बैठते हैं, ऐसी ही कोई छोटी जगह पर बैठेंगे लेकिन साथ मिलकर के एजुकेशन के लिए कुछ हम प्लान कर सकते हैं। उसी प्रकार से आपने देखा होगा। भारत सरकार ने एस्पीरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स का एक कार्यक्रम हाथ लिया। इतना अद्भुत अनुभव आ रहा है कि डिस्ट्रिकट के बीच में एक कॉम्पीटीशन शुरू हुई है। हर डिस्ट्रिकट को लग रहा है कि मेरे राज्य में मैं पीछे नहीं रहूंगा। कई डिस्ट्रिकट को लग रहा है कि मैं नेशनल एवरेज से भी आगे निकलना चाहता हूं। क्या आप अपनी तहसील में आठ या दस पैरामीटर तय करें। उन आठ या दस पैरामीटर की कॉम्पीटीशन हर तीन महीने में से कॉम्पीटीशन का रिजल्ट आए कि भई इस कामों में कौन सा गांव आगे निकल गया? कौन सा गांव आगे बढ़ रहा है? आज हम क्या करते हैं, बेस्ट विलेज का स्टेट लेवल का अवार्ड देते हैं, बेस्ट विलेज का नेशनल लेवल का अवार्ड देते हैं। आवश्यकता ये है कि गांव में ही तहसील लेवल के जो अगर पचास, सौ, डेढ़ सौ, दो सौ, गांव हैं उनके बीच ही कॉम्पीटीशन करें, उनके पैरामीटर तय करें कि भई ये दस विषय हैं, चलिए 2022 में इन दस विषयों की कॉम्पीटीशन। देखते हैं इन दस विषयों में कौन आगे निकलता है। आप देखि‍ए, बदलाव शुरू हो जाएगा और जब इस प्रकार से ब्लॉक लेवल पर मान्यता मिलेगी, तो बदलाव शुरू होगा और इसलिए मैं कहता हूं कि budget is not a issue. आज हमें आउटकम और धरती पर परिवर्तन इस पर प्रयास करना चाहिए।

क्या गांव के अंदर एक मिजाज नहीं बन सकता कि हमारे गांव में कोई भी बालक कुपोषि‍त नहीं होगा। मैं बताता हूं कि सरकार के बजट की वो परवाह करेंगे नहीं, एक बार उनके दिल में बैठ गया ना, गांव के लोग किसी भी बच्चे को कुपोषि‍त नहीं रहने देंगे। आज भी हमारे यहां ये संस्कार है। हम अगर ये कहें कि हमारे गांव में एक भी ड्रॉपआउट नहीं होगा, आप देखि‍ए गांव के लोग जुड़ेगे। हमने तो ये देखा है, कई गांव के नेता ऐसे हैं, पंच हैं, सरपंच हैं लेकिन कभी गांव के स्कूल में गए ही नहीं हैं। और गए तो कब गए? झंडा वंदन के दिन चले गए, बाकी कभी जाना ही नहीं। ये हम आदत कैसे बनाएं? ये मेरा गांव है, ये मेरे गांव की व्यवस्थाएं हैं, मुझे उस गांव में जाना है और ये लीडरशि‍प सरकार की सभी इकाईयों ने देनी चाहिए। अगर हम ये लीडरशि‍प नहीं देंगे और हम सिर्फ कह देंगे कि हमने चेक काट दिया, हमने पैसे भेज दिए, काम हो जाएगा, परिवर्तन नहीं आएगा। और आजादी के जब 75 साल मना रहे हैं और महात्मा गांधी के जीवन से जुड़ी हुई कुछ बातें हैं, क्या हम उसको साकार नहीं कर सकते? स्वच्छता, भारत की आत्मा गांव में रहती है, ऐसा महात्मा गांधी कह के गए हैं, क्या हम इसको पूरा नहीं कर सकते हैं?

साथि‍यों,

राज्य सरकार, केंद्र सरकार, स्थानीय स्वराज की संस्थाएं मिलकर के और हमारे सभी डिपार्टमेंट साइलो खत्म करके अगर ये काम तय करें, मुझे पक्का विश्वास है हम उत्तम से उत्तम परिणाम ला सकते हैं। आजादी के 75 साल हमें भी देश को कुछ देना चाहिए, इस मिजाज के साथ हम काम करें। आप आज पूरा दिन भी चर्चा करने वाले हो, बजट को गांव के जीवन में बदलाव लाने में कैसे optimum utilisation of each and every penny, ये हम कैसे कर सकें, अगर ये हम कर लेंगे तो आप देखि‍ए कोई भी नागरिक पीछे नहीं छूटेगा। हमारा सपना पूरा होगा। मेरी आप सबको बहुत शुभकामना है!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

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