चिकनपॉक्स की रोकथाम और उपचार की एडवाइजरी अनुसार कार्यवाही करें सुनिश्चित

स्वास्थ्य आयुक्त-सह-सचिव डॉ. सुदाम खाड़े ने सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को चिकनपॉक्स की रोकथाम और उपचार के संबंध में जारी की गई एडवाइजरी के अनुसार आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिये हैं। स्वास्थ्य आयुक्त ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों से कहा है कि चिकनपॉक्स के लक्षण, संचरण, जटिलताएँ, रोकथाम और उपचार के लिये एडवाइजरी बनाई गई है। एडवाइजरी अनुसार आवश्यक कार्यवाही किया जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि पिछले एक माह में छतरपुर, छिंदवाड़ा, दतिया, नीमच, भोपाल, धार और खण्डवा से फीवर विद रेशेस के 31 प्रकरण दर्ज हुए हैं। इनके क्लीनिकल एक्जामिनेशन के आधार पर चिकनपॉक्स की प्रज्मटिव डॉयग्नोसिस दर्शाई गई है। चिकनपॉक्स संक्रमित बीमारी है। यह बच्चों के साथ वयस्क और गर्भवती महिलाओं को भी संक्रमित कर सकती है।

स्वास्थ्य आयुक्त द्वारा जारी की गई एडवाइजरी में बताया गया है कि चिकनपॉक्स व्हीजेडव्ही वायरस के संक्रमण से फैलती है। इस वायरस के संक्रमण के कारण शरीर में खुजली, दाने (रेश) और छाले के लक्षण प्रकट होते हैं। प्राय: शरीर में छाती, पीठ और चेहरे पर लाल दाने दिखाई देने लगते हैं और फिर सारे शरीर में दाने फैल जाते हैं। शरीर में वायरस के संक्रमण के बाद औसतन उदभवन काल 10 से 20 दिन का होता है। वयस्कों में शरीर के अंगों पर दाने उभरने से पहले हल्का बुखार अथवा बैचेनी के लक्षण प्रकट हो सकते हैं। बच्चों में शरीर पर दाने ज्यादातर बीमारी का पहला संकेत हो सकता है। चिकनपॉक्स वायरस का संक्रमण लगभग 4 से 7 दिनों तक रहता है।

चिकनपॉक्स के प्रमुख लक्षणों में शरीर पर दाने प्रकट होते हैं, जो खुजली पैदा करते हैं और बाद में फफोले में बदल जाते हैं तथा सूखने के बाद पपड़ी में बदल जाते हैं। फफोले के सूखने में लगभग एक सप्ताह लगता है। जिन बच्चों, किशोर, वयस्क और गर्भवती महिलाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, उन्हें अधिक खतरा बना रहता है और अधिक जटिलताएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं। शरीर पर दाने उभरने में लगभग एक से दो दिन पहले बुखार, थकान, भूख में कमी तथा सिर में दर्द आदि के लक्षण प्रकट होते हैं। किसी भी व्यक्ति को कभी भी चिकनपॉक्स हो सकता है, चाहे उसे कभी संक्रमण नहीं हुआ है अथवा चिकनपॉक्स का टीकाकरण हुआ हो।

चिकनपॉक्स बीमारी के प्रसार के संबंध में बताया गया है कि चिकनपॉक्स वायरस त्वचा पर उभरे दानों और घाव के तरल पदार्थ को छूने, संक्रमित व्यक्ति के साँस लेने-छोड़ने और संक्रमित व्यक्ति के सीधे सम्पर्क में आने से फैलता है। चिकनपॉक्स से वयस्कों में वायरस के कारण निमोनिया, वायरल निमोनिया, बच्चों में त्वचा संबंधी बीमारी की समस्याएँ, रक्तस्त्राव की समस्याएँ और अन्य वैक्टीरियल इन्फेक्शन आदि की जटिलताएँ हो सकती हैं।

चिकनपॉक्स की रोकथाम और उपचार के लिये सबसे अच्छा उपाय चिकनपॉक्स का पूर्ण डोज टीकाकरण है। प्राय: टीका लगवा चुके अधिकांश व्यक्तियों में चिकनपॉक्स का संक्रमण नहीं होता है और यदि चिकनपॉक्स हो भी जाये, तो बीमारी का प्रभाव कम रहता है। व्हीजेडव्ही वायरस को अन्य दूसरे व्यक्तियों तक फैलने और त्वचा के संक्रमण को रोकने के लिये नाखूनों को छोटा रखें और प्रयास करें कि खुजली और खरोंचना कम हो। यदि दाने, घाव अथवा छाले को आपने खरोंच लिया है, तो अपने हाथों को तत्काल साबुन से 20 सेकेण्ड तक धोएँ। त्वचा संक्रमण रोकने के लिये संक्रमणरोधी लोशन का उपयोग करें। बुखार, थकान, भूख में कमी, सिर दर्द आदि लक्षण प्रकट हों, तो चिकित्सीय परामर्श लें। शरीर में खुजली से राहत के लिये नीम की पत्तियाँ पानी में डालकर ठंडे पानी से स्नान करें। मरीज को हवादार कमरे में रखें और सूती कपड़े पहनाएँ, जिससे शरीर में जलन नहीं हो। मरीज को हो सके तो आइसोलेशन में रखें, जिससे अन्य स्वस्थ व्यक्तियों में संक्रमण न फैले, मरीज के पास साफ-सफाई का ध्यान रखें। मरीज को ज्यादा से ज्यादा पौष्टिक तरल पदार्थ, दलिया और स्वच्छ पानी का सेवन करायें। चिकनपॉक्स की पुष्टि के लिये मरीज को चिकित्सक अथवा प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मचारी को अवश्य दिखायें।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को कहा गया है कि फीवर विथ रेशेस के प्रकरणों की जानकारी आईएचआईपी प्लेटफार्म के पी फार्म में दर्ज करें। एक ही परिवार अथवा क्षेत्र से आये एक से अधिक प्रकरणों को आउट ब्रेक की श्रेणी में रखकर आईएचआईपी प्लेटफार्म पर इवेंट एण्ड आउट ब्रेक में दर्ज करें। स्वास्थ्य दल द्वारा प्रभावित क्षेत्र में एक्टिव केस सर्च का सर्वे करवायें। सर्वे के दौरान पाये गये संभावित संक्रमित के परिवार को उचित स्वास्थ्य शिक्षा दी जाये और आवश्यकता अनुसार औषधियाँ उपलब्ध कराई जायें। चिकनपॉक्स के पाये गये प्रकरण और प्रभावित क्षेत्र में कॉम्बैट दल द्वारा भ्रमण कर आवश्यकता अनुसार कार्यवाही सुनिश्चित की जाये। जिला सर्विलेंस अधिकारी के नेतृत्व में रेपिड रिस्पांस टीम को सक्रिय रखें और नियमित स्थिति की समीक्षा की जाये। जिला एपीडिमियोलॉजिस्ट, जिला माइक्रोबायोलॉजिस्ट, जिला डाटा मैनेजर द्वारा चिकनपॉक्स के प्रकरण और प्रभावित क्षेत्र से सतत निगरानी एवं रिपोर्टिंग की जाये। रोकथाम और उपचार के संबंध में की जाने वाली गतिविधियों का रिकॉर्ड संधारित करें और आईएचआईपी प्लेटफार्म पर प्रकरण का फॉलोअप अपडेट करें।

चिकनपॉक्स संक्रमण सर्वे के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के संबंध में कहा गया है कि संक्रमित मरीज के सम्पर्क के समय मॉस्क, ग्लब्स और पीपीई किट का प्रयोग करें। उपयोग किये गये मॉस्क, ग्लब्स और पीपीई किट का प्रोटोकॉल के अनुसार डिस्पोजल भी करें।

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