तम्बाकू दिवस के अवसर पर हुए जागरूकता कार्यक्रम

तम्बाकू के सेवन से होने वाले शारीरिक एवं मानसिक दुष्प्रभावों के प्रति आमजन को जागरूक करने के उद्देष्य से प्रतिवर्ष की भॉति मंगलवार को विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर कई कार्यक्रम हुए। इस वर्ष विश्व तम्बाकू निषेध दिवस का विषय ‘‘तम्बाकू हमारे पर्यावरण के लिए खतरा’’ है, तम्बाकू के पर्यावरणीय प्रभाव-खेती, उत्पादन, वितरण और कचरे से जनता के बीच जागरूकता बढ़ाना है। साथ ही तम्बाकू उपयोगकर्ताओं को तम्बाकू छोड़ने के लिए एक अतिरिक्त कारण देना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार तम्बाकू उगाने के लिए लगभग 3.5 मिलियन हेक्टेयर भूमि हर साल नष्ट हो जाती है।

तम्बाकू उगाना वनों की कटाई को बढ़ावा देता है। तम्बाकू के बाग़ानों के लिए वनों की कटाई मिट्टी के क्षरण और असफल पैदावार को बढ़ावा देती है। तम्बाकू का पर्यावरणीय प्रभाव पृथ्वी के दुर्लभ संसाधनों और नाज़ुक पारस्थितिक तंत्र पर दबाव डालते हैं। भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह विशेष रूप से खतरनाक है क्योंकि तम्बाकू का अधिकांश उत्पादन विकासशील देशों में ही होता है। तम्बाकू निषेध दिवस पर स्वास्थ्य संस्थाओं में तम्बाकू के सेवन को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से जनजागरूकता अभियान का आयोजन किया गया।

जयप्रकाश चिकित्सालय में आयोजित मुख्य आयोजन में तम्बाकू उत्पादों का उपयोग ना करने के प्रति शपथ एवं हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। इस साथ ही इण्डियन डेण्टल एसोसिएशन के माध्यम से जागरूकता नाटक की संगीतमयी प्रस्तुति दी गई। जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने कहा कि जयप्रकाश जिला चिकित्सालय को आदर्श चिकित्सालय बनाने की दिशा में निर्णय लिया गया है कि अस्पताल परिसर में तम्बाकू के उपयोग करने वालों के लिए रोको-टोको कार्यक्रम चलाया जावेगा। आवश्यक होने पर चालानी कार्यवाही भी की जाएगी। ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता पोषण समितियों की बैठकों में तम्बाकू उपयोगकर्ताओं को समझाईश एवं परामर्श के माध्यम से तम्बाकू छोड़ने के लिए प्रेरित किये जाने हेतु प्रस्ताव पारित किया गया।

हेल्थ एण्ड वेलनेस केन्द्रो पर तम्बाकू व्यसन मुक्ति हेतु परामर्श सत्रों का आयोजन किया गया। जिसमें तम्बाकू की आदत छोड़ने के लिए बेहद आसान उपायों के बारे में बताया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि धूम्रपान करने वालों को पहले से ही फेफड़े की बीमारी होने पर उनके फेफड़ों की क्षमता कम हो जाती है। इस कारण गंभीर बीमारी का खतरा कहीं अधिक बढ़ जाता है। इसके साथ ही ध्रूमपान करने वालों को बीमारी की चपेट में आने पर सघन चिकित्सा और वेंटिलेटर की जरूरत कहीं अधिक हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार धूम्रपान करने वालों को कोरोना से संक्रमित होने की अधिक संभावना है। सिगरेट, बीड़ी एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद का सेवन करने से कोरोना वायरस व्यक्ति के हाथ से मुंह तक एवं फिर शरीर में प्रवेष कर सकता है। वैश्विक वयस्क तम्बाकू सर्वेक्षण-2 के अनुसार भारत में तम्बाकू के उत्पाद से प्रतिवर्ष 1.3 मिलियन से ज्यादा लोगो की मृत्यु हो रही है।

मध्य प्रदेश में कुल 50.2 प्रतिषत पुरूष एवं 17.3 प्रतिषत महिलाएँ तम्बाकू सेवन करते है एवं 24.7 प्रतिषत वयस्क सार्वजनिक जगहों पर अप्रत्यक्षित धूम्रपान के संपर्क में आते है। ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे-2009 के अनुसार 55 हजार बच्चें हर वर्ष नियमित रूप से तम्बाकू सेवन करने वालों की सूची में जुड़ रहे है। तम्बाकू के नियमित एवं लंबे समय तक उपयोग करने से मुंह के कैंसर की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाती हैं। मुह के भीतर कोई गांठ, घाव, मुंह में सफेद दाग, लार टपकना, मुंह खोलने में, बोलने व निगलने में दिक्कत होना जैस लक्षण दिखने पर चिकित्सकीय परामर्श अवश्य लेना चाहिए। तम्बाकू के उपयोग से फेफड़ों का कैंसर, श्वसन तंत्र की बीमारी, गर्भावस्था के समय धूम्रपान से शिशु को होने वाले दुष्प्रभाव, अस्थमा, निमोनिया ब्रोन्काईटिस, बार-बार श्वसन तंत्र का संक्रमण एवं क्षयरोग, हदृय और रक्त संबंधी बीमारियों, पुरूषों में नपुंसकता और महिलाओं में प्रजनन क्षमता मे कमी या बांझपन जैसी समस्याएं भी उत्पन्न होती है। विभिन्न अध्ययनों से स्पष्ट हुआ है कि बच्चों के आस-पास धूम्रपान के दुष्परिणाम से नवजात शिशु की अकस्मात मृत्यु का संकट, निमोनिया, काली खॉसी एवं फेफड़ों से संबंधित समस्याएं उत्पन्न होती है।

तम्बाकू के सेवन से होने वाले प्रभाव एवं इससे छुटकारा प्राप्त करने के उपाय से संबंधित सही जानकारी आमजन तक पहुंचाये जाने जाना अति-आवश्यक है, ताकि जनसमुदाय तम्बाकू का सेवन न करने, स्वस्थ्य जीवन शैली अपनाने में प्रेरित हो सके। तम्बाकू को छोड़ने के लिए जयप्रकाश चिकित्सालय में तम्बाकू व्यसन मुक्ति केन्द्र संचालित किया जा रहा है। यहां पर तम्बाकू की आदत को छोड़ने के लिए सरल तरीक़ों से परामर्ष प्रदान किया जाता है। साथ ही टोल फ्री नंबर 1800-11-2356 पर भी परामर्श प्राप्त किया जा सकता है।

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