100 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में आरोपियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस, पासपोर्ट नहीं मिलने से विदेश भागने का शकइंदौर

100 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा करने वाले ऋण माफिया आरोपी संजय और नेहा द्विवेदी।

100 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा करने वाले ऋण माफिया आरोपी संजय और नेहा द्विवेदी।

इंदौर. 100 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा करने वाले ऋण माफिया संजय और नेहा द्विवेदी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है। ईओडब्ल्यू की छापामार कार्रवाई में आराेपियों के घर और कार्यालय से पासपोर्ट नहीं मिला,इस कारण आरोपियों के विदेश भागने की आशंका जताई जा रहीहै। पुलिस को अब तक की जांच में इस बात का पता चला है कि फर्जीवाड़े की मास्टरमाइंड संजय की पत्नी नेहा द्विवेदी है।


आरोपियों के खिलाफ बेटमा और देपालपुर थाने में किसानों ने एफआईआर कराई थी। एक पीड़ित महेश पुरी ने 11 जनवरी को ही धोखाधड़ी करने सहित अन्य मामलों में केस दर्ज कराया। मामले में पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई की जाती इसके पहले ही पति-पत्नी फरार हो गए जिनकी तलाश की जा रही है।


ईओडब्ल्यू की टीम ने सोमवार को संजय और नेहा के 5 ठिकानों पर छापामार कार्रवाई को अंजाम दिया था। इस दौरान ठिकानों से एग्रीमेंट और संपत्ति बंधक से जुड़े कागजात जब्त किए गए हैं। अलग-अलग कंपनी और डायरेक्टर्स के नाम से बनाई गईं बोगस सील भी जब्त की गई। ईओडब्ल्यू एसपी एसएस कनेश के मुताबिक, दो बोरी दस्तावेज कब्जे में ले लिए हैं, जबकि बाकी 23 बोरी को सील कर दिया है। एक टीम मुंबई स्थित दफ्तर की जांच के लिए भेजी गई है। वहां उसकी ऐसी ही 8 कंपनियां हैं। संजय ने इंदौर में बैठे-बैठे ही मुंबई की एक बैंक से 33 करोड़ रुपए का लोन ले लिया था।


जब निवेश हुआ, तब संजय जमानत पर था बाहर
डीएसपी आनंद यादव के मुताबिक संजय और नेहा की कंपनी डीएस कैपिटल में बीती तिमाही (सितंबर-दिसंबर) में 235 लोगों ने 50 लाख रुपए का निवेश किया। इस दौरान संजय जमानत पर बाहर था। जिस कंपनी में उसने निवेश करवाया, उसे सेबी से मान्यता नहीं है। उसने इस निवेश की जानकारी भी सेबी को नहीं दी। सेबी के नियमानुसार निवेश करने वाले हर व्यक्ति से एग्रीमेंट जरूरी है, वह भी नहीं मिला। दूसरी फर्जी कंपनी ई-बिज गेटवे के जरिए भी संजय ने काफी निवेश कराया।

2012 से फर्जीवाड़ा कर रहा है संजय
आरोपी संजय 2012-13 से ठगी कर रहा है। ऑनलाइन जारी होने वाले टेंडर के प्रिंट आउट निकालकर वह लोगों को प्रोजेक्ट मिलने का झांसा देता था। फिर उन्हें पार्टनर बनाता, उनकी संपत्ति बैंक में बंधक रखवाता और लोन निकाल लेता। संजय और पत्नी नेहा 2006-07 में एक निजी बैंक में नौकरी करते थे। यहीं दोनों ने सीखा कि किस तरह फर्जी कंपनी, दस्तावेज बनाकर लोन लिया जा सकता है। इसके बाद दोनों ने नौकरी छोड़ दी।



निवेश कंपनियां तक शामिल हैं। हकीकत में कहीं काम नहीं किया। ईओडब्ल्यू को जितने भी दस्तावेज मिले हैं, उनमें टेंडर की फोटोकॉपी, प्रोजेक्ट रिपोर्ट व लोगों को पार्टनर बनाने के एग्रिमेंट ही हैं। संजय ने दूसरी फर्जी कंपनी ई-बिज गेटवे के जरिए भी लोगों से काफी निवेश कराया। लोगों को फंसाने के लिए संजय ने जेसीबी, पोकलेन, क्रेन, मिक्सर खरीद रखे थे। इनका उपयोग कभी नहीं किया।

दिखावे के जेसीबी, पोकलेन, क्रेन कभी इस्तेेमाल नहीं किए

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