परंपरागत भगोरिया हाट बाजार पर कोरोना का संकट, सुनसान रहा पहला भगोरिया

फाइल फोटो

झाबुआ-पेटलावद। परंपरागत भगोरिया हाट बाजार पर कोरोना का संकट मंडराता देख इस बार भी बाजार सुनसान रहे। 22 मार्च से जिले का पहला भगोरिया पेटलावद में मनाया जाना था परंतु प्रशासन की सतर्कता और कोरोना के भय ने लोगों को घरों में कैद कर दिया। बस यही कारण रहा लोग परंपरागत पर्व नहीं मना सकें जबकि पूर्व से ही आदिवासी समाज में भगोरिया पर्व को लेकर खासी तैयारियां चल रही थी परंतु ऐन वक्त पर सारी तैयारियों पर कोरोना ने पानी फेर दिया जबकि पूरे साल में यही एक ऐसा उल्लास और मनोरंजन का त्योहार माना जाता है। आदिवासीयों का प्रसिद्ध यह पर्व होली से एक सप्ताह पहले भरता है। होली से एक सप्ताह पूर्व लगने वाले हाट बाजारों को ही भगोरिया / भौंगरिया पर्व कहां जाता है। आदिवासी समाज में भगौरिया हाट बाजारों को लेकर साल भर इंतजार रहता है जबकि आदिवासी समाज का संपूर्ण वर्ग इसे उत्साह एवं उमंग के साथ मनाता है। इन साप्ताहिक हाट बाजारों में झूले, चकरियां, पान, शरबत बर्फ के गोले और अन्य खाने पिने की चिजों की दुकाने लगती है। आदिवासी वर्ग के लोग सज-धज कर एक जैसी वेश भूषा में हाट बाजारों में आते है और ढोल और मांदल की थाप पर नृत्य करते है। बांसुरी की मधुर तान भी छेडते है। संपूर्ण वातावरण सुमधुर गायन ओर नृत्य, मस्ती व उल्लास का रहता है। परंतु इस बार कोरोना के चलते भगोरिया हॉट नहीं भर पाया बाजार भी सुनसान देखें गए प्रशासन अलर्ट रहा ताकि कोई भी भीड़ भाड़ की स्थिति ना बने, इस बार भी पूर्व की भाती त्यौहारिया हॉट कहे जाने वाले भगोरिया पर्व पर बाजार सुनसान रहे।

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