बाल कवि ने भाई बहनों के लिए लिखी रचना

रक्षाबंधन

वादा करके मेरी बहना भूल क्यों हाँ! जाती है
तक रहा हूं राह उसकी, वह नजर ना आती है
हाथ की लकीरों में हाँ, यूं नजर हाँ आती है
देख मेरे मौला तू भी अश्क़ वो बहाती है
वादा करके मेरी बहना…।

कर में अपने तू हां! रखना राखी मेरे नाम की
बाबा से बस इतना कहना माला फेरे राम की
आ रहा हूं देख बहना लहरा के तिरंगा अपना
बूढ़ी मां से तू यूँ कहना हो गया है पूरा सपना
यह संदेशा ले जाने में हवा भी घबराती है।
देख मेरे मौला तू भी…।
वादा करके मेरी बहना…।।

हँस रही है मुझ पर सखियां, किसके बांधू राखी भैया
हूँ अभागन मैं तो रामा, बिछड़ गया क्यों मेरा भैया
इंतजार तेरा जन्मों करती मैं रहूँगी भैया
सांसे दगा दे भी देगी, राह से ना हटूंगी भैया
बादलों की बरखा वह तो नैनों से बरसाती है
देख मेरे मौला तू भी…।
वादा करके मेरी बहना।।

सीने में दुश्मन के लिख कर वन्दे- मातरम मैं आऊंगा
राखी बंधवा कर मेरी बहना सखियों को फिर दिखलाऊंगा
चांद, भानु, सितारे, वादी तेरे बिन ये कुछ नहीं है
जुल्फों की तेरी हाँ! खुशबू बसंत भी तो कुछ नहीं है
यह तो जी सुन कर के देखो, बहना चली आती है
वादा नहीं भूली बहना, वादा नही भूली हैं

रचनाकार बालकवी मनीष कुमार सेन सरड़ा, जिला- झालावाड़ (राज.)

निलेश मालवीय की रिपोर्ट

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