भगवान गोरक्षनाथ प्रकट उत्सव भगवान गोरक्षनाथ की महिमा

यह गुरु गोरक्षनाथजी ही हैं जिन्होंने नाथ पंथ का सबसे ज्यादा प्रचार किया। नव नाथों में इनका सर्वोच्च स्थान है। लोगों की मान्यता है कि गुरु गोरक्षनाथजी ग्यारहवीं शताब्दी के योगी हैं। यह सर्वथा गलत है, क्योंकि राजा भर्तृहरी पहली सदी में उज्जयनी नगरी के राजा थे और श्रीगुरू गोरक्षनाथ उनके गुरु थे। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा रचित ‘श्री गोरक्ष स्तवन’ में उनकी स्तुति व उल्लेख भी मिलता है। यहां तक कि स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण और शिव पुराण में भी भगवान शिव के गुरु स्वरूप श्री गुरु गोरक्षनाथजी का उल्लेख है। यह सत्यापित करता है कि भगवान शिव गुरू गोरक्षनाथ के रुप में हर युग में विद्यमान रहे हैं, जिनको समय के किसी भी बंधन में बांधना अनुचित है।

गोरक्ष अत्यंत पवित्र नाम है। इसका अर्थ है ‘गौमाता के रक्षक’। पुराणों में ‘गौ’ को 33 कोटि का निवास माना गया है। यह ऐसे है जैसे वट वृक्ष पर पत्ते तो अनेक है पर उनका संरक्षण व पालन जड़ में स्थित प्राण ऊर्जा से किया जा रहा हो। इन पत्तों की सजीवता और सुंदरता तो केवल वट वृक्ष के जड़ की प्राण ऊर्जा के क्रियाशील होने से ही संभव है।
भारत की सारी संत-परंपरा सदाशिव भगवान श्री गुरू गोरक्षनाथजी की ऋणी है। पतंजलि ने भी गोरक्षनाथ के   योग ज्ञान को और प्राकृतिक जड़ी बूटी को भी सांसर में  में प्रचार प्रसार किया यह जानने के बाद कोई संभावना न रह जायेगी।  बुध्द ने गोरक्षनाथ भगवान के निर्गुण निराकार योग का प्रचार प्रसार किया और इस योग ज्ञान को  बुद्ध के बिना ध्यान की आधारशिला उखड़ जायेगी। जैसे कृष्ण के बिना प्रेम की अभिव्यक्ति को मार्ग न मिलेगा- ऐसे गुरु गोरख के बिना उस परम सत्य को पाने के लिए विधियों की जो तलाश शुरू हुई, साधना की जो व्यवस्था बनी, वह न बन सकेगी। गुरु गोरख ने जितने आविष्कार मनुष्य के भीतर अंतर-खोज के लिए किए, उतने किसी ने भी नहीं किए। मनुष्य की अंतर्आत्मा में जाकर परम ब्रह्म से एकाकार करने के लिए इतने द्वार तोड़े, कि लोग द्वारों में ही उलझ गए। यह उलझाव इस सीमा तक जा पहुंचा कि लोग हताश होने लगे तथा गोरख-धंधा शब्द प्रचलन में आ गया। जो समझ में ना आ सके वो गोरख-धंधा है।  इस लेख के माध्यम से  महन्त राजनाथ योगी सभी प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रिक मीडिया सभी से अनुरोध करते हैं कि हिंदू धर्म की आस्था के साथ इस प्रकार खिलवाड़ ना हो इस बात का ध्यान रखा जाए

महंत राजनाथ योगी

Leave a Reply