रक्षा मंत्री ने डेफएक्सपो 2022 की तैयारियों की समीक्षा की; कोविड प्रोटोकॉल में छूट से बढ़ती हुई रूचि के कारण इस आयोजन की अवधि एक दिन बढाई गई

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने आज नई दिल्ली में डेफएक्सपो-2022 की तैयारियों की समीक्षा की। यह भूमि, नौसेना और होमलैंड सुरक्षा प्रणालियों के बारे में आयोजित होने वाली एशिया की सबसे बड़ी प्रदर्शनी है। यह मार्च में गुजरात के गांधीनगर में आयोजित की जा रही है। यह विश्व की सबसे बड़ी रक्षा अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में से एक है। डेफएक्सपो के इस 12वें संस्करण में व्यापक रूप से घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय रुचि देखी जा रही है क्योंकि देश में कोविड-19 मामलों में कमी के कारण भारत द्वारा अपने स्वास्थ्य प्रोटोकॉल में ढील दी गई है। इस मेगा आयोजन के लिए अब तक 930 प्रदर्शकों ने पंजीकरण कराया है और आने वाले दिनों में यह संख्या बढ़कर 1,000 से अधिक होने की उम्मीद है। विदेशों के रक्षा मंत्रियों के शामिल होने की पुष्टि प्राप्त हो रही है जो पूर्व-कोविड समय के दौरान लखनऊ, उत्तर प्रदेश में फरवरी 2020 में आयोजित इस प्रदर्शनी के पिछले संस्करण के अनुरूप ही है।

यह देखते हुए कि कोविड प्रोटोकॉल में छूट ने डेफएक्सपो -2022 में अधिक रुचि पैदा की है, रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने इस कार्यक्रम की अवधि एक दिन के लिए बढ़ा दी है। अब प्रदर्शनी 10 से 14 मार्च, 2022 तक आयोजित की जाएगी। यह तीन व्यावसायिक दिनों तक रक्षा, व्यवसाय की सुविधा प्रदान करेगी और इसे दो सार्वजनिक दिनों के दौरान गुजरात के युवा उद्यमियों और कॉलेज/स्कूल सहस्राब्दी के लिए समावेशी बनाया गया है।

इस डेफएक्सपो-2022 को एक हाइब्रिड प्रदर्शनी के रूप में आयोजित किया जाएगा, जिसमें भौतिक और वर्चुअल दोनों तरह के ही स्टॉल होंगे। इससे यह अधिक जुड़ाव सुनिश्चित करेगा क्योंकि प्रदर्शक भौतिक और वर्चुअल दोनों तरीकों से ही उपस्थित जनों की जरूरत पूरा करने में समर्थ होंगे। रक्षा मंत्री ने बताया कि वर्चुअल रूप से उपस्थित जन सेमीनार में भाग ले सकते हैं, प्रदर्शकों और प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर सकते हैं। वे बिजनेस-टू-बिजनेस (बी2बी) बैठकों का आयोजन कर सकते हैं और उत्पाद विवरण और सहायक वीडियो देख सकते हैं।

इस मेगा प्रदर्शनी की तीन स्थल प्रारूप में योजना बनाई जा रही है- हेलीपैड प्रदर्शनी केंद्र (एचईसी) में प्रदर्शनी; महात्मा मंदिर सम्मेलन एवं प्रदर्शनी केंद्र (एमसीईसी) में कार्यक्रम और सेमिनार तथा साबरमती रिवरफ्रंट पर जनता के लिए लाइव प्रदर्शन। इस आयोजन में अनिवार्य रूप से मास्क पहनना, संपर्कहीन बातचीत, श्वसन स्वच्छता आदि सभी स्थानों पर प्रचलित स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के अनुरूप सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए जाएंगे।

गर्व की भावना पैदा करने के लिए इस आयोजन का विषय ‘पथ से गौरव’ रखा गया है। अपने किस्म की इस पहली पहल में प्रथम में प्रथम होने के भारत के संकल्प को प्रदर्शित किया जाएगा। सबसे आगे स्वदेशी तकनीकी और लॉजिस्टिक कौशल के साथ इस आयोजन में रक्षा उद्योग, स्टार्ट-अप और एमएसएमई के प्रदर्शन के साथ-साथ इस कार्यक्रम में भाग ले रहे विदेशी ओरिजनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (ओईएम) के साथ ठोस साझेदारी को मजबूत करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। डेफएक्सपो -2022 भारत के व्यवसाय हितों को आगे बढ़ाने और क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में वैश्विक पहल करने के लिए भारत के संकल्प का प्रतीक है। श्री राजनाथ सिंह ने गुजरात सरकार के सहयोग से रक्षा मंत्रालय द्वारा किए गए प्रबंधनों की सराहना करते हुए डेफएक्सपो -2022 के सुरक्षित और सफल आयोजन के बारे में विश्वास व्यक्त किया।

रक्षा मंत्री ने समीक्षा के दौरान एक डेफएक्सपो -2022 मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया गया। यह इस योजना से संबंधित सभी मुद्दों के लिए एक इंटरैक्टिव और उपयोगकर्ता के अनुकूल एक इंटरफेस है। यह ऐप एंड्रॉइड/आईओएस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है जिसमे प्रदर्शकों, उपस्थित जनों और मीडिया की सहायता के लिए विशेष सुविधाएं हैं। यह प्रदर्शकों, कार्यक्रम, वक्ताओं, स्थल के नक्शे, गाड़ी चालन निर्देशों और प्रकाशनों के साथ-साथ आगंतुकों और प्रदर्शकों के बार में जानकारी भी प्रदान करता है। प्रतिनिधि, आतिथ्य प्रबंधन और स्वच्छता संबंधी मुद्दों सहित संरचित फीडबैक को भी इस ऐप में शामिल किया गया है।

रक्षा राज्य मंत्री श्री अजय भट्ट, रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी, नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार, उप सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे, वित्तीय सलाहकार (रक्षा सेवाएं) श्री संजीव मित्तल और रक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ नागरिक और सैन्य अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि 2 सितंबर, 2021 को एकता नगर में रक्षा मंत्री की डेफएक्सपो 2022 की समीक्षा के दौरान ही भारत सरकार और गुजरात सरकार के बीच भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को परिभाषित करने वाले एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। तब रक्षा मंत्री ने बताया था कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार की नीतियों को ध्यान में रखते हुए व्यापक भागीदारी होगी।

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