राकेश रावत का कारनामा़…..
थांदला वन परीक्षेत्र में विभाग के निस्तार तालाब में चला दी जेसीबी

झाबुआ-मेघनगर। (रिपोर्ट-कलसिंह भूरिया,9425945343) वन परीक्षेत्र थांदला के अंतर्गत आने वाले ग्राम छायन के फॉरेस्ट एरिया जहां पर विभाग द्वारा लगभग 25 लाख की लागत से निस्तार तालाब बनाया जा रहा है जहां पर निर्माण कार्य देख रहे श्री रावत द्वारा जेसीबी- ट्रैक्टर चलवा कर सारा काम तमाम कर लिया गया और लाखों का यह तालाब पूरी तरह अधिकारियों के हाथों भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। मामले में वरिष्ठ अधिकारी भी चुप्पी साधे बैठे हैं और संतोषप्रद जवाब देने से मुंह फेरने लगे है।
स्थानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वन परिक्षेत्र थांदला के अंतर्गत आने वाले फॉरेस्ट बीट ग्राम छायन मैं फॉरेस्ट विभाग द्वारा बनाए जा रहे निस्तार तालाब मैं राकेश रावत द्वारा जमकर मनमानी की गई जहां सरकार की मंशा के विपरीत कार्य करते हुए निर्माण कार्य में मजदूरों के बजाय जेसीबी का उपयोग कर आधे से अधिक तालाब का निर्माण कर दिया। सुत्रों के अनुसार यह कार्य करीबन 25 लाख की लागत का बताया जा रहा है लेकिन इतनी बड़ी लागत से बन रहे इस तालाब की गुणवत्ता की बात करें तो यहां पर हर स्तर से कार्य में लापरवाही और भ्रष्टाचार की बू आती है। निर्माण कार्य को देख रहे हैं श्री रावत द्वारा यहां पूरे तरीके से अपनी मनमानी की है। राकेश की इस हिम्मत को विभागीय अधिकारियों का मौखिक संरक्षण है जिस कारण खुलेआम निर्माण कार्यों के नियमों की धज्जियां उड़ाने लगे। देखा गया कि तालाब निर्माण में पाल पर डाली गई सारी मिट्टी, मिट्टी नहीं होकर बारिक मोरम है जो किसी भी हाल में पानी को रोक नहीं सकता और सारा पानी बारिश मे रिस कर बाहर निकल जाएगा यहां दिखावे के लिए काली मिट्टी को पाल पर डाल कर लीपापोती के कार्य को छुपाने का काम किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार विभाग द्वारा जो साईट सिलेक्शन किया गया वह गलत है, निर्माण स्थल पर निर्माण संबंधी जानकारी अंकित बोर्ड नहीं लगाया गया, पाल निर्माण में महज दर्जनभर ट्रैक्टर पानी का ही उपयोग किया गया। मिट्टी की जगह बारिक मोरम पाल में डालकर खानापूर्ति की गई। वेस्ट वेयर की खुदाई पाल से सटाकर की गई जो भविष्य में अधिक बारिश से पाल कटने का खतरा रहेगा, इसके साथ ही इसके घटिया निर्माण से गांव में कुछ घरो को भी जनहानि और मालहानि का नुकसान हो सक़ता है। ग्रामीणों द्वारा उक्त कार्य की जांच किए जाने की मांग की है।

रोजगार है फिर भी पलायन
शासन द्वारा आदिवासी बहुल क्षेत्रों में पलायन रोकने के लिए विभिन्न प्रकार की रोजगार मूलक योजनाएं विभागीय स्तर पर चलाई जा रही है ताकि लोगों को अपने ही गांव में मजदूरी मिल सके और पलायन रुके लेकिन स्थानीय विभागीय अधिकारी कर्मचारी इन योजनाओं को अपनी कमाई का जरिया बनाकर मजदूरों का रोजगार छिनने में लगे है। मजदूरों की जगह जेसीबी का उपयोग कर लाखों का भ्रष्टाचार कर अवैध कमाई करने में जुटे।

यह बोले जिम्मेदार
मामले में वन विभाग के राकेश रावत से संपर्क करने पर उन्होंने कहा मैं किसी प्रकार की जानकारी देने के लिए नियुक्त नहीं हूं जो भी जानकारी लेना है मेरे वरिष्ठ अधिकारियों से ले ले। इस दौरान उनके द्वारा जेसीबी चलाई जाना स्वीकार किया है।

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