राज्यपाल श्री टंडन कुरूक्षेत्र में देखेंगे जीरो बजट गौ-आधारित प्राकृतिक खेती

योगिता अहिरवार.

राज्यपाल श्री लालजी टंडन 25 सितम्बर को कुरूक्षेत्र (हरियाणा) में गौ-आधारित शून्य लागत प्राकृतिक कृषि मॉडल और गुरुकुल के कृषि फार्म में प्राकृतिक कृषि के व्यापक प्रकल्प का अवलोकन करेंगे।  राज्यपाल को राष्ट्रपति द्वारा गठित राज्यपालों की कृषि सुधार समिति के संयोजक, गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किसानों की आय को दोगुना करने के लिए गौ-आधारित शून्य लागत प्राकृतिक कृषि मॉडल को देखने के लिए आमंत्रित किया है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति द्वारा राज्यपाल श्री टंडन को कृषि और कृषक विषय पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के संयोजन में गठित कृषि सुधार समिति का सदस्य मनोनीत किया गया है। समिति में महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के राज्यपाल भी सदस्य हैं।

राज्यपाल श्री टंडन समिति के समक्ष किसानों की आय को दोगुना करने के संबंध में कृषि आदान लागत को कम करने, उन्नत कृषि तकनीक को बढ़ावा देने, जैविक खेती का विस्तार करने, सिंचाई क्षेत्र के विस्तार और सूक्ष्म सिंचाई को प्रोत्साहन देने, तीसरी फसल के क्षेत्रफल में वृद्धि करने, कृषि वि‍विधिकरण, उद्यानिकी क्षेत्र के विस्तार के प्रयासों पर विशेष बल दिये जाने का पक्ष प्रस्तुत करेंगे। श्री टंडन समिति के समक्ष कृषि क्षेत्र में किये जाने वाले कार्यों की रूपरेखा पर भी प्रकाश डालेगें। उत्पादकता में वृद्धि के साथ जीविकोपार्जन एवं आय को दोगुना करने में मदद के लिए विभिन्न योजनाओं की उपयोगिता एवं प्रभाव का सर्वेक्षण और विश्लेषण कर डाटाबेस बनाने की आवश्यकता बतायेंगे। फसल उत्पादकता बढ़ाने के लिए तकनीकी विकास एवं प्रसार के साथ मौसम परिवर्तन से होने वाले दुष्प्रभाव के प्रबंधन के लिये प्रयासों की जरूरत भी बतायेंगे। जैविक कृषि को बढ़ावा देने के लिये तकनीकी सहयोग और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों तथा तकनीकी हस्तांतरण की जरूरत को रेखांकित करें। कृषि वानिकी से संबंधित तकनीकी विकास के प्रसार, कृषि विज्ञान केन्द्रों का अधिक संख्या में विस्तार और किसानों को उद्यानिकी फसलों की पैदावार के लिये प्रोत्साहित करने के प्रयासों पर बल देंगे। साथ ही पशुपालन के क्षेत्र में गोवंश संरक्षण एवं सुधार के लिए प्रोत्साहित करने, दुग्ध उत्पादकों को कृषि उत्पादकों की भाँति उचित मूल्य एवं सुविधाएँ उपलब्ध कराने का सुझाव भी देंगे।

दलहन, तिलहन, दुग्ध उत्पादन में अव्वल मध्यप्रदेश

ज्ञातव्य है कि मध्यप्रदेश देश का प्रमुख अनाज उत्पादक क्षेत्र है। यहाँ लगभग 63% फसली क्षेत्र में खाद्यान्न उत्पादन होता है, जिसमें वर्ष 2014-15 के अनुसार 41% में अनाज, 21% में दलहन तथा 29% में तिलहन की खेती होती है। दलहन उत्पादन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में अव्वल है। देश के कुल उत्पादन में मध्यप्रदेश 26.4% योगदान दे रहा है । प्रदेश का चना उत्पादन में 38.6 प्रतिशत और सोयाबीन में 44 प्रतिशत योगदान है। उद्यानिकी फसलों में अमरुद, लहसुन एवं मिर्च के उत्पादन में प्रदेश प्रथम स्थान पर और संतरा, प्याज, हरा मटर तथा धनिया उत्पादन में द्वितीय और टमाटर उत्पादन में तीसरे स्थान पर है। प्रदेश में देश के कुल दुग्ध उत्पादन का 8.34% हो रहा है, जो देश में तीसरे स्थान पर है। प्रदेश में किसानों की आय को दोगुना करने और खेती में सुधार के लिए प्रदेश में अनुसंधान की गतिविधियाँ, जैविक खेती के लिए फसल सुधार योजना, बीज उत्पादन, खेती की तैयारी तथा मृदा की जाँच आदि कार्यक्रमों को प्राथमिकता से नियमित रूप से संचालित किया जा रहा है। कृषि उपज की 58 मंडियों को ई-नाम से भी जोड़ा गया है।

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