शादी से पहले आने वाली जिदंगी के लिए बेटी को इन संस्कारों से ढ़ालते है माता पिता

जितेन्द्र मेहरा / होशंगाबाद/ – बच्चों मे अच्छें संस्कारों की नींव जन्म से ही परिवार से पड़ती है। कहा जाता है कि माता पिता का अपने बच्चों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य है उनमे अच्छे संस्कारों को ढालना । अगर बात लडकियों को लेकर की जाएं तो कहा जाता है कि लड़कियां हमेशा से ही परायाधन होती है। जिसके ऊपर दो परिवारों को जिम्मेदारी होती है। बेटी को अच्छे संस्कार देना माता-पिता का प्रमुख कर्तव्य है, क्योंकि कहा जाता है कि अगर मां अच्छे संस्कारों वाली है तो लड़की में भी यह गुण होंगे। पर कभी आपने सोचा है कि जिस तरह से एक मां अपनी बेटी को शादी से पहले आने वाली जिंदगी के लिए तैयार करती है उसी तरह एक पिता का भी कर्तव्य होता है कि वो अपने बेटी को सही मार्गदर्शन दें।अगर बात पिता को लेकर कि जाएं तो पिता बेटी के लिए सबसे अच्छा मित्र और हीरो होता है। वह अपनी हर प्रोब्लम का हल ढ़ूढने के लिए पिता के पास ही जाती है। और बेटी को अपने पिता से ही प्रेरणा मिलती है। पिता और बेटी का हमेशा से अटूट रिश्ता रहा है।ऐसा ही कुछ बेटी की शादी के दौरान उसके पिता के द्वारा दिए गए संस्कारों को लेकर भी होता जो शादी के बाद उसे अपने ससुराल मे अपनाने मे काफी उपयोगी है अक्सर शादी के बाद लड़की के जीवन मे परिवर्तन आता है जिसके लिए उसे अपने ससुराल के अनुरुप ढलना होता है जो उसके सुखी जीवन के लिए बेहतर हो सकता है।चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों ना हो, हमेशा खुद की इज़्ज़त करना, क्योंकि अगर तुम खुद की इज़्ज़त नहीं करोगे तो तुम्हारा साथी भी नहीं करेगा। और अक्सर पुरूषों को वही लड़की अच्छी लगती है जो अपने फैसले खुद ले सके।शादी से पहले जिस तरह से हम अपने माता पिता को सम्मान देते है उसी तरह से हमे ससुराल मे भी अपने सास ससुर को आदर सम्मान देना चाहिए । तभी तुम्हारे सास-ससुर के बीच एक अच्छा रिश्ता बन पाएगा।तुम्हारा प्यार केवल अपने सास-ससुर तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, उसके बाकि परिवार वालों को भी उतना ही प्यार करना और इज़्ज़त देना ठीक उसो तरह जिस तरह तुम चाहती हो कि तुम्हारा पति ना केवल हमसे प्यार करें बल्कि तुम्हारे भाई-बहनो से भी करें। अपने हर रिश्ते की बराबर से इज़्ज़त करनी होगी।किसी भी तरह कि  समस्या या परिस्थिति से भागना मत  क्योकि समय कभी एक सा नही रहता है बल्कि उस समय का डटकर मुकाबला करना  ।  तुम उस समस्या की जड़ ढूंढ़ो और उसका समाधान निकालो। बस यही एक तरीका है जिससे तुम अपने दिमाग को शांत कर सकोगी और चीज़े ठीक रहेंगी।अक्सर पति यह चाहता है कि उसकी पत्नी हर कदम पर उसका साथ दें। तो उसे ज़्यादा बदलने की कोशिश मत करना। अगर तुम चाहती हो की वो तुम्हे वैसे ही अपनाएं जैसी तुम हो तो तुम्हे भी उसे वैसे ही अपनाना होगा और उसकी हर छोटी बड़ी सफलता और अपने परिवार के लिए उठाने वाले हर छोटे बड़े कदम पर तुम्हे उसकी प्रशंसा करनी होगी।हर रिश्ते की समझ रखना सबसे ज्यादा जरुरी है क्योंकि हर रिश्ता बहुत ही नाजुक डोरी से बना हुआ होता है। जैसे एक पुरुष का व्यवहार अपनी मां के साथ होता है वैसे ही वो अपनी पत्नी या बेटी के साथ होगा। जब मेरी और तुम्हारी मां की शादी हुई थी तब उसे पता था कि मैं तुम्हारी दादी से कितना प्रेम करता हूं और तुम्हारी मां ने खुले दिल से इस बात को स्वीकारा था और उसने भी उतना ही प्यार तुम्हारी दादी को दिया,  जिससे हमारा रिश्ता और भी मज़बूत हो गया, तो अपने पति पर ताने कसने की बजाए उनके रिश्ते को समझना और उस रिश्ते का हिस्सा बनने की कोशिश करना।अक्सर लड़कियों को शादी के बाद यह समझाया जाता है कि तुम्हारा ससुराल ही तुम्हारा असली घर है।  तुम्हारा मायका भी हमेशा तुम्हारा घर रहेगा और इस घर के दरवाज़े सदा तुम्हारे लिए खुले रहेंगे पर सही मायनों में तुम उसका सही रुप से पालन करों।

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