श्री सर्बानंद सोनोवाल वाराणसी में होने वाले 2 दिवसीय प्रधानमंत्री गति शक्ति मल्टीमॉडल जलमार्ग शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे

भारत सरकार के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) 11-12 नवंबर, 2022 को ‘प्रधानमंत्री गति शक्ति मल्टीमॉडल जलमार्ग शिखर सम्मेलन’ का आयोजन कर रहा है। इसका आयोजन उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल (व्यापार केंद्र और संग्रहालय) में किया जाएगा। यह सम्मेलन जलमार्ग क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान देने के साथ प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टरप्लान के बारे में व्यापक जागरूकता उत्पन्न करेगा।

इसके अलावा केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल इस शिखर सम्मेलन से पहले वाराणसी के रविदास घाट पर एनडब्ल्यू-1 (गंगा नदी) पर सामुदायिक घाटों का उद्घाटन (7) और शिलान्यास (8) भी करेंगे।

प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टरप्लान और मल्टीमॉडल जलमार्ग शिखर सम्मेलन पर श्री सोनोवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में यह सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास के विचार के लिए प्रतिबद्ध है। लोगों और वस्तुओं की सुचारू यातायात के संबंध में नजदीक और सुदूर स्थान तक कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने को लेकर लॉजिस्टिक दक्षता में सुधार व लॉजिस्टिक लागत को कम करने के लिए एक परिवर्तनकारी दृष्टिकोण है। मंत्रालय ने गतिशक्ति एनएमपी के तहत लगभग 62,627 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली 101 परियोजनाओं की पहचान की थी। इन परियोजनाओं को 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, चालू वित्तीय वर्ष के अंत तक 1,913 करोड़ रुपये की लागत की उच्च प्रभाव वाली नौ परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य है।”

आईडब्ल्यूएआई के अध्यक्ष श्री संजय बंदोपाध्याय ने कहा, “यह शिखर सम्मेलन केंद्र व राज्य सरकारों, उद्योग व थिंक टैंक के प्रमुख हितधारकों को राष्ट्रीय मास्टर प्लान को साझा करने और चर्चा करने के लिए एक नेटवर्किंग मंच प्रदान करेगा। इसमें संबंधित मंत्रालय व विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, पत्तन प्राधिकरण, क्षेत्र के विशेषज्ञ और निजी क्षेत्रों के हितधारक हिस्सा लेंगे।”

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान को लॉन्च किया था। इसका उद्देश्य विभिन्न विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) को मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी अवसंरचना प्रदान करना और लॉजिस्टिक दक्षता में बढ़ोतरी करना है। इसके अलावा लोगों और वस्तुओं की तेज व कुशल यातायात की सहायता करने के लिए सभी मौजूदा और प्रस्तावित बुनियादी ढांचे से संबंधित विकास पहलों के कार्यान्वयन को एकीकृत करना है। एक सुचारू व कुशल लॉजिस्टिक प्रणाली, विकास की रीढ़ के रूप में काम करती है और यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ को प्राप्त करने में एक महत्वपूर्ण कारक होगी।

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