सीएए के ‎खिलाफ ‎हिंसा कर रहे दो आरोपी हुए ‎रिहा

बिजनौर उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार हुए दो आरोपियों को जिला एवं सत्र नयायालय से जमानत मिल गई। हालां‎कि आरोपियों को जमानत देते हुए जज ने पुलिस की एफआईआर और विवेचना पर भी सवाल खड़े कि एहैं। दरअसल, जमानत पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस के दावों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि कोई सबूत पेश नहीं किए गए कि आरोपी हिंसा, फायरिंग व आगजनी में शामिल थे। इतना ही नहीं हथिया की बरामदगी भी नहीं हुई और किसी पुलिस वालों को गोली भी नहीं लगी। बता दें ‎कि जज ने कहा, “मामले के गुण-दोष पर कोई विचार किए बिना, मेरे विचार से, परिस्थितियों को देखते हुए और अपराधों की प्रकृति एक आधार पर अभियुक्त को जमानत दी जानी चाहिए।” बता दें बिजनौर पुलिस ने जिले के नहटौर, नजीबाबाद और नगीना में हिंसा में लिप्त होने का दावा करते हुए 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया और कई प्राथमिकी दर्ज कीं। हालां‎कि जमानत का आदेश नजीबाबाद पुलिस स्टेशन में शफीक अहमद और इमरान के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी से संबंधित है, जिसमें दोनों पर दंगों और हत्या के प्रयास का आरोप लगा था। पुलिस ने अपने एफआईआर में लिखा था ‎कि हमें सूचना मिली कि जलालाबाद के 100-150 लोगों ने नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ एनएच-74 पर जाम लगा दिया है। इस भीड़ का नेतृत्व सह्फिक अहमद और इमरान ने किया।

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