सीहोर के पास ग्राम गुदभेला में डेंगू की दस्तक

संवातदाता कपिल सोलंकी

शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम गुड़भेला में 1 दिन पहले डेंगू का संदिग्ध मिलने के बाद प्रशासन हरकत में आया लगातार दूसरे दिन भी दो टीमें गांव में पहुंची और लोगों के घर में भरे पानी की जांच की गुरुवार को 86 घरों में रखें 498 कंटेनर ओं की जांच की गई हालांकि इनमें से 8 कंटेनर ओं में लार्वा मिला है जबकि तीन अन्य सामान्य बुखार के मरीज मिले हैं ऐसे में अब अचल में भी डेंगू की दस्तक फैल गई है हालांकि प्रशासन का दावा है कि डेंगू की संगीत मरीज गांव से दूर खेत पर बने मकान पर रहती थी सीहोर की एक निजी लैब में जांच के बाद उसका उपचार कर दिया गया था इसके बाद एहतियात के तौर पर परिजनों ने गांव के मकान में पीड़िता को रखा था गांव के इस मकान में डेंगू की पीड़िता रहती थी उसके आसपास करीब 500 मीटर के दायरे में आने वाले सभी घरो में टेमोफॉस का स्प्रे किया गया इसके बाद ही बुखार के यदि कोई मरीज मिलता है तो उसकी जांच कराई जाएगी लोगों के घर में भरे पानी की जांच की जा रही है बुधवार को गांव में 50 घरों के घरों के 375 कंटेनर रो की जांच की थी जहां 7 घरों में डेंगू का लारवा मिला था 432 घर है गांव में ग्राम गुड़भेला में करीब 432 घरों में 2340 लोग रहते हैं यहां की 55 वर्ष की महिला बिंदा बाई ने सीहोर की एक निजी पैथोलॉजी में अपना टेस्ट एंटीजन टेस्ट करवाया था जिसमें उसकी टेस्ट रिपोर्ट डेंगू पॉजिटिव पाई गई निजी लैब से सूचना के बाद जिला मलेरिया अधिकारी क्षमा बर्वे ने तुरंत ही मलेरिया निरीक्षक फील्ड वर्कर एएनएम आशा पर्यवेक्षक आशा कार्यकर्ता के दो अलग-अलग दल बनाकर पूरे गांव का सर्वे शुरू करवा दिया है
नहीं चलाया जागरूकता अभियान : डेंगू के कारण और बचाव के तरीकों के बारे में कई ग्रामीण अब भी अंजान है स्वास्थ्य अमला यहां लोगों के घरों में भरे पानी की जांच तो कर रहा है लेकिन इन ग्रामीणों के डेंगू के कारण और बचाव के तरीके कोई नहीं बता रहा है जिससे लोगों को डेंगू को लेकर अभी भी अनजान है यही नहीं डेंगू से बचाव के लिए भी यहां कोई बहुत अधिक प्रयास नहीं हुए हैं हालांकि अब स्वास्थ्य विभाग  ने यहां बैनर और पोस्टर जरूर लगवाएं हैं
गांव वाले हमें नहीं पता डेंगू कैसे होता है:  गांव में अधिकांश लोगों को डेंगू की वजह पता नहीं है वह सोचते हैं कि मच्छरों के काटने से ही डेंगू होता है ऐसे में मच्छरों से बचने के लिए ग्रामीण हर दिन घर के आस-पास धुआ करते हैं ताकि मच्छर भाग जाए गांव के मोहन मेवाडा ने बताया कि हम डेंगू से बचाव के लिए घर के आस-पास गंदगी इखट्ठी नहीं होने देते हैं इसके साथ ही मच्छर भगाने के अन्य तरीके भी अपनाते थे जब घर में पानी की जांच की गई तो समझ में आया कि डेंगू तो किसी और तरीके से फैलता है इसी तरह 70 वर्ष की कटोरी बाई बताती है कि मच्छर के काटने से बुखार आता है डेंगू क्या होता है उन्हें नहीं

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