स्वास्थ्य के क्षेत्र में केंद्रीय बजट 2022 के सकारात्मक प्रभाव पर वेबिनार में प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ

नमस्कार जी!

मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी, देश भर से पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर में हेल्थकेयर से जुड़े सभी प्रोफेशनल्स, पैरामेडिक्स, नर्सिंग, हेल्थ मैनेजमेंट, टेक्नॉलॉजी और रिसर्च से जुड़े सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों !

सबसे पहले तो आप सभी को दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीनेशन मिशन को सफलतापूर्वक चलाने के लिए 130 करोड़ देशवासियों की तरफ से मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं! भारत का हेल्थकेयर सिस्टम कितना efficient है, किस प्रकार mission oriented है, इसे आपने पूरी दुनिया के सामने establish किया है।

साथियों,

ये बजट बीते 7 साल से हेल्थकेयर सिस्टम को रिफॉर्म और ट्रांसफॉर्म करने के हमारे प्रयासों को विस्तार देता है और जो बजट शास्त्र के जानकार लोग हैं, वह इस बात को महसूस करते होंगे कि day one से हमारी बजट हो या हमारी नीतियां हो, उनमें एक कंटिन्यूटी है और प्रोग्रेसिव अनफोल्डमेंट है। हमने अपने हेल्थकेयर सिस्टम में एक holistic approach को adopt किया है। आज हमारा फोकस health पर तो है ही, wellness पर भी उतना ही अधिक है। हम illness के लिए जिम्मेदार फैक्टर्स को दूर करने, Wellness के लिए समाज को प्रोत्साहित करने और बीमारी की स्थिति में इलाज को inclusive बनाने पर फोकस कर रहे हैं। इसलिए स्वच्छ भारत अभियान हो, फिट इंडिया मिशन हो, पोषण मिशन हो, मिशन इंद्रधनुष हो, आयुष्मान भारत हो, जल जीवन मिशन हो, ऐसे सभी initiatives को हमें ज्यादा से ज्यादा लोगों तक लेकर जाना है।

साथियों,

जब हम हेल्थ सेक्टर में holistic और inclusiveness की बात करते हैं तो, इसमें तीन फैक्टर्स का समावेश कर रहे हैं। पहला- modern medical science से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और ह्यूमेन रिसोर्स का विस्तार। दूसरा- आयुष जैसी पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति में research को प्रोत्साहन और हेल्थकेयर सिस्टम में उसका active engagement और तीसरा- Modern और Futuristic technology के माध्यम से देश के हर व्यक्ति, हर हिस्से तक बेहतर और affordable healthcare सुविधाएं पहुंचाना। इसके लिए हमने हेल्थ सेक्टर के बजट में काफी वृद्धि की है।

 

साथियों,

हम भारत में ऐसा हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना चाहते हैं, जो सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित ना हो और आपने देखा होगा कि इस विषय लेकर मैं लगातार दुनिया के सामने बात कर रहा हूं, खास करके कोरोना के बाद और मैं कह रहा हूं वन अर्थ वन हेल्थ, इसी स्पिरिट को हमें हिंदुस्तान में भी वन इंडिया वन हेल्थ, इस मिशन को भी वैसे ही यानी दूरदराज के क्षेत्रों में भी समान व्यवस्थाएं विकसित करनी हैं, हमारा प्रयास है कि क्रिटिकल हेल्थकेयर सुविधाएं ब्लॉक स्तर पर भी हों, जिला स्तर पर भी हों, गांवों के नज़दीक भी हों। इस इंफ्रास्ट्रक्चर को मैंटेन करना और समय-समय पर अपग्रेड करना बहुत जरूरी है। इसके लिए प्राइवेट सेक्टर और दूसरे सेक्टर्स को भी ज्यादा ऊर्जा के साथ आगे आना होगा।

साथियों,

बेहतर पॉलिसी के साथ ही उनका इंप्लीमेंटेशन भी बहुत आवश्यक होता है। इसके लिए ज़रूरी है कि ग्राउंड पर जो लोग पॉलिसी को उतारते हैं, उन पर ज्यादा ध्यान दिया जाए। इसके लिए इस बजट में हमने 2 लाख आंगनवाड़ियों को सक्षम आंगनवाड़ियों में अपग्रेड करके उन्हें और सशक्त बनाने का प्रावधान किया है। यही बात पोषण 2.0 पर भी लागू होती है।

साथियों,

प्राइमरी हेल्थकेयर नेटवर्क को सशक्त करने के लिए डेढ़ लाख हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स के निर्माण का काम भी तेज़ी से चल रहा है। अभी तक 85 हज़ार से अधिक सेंटर्स रुटीन चेकअप, वैक्सीनेशन और टेस्ट्स की सुविधा दे रहे हैं। इस बार के बजट में इनमें मेन्टल हेल्थकेयर की सुविधा भी जोड़ी गई है। इसे ज्यादा से ज्यादा आबादी तक हम कैसे पहुंचा सकते हैं, जागरूकता कैसे बढ़ाई जाए, इसके लिए हम सबको मिलकर के, आपको भी अपने प्रयासों को बढ़ाना चाहिए।

साथियों,

बेहतर हेल्थ इंफ्रा सिर्फ सुविधा ही नहीं, बल्कि ये हेल्थ सर्विस की डिमांड भी बढ़ाता है। जो रोज़गार बढ़ाने का भी बहुत बड़ा माध्यम है। बीते सालों में जैसे-जैसे हेल्थ सर्विस की डिमांड बढ़ रही है, उसके अनुसार ही हम स्किल्ड हेल्थ प्रोफेशनल्स तैयार करने का भी प्रयास कर रहे हैं। इसीलिए बजट में हेल्थ एजुकेशन और हेल्थकेयर से जुड़े ह्युमेन रिसोर्स डेवलपमेंट के लिए पिछले साल की तुलना में बजट में बड़ी वृद्धि की गई है। मेडिकल एजुकेशन से जुड़े रिफॉर्म्स और मेडिकल कॉलेजों के निर्माण में इससे जुड़ी हमारी प्रतिबद्धता से आप सभी भलीभांति परिचित हैं। इन रिफॉर्म्स को टेक्नॉलॉजी का उपयोग करके आगे कैसे बढ़ाया जाए, क्वालिटी ऑफ मेडिकल एजुकेशन को और इंप्रूव कैसे किया जाए, अधिक inclusive और affordable कैसे बनाया जाए, इसके लिए कुछ कंक्रीट स्टेप्स, एक तय समय सीमा में आपकी तरफ से लिए जाने चाहिए।

साथियों,

हेल्थकेयर से जुड़े हमारे objectives बायोटेक्नोलॉजी से जुड़ी रिसर्च, medicines और medical equipments में आत्मनिर्भरता के बिना हासिल नहीं हो सकते। कोरोना काल में हमने ये अनुभव भी किया है। जेनरिक, बल्क ड्रग्स, वैक्सीन्स और bio-similars के क्षेत्र में विकास की संभावनाओं को हमें टैप करना है। इसलिए हमने मेडिकल इक्विपमेंट्स और दवाओं के कच्चे माल के लिए PLI स्कीम्स शुरु की हैं।

साथियों,

कोरोना वैक्सीनेशन में Cowin जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से हमारी डिजिटल टेक्नॉलॉजी का लोहा पूरी दुनिया ने माना है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, कंज्यूमर और हेल्थकेयर प्रोवाइडर के बीच एक आसान इंटरफेस उपलब्ध कराता है। इससे देश में उपचार पाना और देना दोनों बहुत आसान हो जाएंगे। इतना ही नहीं, ये भारत के क्वालिटी और अफॉर्डेबल हेल्थकेयर सिस्टम की ग्लोबल एक्सेस भी आसान बनाएगा। इससे मेडिकल टूरिज्म बढ़ेगा और देशवासियों के लिए income opportunities बढ़ेंगी। इस वर्ष के बजट में इस मिशन को सशक्त करने के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के नाम से एक ओपन प्लेटफार्म की बात की गई है। इस प्रकार के नए कदमों से स्कोप और इंपैक्ट पर हमें गंभीरता से चर्चा करना होगा।

साथियों,

कोरोना काल में रिमोट हेल्थकेयर, टेलीमेडिसिन, टेलीकंसल्टेशन लगभग ढाई करोड़ मरीज़ों के लिए समाधान बनकर आया। शहरी और ग्रामीण भारत में health access divide को कम करने में ये टेक्नॉलॉजी बहुत काम आ सकती है। अब तो हम देश के हर गांव में फाइबर नेटवर्क पहुंचा रहे हैं, 5G टेक्नॉलॉजी के भी अब आने में देर नहीं होने वाली है। 5G टेक्नॉलॉजी के उपयोग से रिमोट हेल्थकेयर को ज़मीन पर उतारने के लिए हमारे प्राइवेट सेक्टर को अपनी भागीदारी बढ़ानी चाहिए। हमारे गांवों में इतनी डिस्पेंसरीज़ हैं, आयुष के सेंटर हैं, उनको हम शहरों के बड़े प्राइवेट और पब्लिक अस्पतालों के साथ कैसे जोड़ सकते हैं, रिमोट हेल्थकेयर और टेली कंसल्टेशन को कैसे बढ़ावा दे सकते हैं, इस पर भी आपके सुझावों का हमें इंतज़ार रहेगा। ड्रोन टेक्नॉलॉजी का हेल्थकेयर में अधिक से अधिक उपयोग बढ़ाने के लिए हेल्थ सेक्टर से जुड़े हमारी प्राइवेट कंपनियों को भी आगे आना होगा।

साथियों,

आयुष की भूमिका तो आज पूरी दुनिया भी मान रही है। हमारे लिए गर्व की बात है कि WHO भारत में अपना विश्व में अकेला Global Centre of Traditional Medicine शुरू करने जा रहा है। अब ये हम सभी पर निर्भर करता है कि अपने लिए भी और दुनिया के लिए भी हम आयुष के बेहतर समाधान कैसे तैयार करें। कोरोना का ये कालखंड हेल्थकेयर और फार्मा के मामले में भारत के सामर्थ्य से दुनिया को परिचित कराने का भी है। इसलिए इस वेबिनार से टाइम लाइन के साथ जरूरी एक्शन प्लान निकलेगा तो मैं समझता हूं ये बहुत बड़ी सेवा होगी। और भी मैं एक बात बताना चाहूंगा, खास करके प्राइवेट सेक्टर के साथियों से, आज हमारे बच्चे पढ़ने के लिए खास करके मेडिकल एजुकेशन के लिए दुनिया के छोटे-छोटे देशों में जा रहे हैं। वहां लैंग्वेज का भी प्रॉब्लम है फिर भी जा रहे हैं। देश का अरबों-खरबों रुपया बाहर जा रहा है। क्या हमारे प्राइवेट सेक्टर बहुत बड़ी मात्रा में इस फील्ड में नहीं आ सकते? क्या हमारी राज्य सरकारें इस प्रकार के काम के लिए जमीनों को देने में उम्दा नीतियां नहीं बना सकती हैं? ताकि अधिकतम डॉक्टर्स हमारे यहां तैयार हों, पैरामेडिक्स तैयार हों। इतना ही नहीं, हम दुनिया की मांग को पूरा कर सकते हैं। हमारे डॉक्टरों ने पिछले चार पांच दशक से पूरी दुनिया में भारत की इज्जत को बहुत बढ़ाया है। भारत का डॉक्टर जहां भी गया है, उसने उस देश के दिल को जीता है। भारत के डॉक्टर्स के टैलेंट को विश्व का सामान्य से सामान्य नागरिक बहुत अच्छा मानता है। इसका मतलब हमारी ब्रांडिंग हो चुकी है। अब हमें योग्य लोगों को तैयार करने में तेजी लानी है। उसी प्रकार से दुनिया की सबसे बड़ी हमारी हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम, मैं इसको हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम नहीं कहता हूं और वो आयुष्मान भारत, एश्योर्ड इनकम है। भारत सरकार ने इंश्योरेंस लिया हुआ है, आपके अस्पताल अगर बड़े बन गए और गरीब व्यक्ति वहां आयेगा, तो उसकी पेमेंट भारत सरकार की व्यवस्था से होने वाली है। आपके लिए पैसों के कारण मरीज नहीं आएंगे, वो स्थिति अब नहीं रही है। क्या मेरे प्राइवेट सेक्टर के लोग टियर टू टियर 3 सिटीज में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए आगे आए। आयुष्मान भारत की स्कीम के जो मरीज है, उनके लिए स्पेशल फैसिलिटी डेवलप करें, आपको इनकम की कोई प्रॉब्लम नहीं होगी। आपके इंवेस्टमेंट का रिटर्न मिलेगा यानी इतनी योजनाएं हैं, और इन कामों में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यह हमारे देश के लिए हेल्थ सेक्टर को बहुत मजबूत बना सकती हैं और आपने देखा होगा कि हमारे आयुर्वेद ने बहुत बड़ी प्रतिष्ठा प्राप्त की है। खासकर की कोरोना के कालखंड में हमारे जो हर्बल प्रोडक्ट हैं, आज दुनिया में उनका बहुत बड़ा एक्सपोर्ट बढ़ा है, मतलब कि इसके प्रति आकर्षण बढ़ा है। हम सब मिलकर के इन योजनाओं को भी कैसे ले जाएं। मैं चाहूंगा खुले मन से लीडरशिप रोल लेने के लिए भारत को तैयार करने के लिए आप आइए, सिर्फ बजट के आंकड़ों से बात बनने वाली नहीं हैं। और हम बजट 1 महीना प्रीपोन करते हैं, क्यों करते हैं? क्योंकि हमें फरवरी और मार्च महीने में बजट के सारे प्रावधानों के लिए योजनाएं तैयार करने में सुविधा हो और 1 अप्रैल से ही हमारा नया बजट एक्चुअली जमीन पर फंक्शन करने लगे, ताकि हम कम समय में अधिक से अधिक आउटकम की ओर आगे बढ़ सकें। मैं आप सबसे बहुत आग्रह से अनुरोध करता हूं कि आज की इस चर्चा को जीवंत बनाइए और मैं सरकार की तरफ से ज्यादा भाषणबाजी करने के पक्ष में नहीं हूं। मुझे तो आपसे सुनना है- कंक्रीट, क्योंकि इंप्लीमेंटेशन करने में कभी एकाध चीज छूट जाती है तो छह-छह महीने तक फाइलें घूमती रहती हैं, इस चर्चा से वैसी गलतियां कम से कम होंगी। बहुत सरलता से चीजें इंप्लीमेंट करने का, बहुत सी बातें हमारे अफसरों को भी हमारे सिस्टम को भी बहुत आपसे अच्छा गाइडेंस मिले, ताकि हम चीजें लागू कर सकें। तो मैं चाहता हूं कि आज जब दुनिया के इस संकट ने Health Consequences को बहुत बड़ा बना दिया है, तब हमें ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं !

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