हैलो फरमाईस के माध्यम से कोरोना काल में लोगों का दिल बहलाने वाले गायक – भरत गायकवाड !


भारत गायकवाड जी के पिताजी शरणप्पा गायकवाड एक गरीब परिवार से थे । महाराष्ट्र के सोलापूर जिले के बदौला गांव से दो वक्त की रोटी के लिए घर छोड़कर मध्य प्रदेश आये थे । मप्र इटारसी से ही उन्होने इस दुनिया को अलविदा कह दिया । भरत के पिताजी शरणप्पा पुंडलिक गायकवाड जी को रेडियो सुनने का बहुत शौक था ।बस फिर क्या था भरत भी उन गीतों को गुनगुनाने लगे । गाने के कारण स्कूल मे मन नही लगता । मास्टरों के हाथो पिटाई भी होती थी । वह कभी कभार लकड़ी भी फेक कर मारते थे । मोहल्ले के लड़के भी भरत गाता देख छोटे कंकर – पत्थर फेंक कर भाग जाते थे । तब भरत किसी एकांत जगह मे गीतों की रहसल करते थे ।
फेसबुक पर हैलो फरमाईस धूम मचा रही है विदेश बस्मा इजिप्त से जनाब मुखलिश मलक
मप्र भोपाल से भारती रघुवंशी महाराष्ट्र जालना से रामेश्वर सोनोने उतर प्रदेश से मानस यादव मप्र खंडवा से अनिल कुमार मोहे हर शहरो से आती है गीतों की फरमाईस
जिसे पेश करते है इटारसी के एक मध्यम परिवार के गायक भरत गायकवाड
कैसे लोगो की फरमाईस पूरी करने की प्रेरणा आई
▪️हैलो फरमाईस : कोरोना काल मे सब परेशान थे । तभी मन मे विचार आया हैलो फरमाईस का । भरत गायकवाड जी ने 10000 दस हजार गीत हैलो फरमाईस के माध्यम से सोशल मिडीया पर गाने का संकल्प लिया । इस तरह से हैलो फरमाईस का कारवा शुरू हो गया । अब तक भारत गायकवाड जी ने 3000 तीन हजार गीते गाये है । फेसबुक पर हैलो फरमाईस धुम मचा रहा है । देशभर से लोगों की गाणे की फरमाईस आती है और भारत जी उसे गाकर पूरा करते है । इस माध्यम से लोग अपनी , अपने मित्रों की और रिश्तेदारों की फरमाईस पूरी कर रहे है । और आनंद विभोर हो रहे है ।
फरमाईस तो अब सिर्फ भारत से ही नहीं बल्के विदेशो से भी फरमाईस आने लगी है । जनाब मुखलीस मलक – बस्मा इजिप्त से करमाईस कर चुके है । मध्य प्रदेश भोपाल से भारती रघुवंशी , महाराष्ट्र के जालना से रामेश्वर सोनोने , उत्तरप्रदेश मानस यादव , होशंगाबाद से ठाकुर दिग्विजय सिंग , मध्य प्रदेश खंडवा से अनिल कुमार भी अपनी फरमाईस पूरी कर चुके है ।
अब तो ये आलम है के फरमाईस की लम्बी लाईन ही लगी हुई है । मध्य प्रदेश के इटारसी शहर के भरत गायकवाड सभी की फरमाईस पूरी करने मे जिजान से लगे है । अपना संकल्प पूरा करने के लिये और लोगों को खुश तथा आनंदी करने हेतू वह
रोज 5 से 10 गीत गाते है ।
लोकडाऊन के समय भी भरत गायकवाड जी ने कोरोना से बचने के गीत सुनाकर जाग्रती का अभियान चलाया । अपने गानों के माध्यम से उन्होने लोगों को मनोरंजित कर अपने जवाबदेही का भी अहसास करवाया है । उनके इस कार्य को लोगों ने बहोत ही सराया है ।
महाराष्ट्र के अहमदपुर तहसिल स्थित शाहिद डॉ नरेंद्र दामोलकर विचार मंच से कोरोना योद्धा का सम्मान भी उन्हे मिला है । अभी हाल ही मे भरत गायकवाड जी को अटल भारत क्रिड़ारत्न पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है ।
ये सब मेहनत भरत गायकवाड अपनी माँ के लिए कर रहे है ।भरत गायकवाड की माँ ने भरत की परवरिश करने के लिए रोडो पर मजदूरी करके भरत को पाला है । भरत का कहना है – यह जो संघर्ष चल रहा है ये सब माँ के लिए ही कर रहा हूँ । भरत की इच्छा है भरत की माँ एक आलीशान मकान मे रहे । और माँ की जिंदगी ख़ुशी से गुजरे । भरत गायकवाड का कहना है – अगर मै प्ले बैक सिंगर बनूंगा तो गरीब , बेबस , बेघर लोगो की मदद करुंगा । मै कभी किसी को झूठी तसल्ली नहीं दुंगा । भरत कहते है मुझे बहुत से लोगो ने सिर्फ अस्वासन ही दिये है । लेकीन मै ऐसा नही करूंगा । भरत गायकवाड ने आपने जीवन मे जो तकलीफ भोगी है वो और किसी के हिस्से में ना आये ऐसा वह हमेशा कहते है । अपने गीतों के यादगार सफर के बारे मे वह कहते है – मै तो अकेला ही चला था राहें मंजिल मगर ….लोग जुड़ते गये और काफील बड़ता गया ।

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