आज दशहरे पर किस रावण को चलाओगे

संपादकीय। आज दशहरा मनाओगे, किस रावण को जलाओगे

जिसने अपनी कठिन तपस्या से भगवान से अमरत्व का वरदान पाया। जिसने 10 बार अपना शीश काटकर शिव को चढ़ाया, जिसने अपनी आंतों की माला बनाकर भगवान को सजाया जिसके जप के तप से पूरे ब्राह्मण को हिलाया।

वह यदि अपनी भक्ति की शक्ति पर इठलाया तो कौन सा अहंकार दिखाया, कैसा देश है यहां जहां राम का धरती पर “अवतरण” कराने वाले रावण को जलाया जाता है, अपनी उपासना से साक्षात शिव का दर्शन करने वाले दशानन का तिरस्कार किया जाता है, और भगवा धारण कर पाखंड रचाने वालों के आगे शीश झुकाया जाता है।

चंद घंटे माला फेरने वालों को शंकराचार्य बनाया जाता है उस रावण के गर्व को अहंकार कहा जाता है, जो नव ग्रहों को बंदी बनाने का साहस रखता था जो सोने की लंका बनाकर राज करता था जिसके देश में प्रजा हरसुख पाती थी घरों में ताला लगाए बिना जीवन बिताती थी जहां अनाचार दुराचार की घटनाएं सपने में भी नहीं हो पाती थी उस रावण को वह नेता जलाते हैं जिनके ईमान की कसमें उनके घरवाले तक नहीं खाते हैं हम उस रावण के दहन का जश्न मनाते हैं, जो अपनी बहन के अपमान का बदला लेने के लिए भगवान से लड जाता है, जो अपनी बहन के सम्मान के लिए सीता का अपहरण कर लाता है, लेकिन अपहरण के बाद भी इतनी मर्यादा निभाता है कि उन्हें छूने तक की सीमा नहीं लांगता है।

वह आज रावण जलाएंगे जो बहन की शादी के बाद भाई के कर्तव्य और रिश्ते तक को भूल जाते हैं, ऐसे लोग वह भाई कहां से लाएंगे जो भ्राता और स्नेह रावण के भाइयों ने दिखाया।

एक के बाद एक भाई की आज्ञा पर अपना जीवन बलि चढ़ाया, किसी ने भी यह सवाल पूछने का साहस नहीं दिखाया कि रावण ने राम जैसे पराक्रमी से युद्ध का साहस क्यों दिखाया सब जानते थे कि वह विष्णु के अवतारी से लड़ने जा रहे हैं इसलिए उनके जेहन में मोक्ष का ऐसा भाव जागा की किसी ने भी कदम पीछे नहीं हटाया। लेकिन इस देश ने उस रावण की महानता को नहीं पहचाना उसके पराक्रम को नहीं जाना जिसके आगे शीश झुका कर भगवान राम तक ने ज्ञान पाया। ऐसा ज्ञानी अब कहां मिलेगा, ऐसा दानी अब कहां दिखेगा, ऐसा तपस्वी अब कहां मिलेगा, ऐसे भाई पाकर किसका भाग्य जागेगा, ऐसी मर्यादा का भाव किस में दिखेगा और यदि रावण हर साल जलता रहेगा तो कौन भाई अपनी बहन के अपमान का बदला लेने के लिए खड़ा हो सकेगा।

आज दशहरा बनाओगे……

किस रावण को जलाओगे……..

जिसने अपनी कठिन तपस्या से भगवान से अमृतत्व पाया, जिसने 10 बार अपना शीश काट कर शिव को चड़ाया।

जिसने अपने आंतो की माला बना कर भगवान को चड़ॉया, जिसके तप से पूरे ब्रह्मांड को हिलाया।

वो यदि अपनी भक्ति की शक्ति पर इठलाया तो कौन सा अहंकार दिखाया। कैसा देश है यह जहां राम का धरती पर अवतरण कराने वाले रावण को जलाया जाता है।

जो नवग्रह को बंदी बनाने का साहस रखता था जो सोने की लंका बनाकर राज करता था जिसके देश में प्रजा हर सुख पाती थी घरों में ताला लगे बिना जीवन बिताती सी जहां दुराचार की घटनाएं सपने में भी नहीं हो पाती थी उस रावण को वह नेता जलाते हैं जिनके ईमान की कसमें उनके घरवाले तक नहीं खाते हैं हम रावण के दहन का जश्न मनाते हैं जो अपनी बहन के अपमान का बदला लेने के लिए भगवान से लड़ जाता है जो अपनी बहन के अपमान के लिए सीता का अपहरण कर लाता है लेकिन अपहरण के बाद भी इतनी मर्यादा निभाता है कि छूने तक की सीमा नहीं लांघता। वह आज रावण जलाएंगे जो बहन की शादी के बाद भी कर्तव्य और रिश्ते तक को भूल जाते हैं ऐसे लोग वह भाई कहां से लाएंगे.

जो भातृत्त्व रावण के भाइयों ने दिखाया, एक के बाद एक भाई की आज्ञा पर अपना जीवन बलि चढ़ाया किसी ने भी यह सवाल पूछने का साहस नहीं दिखाया कि रावण ने राम जैसे पराक्रमी से युद्ध का साहस क्यों दिखाया सब जानते थे कि वह विष्णु के अवतारी से लड़ने जा रहे हैं इसलिए उनके जेहन में मोक्ष का ऐसा भाव जागा की किसी ने भी कदम पीछे नहीं हटाया लेकिन इस देश ने उस रावण की महानता को नहीं पहचाना उसके पराक्रम को नहीं जाना जिसके आगे शीश झुका कर भगवान राम तक ने ज्ञान पाया ऐसा ज्ञानी अब कहां मिलेगा ऐसा तपस्वी अब कहां मिलेगा ऐसे भाई पाकर किसका भाग्य जागेगा ऐसी मर्यादा का भाव किस में दिखेगा और यदि रावण हर साल जलता रहेगा तो कौन भाई अपनी बहन के अपमान का बदला लेने के लिए खड़ा हो सकेगा रावण ने भी अपनी मृत्यु को इसलिए स्वीकार किया कि उसने अपनी तपस्या से राम को पहचान लिया जीवन तो सभी बातें हैं मगर अवतारी पुरुष के मोक्ष के लिए भगवान भी धरा पर आते हैं रावण ने अहंकार नहीं दिखाया अपने मोक्ष के मार्ग के लिए भगवान को मानकर अपनाएं माता-पिता को वंदनीय बनाएं । खुद ही अपने भाई विभीषण को राम के पास अपनी मृत्यु का राज बताने के लिए भिजवाया ऐसे रावण को हम कैसे जलाएं जिसमें हो राम बनने का साहस, वह धनुष उठाएं वरना उस रावण के आगे शीश झुकाए और उनका मंदिर बनाएं। राम तो हम बन नहीं सकते कुछ रावण के गुण अपने जीवन में लाएं क्षणिक तत्वों का ही भाव मन में जगाए बहन को बहन कुछ तो रावण बनकर दिखाएं  ताकि ईश्वर के आगे मोक्ष की कामना मन में जगह पाए।

– अनिल मालवीय अध्यक्ष समाजसेवी अधिमान्य पत्रकार महासंघ

One comment

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s