कपड़ों पर टारगेट? बुर्का पहने जंतर मंतर पहुंचीं अलग-अलग मजहब की लड़कियां

जंतर मंतर पर दिल्ली यूनिवर्सिटी की पहल पर हुए इस प्रदर्शन ‘आजादी के लिए आजाद महिलाएं’ में जामिया, जेएनयू समेत कई इंस्टिट्यूट और विंग से जुड़े स्टूडेंट्स पहुंचे। जामिया नगर की जिकरा के इस अनुभव पर दिल्ली के कई स्टूडेंट्स का कहना है कि यह ‘इस्लामोफिबिक’ बर्ताव इन दिनों प्रदर्शनों में नजर आ रहा है।

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हाइलाइट्स:

  • बुर्का पहने जंतर मंतर पहुंचीं अलग-अलग मजहब की लड़कियां
  • स्टूडेंट्स ने लगाए नारे और किए सवाल, यह ‘इस्लामोफोबिक’ बर्ताव क्यों?
  • जामिया, जेएनयू समेत कई इंस्टिट्यूट और विंग से जुड़े स्टूडेंट्स ने पुलिस के खिलाफ किया प्रदर्शन
  • छात्रों ने पुलिस पर लगाया आरोप कि, बुर्का, हिजाब, दाढ़ी देखकर बना रहे टारगेट

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‘मैं सिटिजंस मार्च में एचआरडी के पास थी कि एक पुलिसवाले ने कहा, इन बुर्केवाली को मारो। और उसने मुझे मुक्का मार भी दिया। मैंने उसका जैकेट पकड़ा कि मुझे क्यों मारा? तो वो बोला, मुझे जवाब देने की जरूरत नहीं। उसके बाद दो पुलिसवालों ने धक्का मारा और मैं बेसुध होकर गिर गई। मुझे आरएमएल अस्पताल ले जाया गया। मेरा सवाल है कि मेरे पहनावे को देखकर आप मुझे कैसे टारगेट कर सकते हैं?’ जामिया नगर की जिकरा के इस अनुभव पर दिल्ली के कई स्टूडेंट्स का कहना है कि यह ‘इस्लामोफिबिक’ बर्ताव इन दिनों प्रदर्शनों में नजर आ रहा है।जंतर मंतर पर दिल्ली यूनिवर्सिटी की पहल पर हुए इस प्रदर्शन ‘आजादी के लिए आजाद महिलाएं’ में जामिया, जेएनयू समेत कई इंस्टिट्यूट और विंग से जुड़े स्टूडेंट्स पहुंचे। कुछ गैर मुस्लिम समुदाय की लड़कियों ने हिजाब पहनकर ने अपना विरोध जताया।

मंगलवार को शाम तक चले विरोध में प्रदर्शनकारियों ने कहा, सीएए-एनआरसी या कैंपस में हिंसा के खिलाफ प्रदर्शनों में हाल-फिलहाल में पुलिस, कुछ अराजक तत्व और कुछ मीडिया वाले तक आपकी आइडेंटिटी पर हमला कर रहे हैं। वे बुर्का, हिजाब, दाढ़ी देखकर अजीब से सवाल करते हैं। डीयू स्टूडेंट इकरा कहती हैं, जामिया में लड़कियों को पुलिसवालों ने पीटा। इसके बाद कई प्रदर्शन में पुलिस हिजाब या बुर्का देखकर टारगेट कर रही है। यह इनकी विचारधारा को दिखाता है। आप आप हमारे पहनावे पर हमें टारगेट करेंगे, तो हम इसे पहनना बंद नहीं करेंगे। इस प्रदर्शन के लिए इसलिए हमने अपील की थी कि अपना हिजाब पहनकर पहुंचे।

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प्रदर्शन में हिजाब पहने पहुंचीं डीयू इंग्लिश लिटरेचर की मास्टर्स स्टूडेंट इशिता मंडल कहती हैं, आप इंसान को जाने बिना किसी को पहनावे को देख्रकर उसे टारगेट कर रहे हैं, तो यह गलत है। मैं बकायदा हिजाब पहनकर इसलिए ही यहां आई हूं। जामिया मिल्लिया इस्लामिया की स्टूडेंट आयशा भी जंतर मंतर पहुंचीं। जामिया में पुलिस एक्शन के दौरान अपने साथी लड़के को बचाते हुए उनका एक विडियो वायरल हुआ था। आयशा ने कहा, यह हैरान करने वाला है कि एक पुलिस वाला कह रह है कि बुर्के वाली को मारो। यह उस विचारधारा को दिखाता है जो इस समय की सरकार की भी है।

स्टूडेंट्स ने सीएए-एनआरसी-एनपीआर के खिलाफ नारे लगाए। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, जामिया की घटना के बाद मुझसे एक मीडिया वाले ने पूछा कि आपके पास भारतीय होने के क्या सबूत हैं? जेएनयू स्टूडेंट्स का साथ देने गई तो एक जर्नलिस्ट ने हैरानी से पूछा, आप यहां क्यों आई हैं? मेरा बुर्के से आप क्या जज कर रहे हैं! यह इस्लामोफोबिक बर्ताव क्यों? डीयू से पहुंचीं कवलप्रीत कौर कहती हैं, कुछ समय पहले डीयू में भी हिजाब पहने कुछ स्टूडेंट्स पर कुछ लोगों ने कमेंट किए थे। और अब सीएए-एनआरसी प्रोटेस्ट के दौरान बुर्के या हिजाब वाली महिलाओं को पुलिस टारगेट कर रही है।

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