आंदोलन का वो साथी जिसे केजरीवाल ने दिल्ली में बनाया अपना सारथी

दिल्ली की राजनीति में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बाद सबसे बड़ा नाम उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का है. वह केजरीवाल के दोस्त भी हैं और उनकी सरकार में रथ के सारथी भी. दोनों का साथ करीब 20 साल पुराना है जब मनीष और केजरीवाल सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर काम करते थे.

आंदोलन का वो साथी जिसे केजरीवाल ने बनाया अपना सारथी

अरविंद केजरीवाल के साथ सिसोदिया (फाइल फोटो- Facebook)

  • 20 साल पुराना सिसोदिया-केजरीवाल का रिश्ता
  • पत्रकार से एक्टिविस्ट और फिर बने नेता
  • दिल्ली के स्कूलों को बदलने का श्रेय
  • तीसरी बार चुनावी मैदान में उतरे मनीष

दिल्ली के FM चैनल्स पर हाल के दिनों में ‘नमस्कार मैं दिल्ली का उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया बोल रहा हूं…’ जैसी आवाज खूब सुनाई दी. ऐसी ही आवाज 90 के दशक में AIR पर भी सुनाई देती थी लेकिन तब उसकी भूमिका अलग थी. उस दौर में दिल्ली के मौजूदा डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया बतौर रेडियो प्रजेंटर अपना शो जीरो ऑवर करते थे लेकिन आजकल उसी आवाज में सिसोदिया दिल्ली सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं को रेडियो के जरिए घर-घर तक पहुंचा रहे हैं. एक पेशेगत पत्रकार से शुरू हुआ सफर उन्हें राजधानी दिल्ली के दूसरे सबसे बड़े नेता के पद तक ले आया है.

‘सरकार’ के सारथी

दिल्ली की राजनीति में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बाद सबसे बड़ा नाम उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का है. वह केजरीवाल के दोस्त भी हैं और उनकी सरकार में रथ के सारथी भी. दोनों का साथ करीब 20 साल पुराना है जब मनीष और केजरीवाल ने सूचना के अधिकार (RTI) कानून का ड्राफ्ट तैयार करने में अरुणा राय के साथ काम किया था. इसके बाद दिल्ली के मोहल्लों में जागरुकता अभियान चलाना हो या फिर रामलीला मैदान का ऐतिहासिक अन्ना अनशन, हर घड़ी ये दोनों नेता साथ ही दिखे.

सिसोदिया और केजरीवाल (PTI)

दिल्ली सरकार में मनीष सिसोदिया के भूमिका का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वहां वित्त से लेकर शिक्षा और सतर्कता से लेकर महिला बाल विकास जैसे सभी अहम मंत्रालय डिप्टी सीएम के पास ही हैं. माना जाता है कि बगैर सिसोदिया के संज्ञान में आए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कोई भी नीतिगत फैसला नहीं लेते. यहां तक कि अफसर पहले मनीष सिसोदिया को ब्रीफिंग देते हैं, इसके बाद ही मुख्यमंत्री के पास किसी भी कामकाज का ब्यौरा जाता है. दिल्ली के जिस एजुकेशन सिस्टम की तारीफ हर तरफ हो रही है उसके पीछे की वजह मनीष सिसोदिया की सोच ही है.

पत्रकार से डिप्टी सीएम

उत्तर प्रदेश के कस्बे हापुड़ से ताल्लुक रखने वाले सिसोदिया का जन्म 5 जनवरी 1972 को हुआ. पिता शिक्षक थे लेकिन बेटा पत्रकार बनना चाहता था. इस ख्वाहिश को लेकर सिसोदिया ने दिल्ली के भारतीय विद्या भवन से साल 1993 में पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद पत्रकार के रूप में कार्यरत हुए. रेडियो से अपने करियर की शुरुआत करने वाले सिसोदिया ने टीवी चैनल में बतौर प्रोड्यूसर भी काम किया है. कहा जाता है कि उन्हें सरकार चलाने में भी सिसोदिया को इस पेशे में रहने का फायदा होता है और वह अपने सहयोगियों को टीवी के शेड्यूल के मुताबिक बताते हैं कि किस टाइम स्लॉट में प्रेस वार्ता या किसी कार्यक्रम को लॉन्च करना मुफीद होगा, ताकि टीवी पर उसे पर्याप्त कवरेज मिल सके.

जर्नलिज्म के साथ-साथ मनीष सिसोदिया का एक और जुनून था, वह था उनका एक्टिविज्म. यही वजह रही कि करीब 10 साल तक पत्रकारिता करने के बाद मनीष सिसोदिया ने परिवर्तन नाम से एक एनजीओ शुरू किया जिसका मकसद लोगों को RTI के बारे में जागरूक करना और पीडीएस सिस्टम, जनकल्याण, आयकर, बिजली बिल जैसे योजनाओं के बारे में जनता को सूचित करना था. इसी एनजीओ में काम करने के दौरान अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की दोस्ती मजबूत हुई. इसके बाद दोनों ने मिलकर कबीर नाम के एक और एनजीओ की स्थापना भी की.

कार्यकर्ता से नेता तक

साल 2012 में जब भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना आंदोलन की शुरुआत हुई तब यही दोनों नेता उसका मुख्य चेहरा बने. इसके बाद आम आदमी पार्टी का गठन हुआ और पार्टी ने चुनावी राजनीति में कदम रखने का मन बनाया. साल 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस की समर्थन से सरकार बनाई और अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बने. इसके बाद फिर से दिल्ली में चुनाव हुए और केजरीवाल की पार्टी ने इस बार दिल्ली में इतिहास रचते हुए 70 में से 67 सीटों पर जीत हासिल की.

डिप्टी सीएम की शपथ लेने के बाद सिसोदिया

दिल्ली सरकार में मनीष सिसोदिया को साल 2015 में उप मुख्यमंत्री बनाया गया. साथ ही उन्हें दिल्ली के सरकारी स्कूलों में सुधार का जिम्मा सौंपा गया. सिसोदिया अपनी सीट पटपड़गंज से लगातार दो बार चुनाव जीतते आए हैं. साल 2013 में उन्होंने बीजेपी के नकुल भारद्वाज को हराया था इसके बाद 2015 में विनोद कुमार बिन्नी को 24 हजार वोटों से शिकस्त दी थी. लगातार तीसरी बार सिसोदिया पटपड़गंज विधानसभा से ताल ठोक रहे हैं और उन्होंने इस सीट से अपना नामांकन गुरुवार को दाखिल भी कर दिया है. दिल्ली में 70 विधानसभा सीटों के लिए आठ फरवरी को वोट डाले जाएंगे जबकि 11 फरवरी को चुनावी नतीजे आने हैं.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: