कृषि समितियों के रिकॉर्ड की जिलास्तर पर हो रही छानबीन, जानिए क्या है मामला

नोटिस के बाद आई आडिट रिपोर्ट की याद….

Investigation of records of agricultural societies in Singrauli

सिंगरौली. नियमों के प्रति लापरवाही बरतने वाली जिले की दो दर्जन से अधिक कृषि साख समितियों के रिकार्ड की जिला स्तर पर छानबीन हो रही है। इन समितियों ने अपनी आर्थिक स्थिति के संबंध में आडिट रिपोर्ट समय पर जमा नहीं कराई। इस पर नियमों की अवहेलना के चलते उनको नोटिस जारी किया गया। इसकी पालना में जिले की २८ कृषि साख सहकारी समितियों ने आडिट रिपोर्ट तो जमा कराई मगर तब तक देरी हो गई। इसलिए अब इन समितियों की ओर से जमा कराई गई आडिट रिपोर्ट की छानबीन होगी। वैसे तय है कि आडिट रिपोर्ट जमा कराने में हुई देरी के चलते लापरवाही बरतने वाली सभी समितियों पर नियमानुसार जुर्माना तो लगेगा। इस मामले में भी सहकारिता विभाग की ओर से समितियों को दंडित करने के लिए जुर्माना लगाया जाएगा।

नियमानुसार सहकारिता विभाग में पंजीकृत समितियों को वित्त वर्ष के समापन के बाद अपने आय-व्यय के विवरण के साथ इसकी आडिट कराना व इसकी रिपोर्ट विभाग में जमा कराना आवश्यक है। मगर जिले में कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा किसानों को बीज व सही उर्वरक के संबंध में समय पर अवगत कराने जैसे कार्य करने के लिए पंजीबद्ध 28 कृषि साख समितियों ने इस नियम की अवहेलना की और अपनी आर्थिक स्थिति संबंधी आडिट रिपोर्ट समय पर विभाग में जमा नहीं कराई। इन समितियों का दूसरा घोषित उद्देश्य छोटे किसानों को नाबार्ड व उसके जैसी दूसरी बैंकिंग संस्थाओं से अल्प समय के लिए कृषि कार्य के लिए आर्थिक सुविधा मुहैया कराना भी है। इस प्रकार सीधे वित्तीय गतिविधि संचालन करने वाली इन कृषि साख समितियों की आर्थिक स्थिति का विभाग को अनुमान रहना जरूरी है। इसलिए ही सभी संस्थाओं पर आडिट कराने का नियम अनिवार्य तौर पर लागू है।

28 ने नहीं सौंपी ऑडिट रिपोर्ट
जिले की 28 कृषि साख सहकारी समितियों ने बीते वित्तीय वर्ष की आडिट रिपोर्ट ३० जून तक अपना पंजीयन करने वाले सहकारिता विभाग के जिला कार्यालय को नहीं सौंपी। इसलिए ये सभी समितियां संदेह के घेरे में आ गई। इसके चलते ही विभाग की ओर से सभी समिति प्रबंधकों को डेढ़ माह पहले नवंबर में नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया। इसमें समितियों को दिसंबर माह के दूसरे सप्ताह तक आडिट रिपोर्ट जमा कराने के लिए पाबंद किया गया। ये समितियां बरका, महुआ गांव, रामगढ़, दुधमनिया, चितरंगी, परसौना, कर्सुआ राजा, मैढाली व अन्य ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत हैं।

देरी के चलते तय है जुर्माना
नोटिस जारी होने के बाद इन सभी समितियों की ओर से अपनी आडिट रिपोर्ट दिसम्बर में कार्यालय में जमा कराई गई। मगर तब तक नियमानुसार तय तिथि से छह माह अधिक हो गए। बताया गया कि रिकार्ड के अनुसार सभी समितियों ने नोटिस मिलने के बाद ही अपने वित्तीय कामकाज व आर्थिक स्थिति की आडिट कराई। इसलिए अब विभाग के स्तर पर इनकी आडिट रिपोर्ट को जांचा जा रहा है। इस छानबीन में वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर संबंधित समिति का पंजीयन निरस्त करने जैसी कठोर कार्रवाई का प्रावधान है जबकि आडिट रिपोर्ट सामान्य पाए जाने पर उसे स्वीकार कर लिया जाएगा।

लापरवाही पर लगेगा जुर्माना
अधिकारी सूत्रों ने बताया कि नियम की अवहेलना व आडिट रिपोर्ट अंतिम तिथि 30 जून की जगह दिसंबर में छह माह बाद जमा कराने के कारण सभी 28 कृषि साख सहकारी समितियों पर दंडात्मक कार्रवाई निश्चित है। संकेत है कि आडिट रिपोर्ट सामान्य पाए जाने के बाद समिति संचालकों या प्रबंधक पर लापरवाही के आधार पर जुर्माना लगेगा। यह राशि डेढ़ हजार से लेकर 50 हजार रुपए तक हो सकती है। इस प्रकार देरी से आडिट रिपोर्ट देने वाली जिले की कृषि साख समितियां पंजीयन निरस्त होने से भले बच जाएं पर जुर्माने से बचने की स्थिति में नहीं हैं।

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