मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम मामले में ब्रजेश ठाकुर दोषी क़रार

  •  20 जनवरी 2020

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ब्रजेश ठाकुर

दिल्ली की एक अदालत ने बिहार में मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले के एक शेल्टर होम में लड़कियों के यौन शोषण और शारीरिक हमले के मामले में एनजीओ के संचालक ब्रजेश ठाकुर सहित 19 अभियुक्तों को दोषी ठहराया है.

अदालत ने मुज़फ्फ़़रपुर ज़िले के एक शेल्टर होम मामले में एक अभियुक्त को बरी कर दिया है.

अदालत ने सज़ा की अवधि पर सुनवाई के लिए 28 जनवरी की तारीख़ तय की है.

मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह कांड उजागर होने के बाद 29 मई 2018 को बालिका गृह को ख़ाली करा लिया गया था और वहां रहने वाली सभी 44 बच्चियों को बेहतर देखभाल और सुरक्षा मुहैया कराने के लिए राज्य के दूसरे शेल्टर होम में शिफ़्ट कर दिया गया था.

इनमें से 14 बच्चियों को बालिका गृह मधुबनी में, 14 को बालिका गृह मोकामा में और बाक़ी 16 लड़कियों को बालिका गृह, पटना भेजा गया था.

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उत्तराखंड रेलवे स्टेशनों में उर्दू की जगह संस्कृत

देहरादून स्टेशन
Image captionप्रतीकात्मक तस्वीर

भारत के रेल मंत्रालय ने फ़ैसला किया है कि उत्तराखंड के सभी रेलवे स्टेशनों पर लगे बोर्डों पर जगहों के नाम उर्दू की जगह संस्कृत में लिखे जाएंगे.

एनएनआई के अनुसार, अभी तक राज्य के रेलवे स्टेशनों पर लगे बोर्डों हिंदी, अंग्रेज़ी और उर्दू में नाम लिखा होता था. मगर अब उर्दू की जगह संस्कृत में स्टेशन का नाम लिखा जाएगा.

संस्कृत उत्तराखंड राज्य की दूसरी भाषा है और नियमों के अनुसार बोर्डों पर राज्य की दूसरी आधिकारिक भाषा लिखनी होनी चाहिए.

इसके साथ ही भारतीय रेल के मुगलसराय मंडल का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर करने का भी फ़ैसला लिया गया है.

अब रेलवे का यह मंडल दीनदयाल उपाध्याय रेलवे मंडल के नाम से जाना जाएगा.

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गडकरी बोले- पैसे की कमी नहीं, सरकार की मानसिकता में है

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि ‘पैसे की कमी नहीं है, कमी सरकार में काम करने वाली मानसिकता में है.’

उन्होंने यह बात महाराष्‍ट्र में नागपुर स्थित विश्‍वेश्‍वरैया राष्‍ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान के एक समारोह में कही.

केन्‍द्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग तथा सूक्ष्‍म लघु और मध्‍यम उद्योग मंत्री बता रहे थे कि कैसे वह अपने विभागों में योजनाओं के लिए पैसा जारी करने से नहीं हिचकते.

नितिन गडकरी

इसी विषय में उन्होंने कहा, “बीते पांच सालों में 17 लाख करोड़ रुपये का काम आंवंटित कर चुका हूं और इस साल पांच लाख करोड़ रुपये तक पहुंचना चाहता हूं, इंफ्रास्ट्रक्चर में काम करने के लिए.”

“और मैं आपको सच बताना चाहता हूं कि पैसों की कोई कमी नहीं है. जो कुछ कमी है, वो सरकार में काम करने वाली मानसिकता और नकारात्मक रवैये में है. निर्णय करने में जो हिम्मत चाहिए, वो नहीं है.”

केंद्रीय मंत्री ने इस संबंध में नौकरशाही को भी निशाने पर लिया. उन्होंने कहा, “परसों मैं एक आईएएस फ़ोरम में था तो वो कह रहे थे कि हम ये शुरू करेंगे, वो शुरू करेंगे. तो मैंने उन्हें कहा कि आप क्यों शुरू करेंगे? आपमें शुरू करने की ताक़त होती तो आप आईएएस ऑफ़िसर बनकर नौकरी क्यों करते, आप जाकर कोई बड़ा उद्योग करते. जो कर सकते हैं, आप उसकी मदद करो, इस लफड़े में मत पड़ो.”

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