नगर निगम चुनाव 2020: इस बार 2.34 लाख मतदाता चुनेंगे सतना शहर की सरकार

– मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन हुआ, महिला मतदाताओं की संख्या बढ़कर 48.27 फीसदी तक पहुंची
– नया परिसीमन न होने से मतदाताओं से ओवरलोड हो गए चार वार्ड

नगर निगम चुनाव 2020: इस बार 2.34 लाख मतदाता चुनेंगे सतना शहर की सरकार

सतना/ शहर सरकार के पांच साल पूरे होने पर वर्तमान समिति को भंग कर दिया गया है। प्रशासन एवं पार्टी नेता नगरीय निकाय चुनाव 2020 की तैयारी में जुट गए हैं। जिला निर्वाचन कार्यालय ने नगर निगम की मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन भी कर दिया है। अंतिम सूची के अनुसार इस वर्ष 23432 मतदाता अपने मत का प्रयोग कर शहर सरकार का गठन करेंगे। सरकार के गठन में आधी आबादी का दबदबा रहने की उम्मीद है, क्योंकि महिला मतदाताओं की संख्या बढ़कर 48.27 फीसदी हो गई है। सूची का प्रकाशन होने के बाद वार्डों में चुनावी सरगर्मियां शुरू हो गई है। पार्षद पद के दावेदार मतदाता सूची खंगालने में जुट गए हैं।

वार्डों का आरक्षण 23 को होगा
सूची प्रकाशन के बाद भी वार्डों का आरक्षण न होने से लोग असमंजस में हैं। वार्डों का आरक्षण 23 जनवरी होना है। आरक्षण का कार्य पूरा होते ही स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

महापौर जनता नहीं चुन पाएगी
वर्ष 2014 में हुए नगरीय निकाय चुनाव में मतदाताओं ने पार्षद के साथ अपना महापौर भी चुना था। इस वर्ष होने जा रहे निगम चुनाव में शहर की जनता सिर्फ वार्ड पार्षद का चुनाव ही कर सकेगी। जनता द्वारा चुने गए पार्षद मिलकर महापौर चुनेंगे। महापौर का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से होने के कारण इस बार जनता सिर्फ एक बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेगी।

सबसे ज्यादा मतदाता वार्ड 14 में
नगरीय निकाय चुनाव 2020 की बात की जाए तो वार्ड 14 मतदाता संख्या के हिसाब से शहर का सबसे बड़ा वार्ड है। इस वार्ड में मतदाताओं की संख्या 8224 हो गई है। 8090 मतदाता संख्या के साथ वार्ड 34 शहर का दूसरा सबसे बड़ा वार्ड बन गया है। 8027 मतदाताओं के साथ वार्ड 41 शहर का तीसरा सबसे बड़ा वार्ड है।

सबसे कम मतदाता वार्ड 18 में
मतदाता संख्या के हिसाब से शहर का सबसे बड़ा एवं सबसे छोटा वार्ड दोनों नईबस्ती में है। नईबस्ती के वार्ड 18 में मात्र 3205 मतदाता है, जो शहर के 45 वार्डों में सबसे कम हैं। दूसरा सबसे छोटा वार्ड नईबस्ती का ही वार्ड 17 है। इसमें मात्र 3261 मतदाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन दोनों वार्डों की मतदाता संख्या को जोड़ दिया जाए तब भी वार्ड 14 की मतदाता संख्या से दो हजार कम है।

परसीमन था जरूरी
नगरीय निकाय चुनाव से पहले वार्डों का परिसीमन होना था लेकिन निगम प्रशासन ने वार्डों का नए सिरे से परिसीमन करने में रुचि नहीं ली। राजनीति के विशेषज्ञों का कहना है कि शहर में वार्डों की संख्या न बढ़ाने से पांच वार्डों में मतदाताओं की संख्या 7 हजार से अधिक हो गई है। इनमें तीन वार्ड में 8 हजार से अधिक मतदाता है। यदि निगम प्रशासन चाहता तो इन पांच वार्डों को तोड़कर मतदाता संख्या के अनुसार 5 वार्डों का गठन कर सकता था। इससे शहर में वार्डों की संख्या 50 हो जाती और वार्डों में मतदाताओं का भार भी नहीं बढ़ता। अब इसका खामियाजा उन वार्डों में चुनाव लडऩे वाले पार्षद प्रत्याशियों को भुगतना पड़ेगा, जिन वार्डों में मतदाताओं की संख्या सात हजार से अधिक है।

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