Shahdol: मध्यप्रदेश का अजूबा स्कूल, नौ बच्चों पर सरकार खर्च कर रही है डेढ़ लाख रुपए

sulekha kushwaha shahdol

Jan, 26 2020 08:23:37 (IST)

सरकारी स्कूल में सिर्फ नौ बच्चों को पढ़ाने के लिए पदस्थ है दो शिक्षिका, पत्रिका पड़ताल के दौरान तीन बच्चों को पढ़ाते मिली दो शिक्षिकाएं

शहडोल. संभागीय मुख्यालय के वार्ड नम्बर 22 के ददरा टोला प्राथमिक शाला में नौ बच्चों को पढ़ाने के लिए सरकार प्रतिमाह डेढ़ लाख रुपए खर्च कर रही है, क्योंकि यहां पदस्थ उन दो शिक्षिकाओं द्वारा नौ बच्चों को पढ़ाया जा रहा है, जो प्रतिमाह पचास से साठ हजार रुपए वेतन ले रहीं है। इसके अलावा बच्चों का मध्यान्ह भोजन, ड्रेस, किताबें सहित स्कूल के अन्य कई खर्चे भी शासकीय तौर पर हो रहे हैं। कहने को तो इस शाला में कक्षा पहली से लेकर पांचवी तक मात्र नौ बच्चे दर्ज हैं, पर रोजाना पूरे बच्चे स्कूल नहीं आते हैं। ऐसी दशा में शिक्षिकाएं बच्चों को किस स्तर की पढ़ाई कराती होगी। यह एक विचारणीय प्रश्न है। आश्चर्य तो तब हुआ जब मंगलवार को दोपहर में पत्रिका पड़ताल के दौरान महज तीन बच्चों को शाला में पदस्थ दो शिक्षिकाएं पढ़ा रही थी। शिक्षिकाओं ने बताया कि मेला की वजह से बच्चे अभी स्कूल नहीं आ रहे हैं।
स्कूल आने से कतराते हैं बच्चे
ददरा टोला के प्राथमिक शाला में पदस्थ प्रभारी प्रधानाध्यापिका लतीफुनिशा ने बताया कि स्कूल के पास चार साल पहले एक छात्रावास का संचालन शुरू किया गया है। जहां टोला के अधिकांश बच्चे जाते है। कुछ बच्चें नार्दन के स्कूल में चले जातें है और अधिकांश अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ाना पसंद करते है। इसलिए इस स्कूल में बच्चों की संख्या कम हो गई है।
ऐसी है स्कूल बच्चों की स्थिति
कक्षा संख्या
पहली दो
दूसरी दो
तीसरी दो
चौथी एक
पांचवीं दो
(संख्या प्रभारी प्रधानाध्यापिका के बताए अनुसार)

पांच साल में ऐसे घटी बच्चों की संख्या
वर्ष संख्या
2015 14
2016 13
2017 11
2018 11
2019 09
(संख्या प्रभारी प्रधानाध्यापिका के बताए अनुसार)

शासन की नीति का हो रहा दुरुपयोग
जानकारों की माने तो शासकीय नियमानुसार प्रत्येक शासकीय प्राथमिक पाठशाला में कम से कम दो शिक्षकों की पदस्थापना जरूरी है। भले ही शालाओं में विद्याॢथयों की संख्या कम हो। इस प्रकार ददरा टोला के प्राथमिक शाला में शासकीय नियम का पूरी कड़ाई के साथ पालन किया जा रहा है और दो सहायक शिक्षिकाओं के माध्यम से नौ बच्चों की पढ़ाई कराई जा रही है।
इनका कहना है
शासन की नीति है कि प्रत्येक प्राथमिक शाला में कम से कम दो शिक्षकों की पदस्थापना जरूरी है। वैसे ददरा टोला में कम बच्चे होने की जानकारी उच्चाधिकारियों को कई बार दी जा चुकी है और उच्चाधिकारियों के निर्देश पर ही अगली कार्रवाई की जाएगी।
उमेश श्रीवास्तव, संकुल प्राचार्य, ददरा टोला।

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