शाहपुर में 5 टन सब्जी का उत्पादन, मंडी की उठ रही मांग

ब्लॉक के सब्जी उत्पादक किसानों और मौसमी फल तरबूज के उत्पादकों को अब स्थानीय स्तर पर थोक विक्रय केंद्र की जरूरत..

ब्लॉक के सब्जी उत्पादक किसानों और मौसमी फल तरबूज के उत्पादकों को अब स्थानीय स्तर पर थोक विक्रय केंद्र की जरूरत है। ब्लॉक में सब्जी उत्पादक किसान करीब साढ़े 6 सौ हेक्टेयर में किसान सब्जी की फसल लगा रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर सब्जी और मौसमी फल तरबूज के लिए के थोक विक्रय मार्केट नहीं है। इससे सब्जी उत्पादक किसान को बैतूल, इटारसी, होशंगाबाद और भोपाल सब्जी मंडी में सब्जी विक्रय के लिए जाना पड़ता है, तो तरबूज उत्पादक अपनी बाड़ियों से ही तरबूज सस्ते दोमों पर बेच देते हैं। इससे उपज का वास्तविक लाभ नहीं मिल पाता। वर्तमान में ब्लॉक में करीब 4 से 5 हजार टन सब्जी की सालाना पैदावार है। इस पैदावार के लिए सब्जी िवक्रेताअाें काे परेशान हाेना पड़ता है। इससे मुनाफे की जगह नुकसान हाे रहा है।

लंबे समय से हाे रही सब्जी मंडी चालू करने की मांग

ब्लॉक के करीब डेढ़ दर्जन गांवों में किसान पारंपरिक तरीके से करीब 600 हेक्टेयर में सब्जी की खेती करते हैं। इसके अलावा उद्यानिकी विभाग ने आधुनिक तकनीक से साग-भाजी उत्पादन के लिए ब्लॉक में 23 नेट शेड भी बनवा कर प्रति नेट शेड 70 से 80 टन सब्जी का उत्पादन प्रतिवर्ष बढ़ाने की कार्ययोजना को लागू किया है। इन किसानों ने बैंक लोन से नेट शेड बनाए हैं। इन्हें स्थानीय स्तर पर थोक सब्जी विक्रय के लिए सब्जी मंडी की आवश्यकता है। वर्तमान में नेट शेड धारी किसान अपनी उपज बेचने इंदौर या भोपाल जाते हैं।

बाेले िकसान- 10% खर्च कर बेचने पड़ रही सब्जी

सब्जी उत्पादन से जुड़े राजकुमार, रामकिशोर सिरोरिया का कहना है कि किसानों ने नई तकनीक अपनाकर सब्जी की खेती शुरू की है। किसानों का सबकुछ इस खेती पर लग चुका है। स्थानीय स्तर पर मार्केट की उपलब्धता से किसान शोषण और बिचौलियों से मुक्त होकर आगे बढ़ सकते हैं। वर्तमान में किसानाें को बाहर जाकर उपज बेचने में 10 प्रतिशत अतिरिक्त व्यय आ रहा है। यहां सब्जी मंडी की सुविधा से मात्र 2 प्रतिशत में काम हो जाएगा। लंबे समय से इसकी मांग की जा रही है। यहां सब्जी मंडी खुलने से तवा पार के लोगों को भी लाभ मिलेगा। इस बार पुनर्वास के कई गांवों में किसानों ने तरबूज लगाया है। तवा, माचना में इस बार पानी अधिक होने से फिलहाल यहां तरबूज लगना शुरू नहीं हुआ है पर मार्च तक यहां भी तरबूज की बाड़ियां लग जाएंगी। उल्लेखनीय है कि 200 हेक्टेयर में मौसमी फल तरबूज लगता है।

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