शिकारपुर में जारी श्रीमद भागवत में हिरण्यकश्यप कथा सुनाई

श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ

छिन्दवाड़ा / यह भौतिक जगत कागज की भांति मिथ्या हो सकता है ,किन्तु इसका भी उचित लाभकारी उपयोग हे ।रुपये के नोटों को सरकार चलाती है अतएव उनका पूरा मूल्य हे । उसी भाँति यह भौतिक जगत भी मिथ्या तथा अस्थायी हो सकता है,किन्तु परमेश्वर से निकलने के कारण इसका पूरा मूल्य है ।वैष्णव लोग इस भौतिक जगत के मूल्य को पहचान कर उसे स्वीकार करते हे तथा उन्हें इसके उचित उपयोग की विधि ज्ञात है,जबकि मायावादी दार्शनिक भूल से रुपये के नोटों को मिथ्या कागज मान कर उसका त्याग कर देता है तथा धन का उपयोग नही कर सकता है।इस भौतिक जगत को मिथ्या मानकर इसका परित्याग कर देता है ।तो ऐसे त्याग का मूल्य अत्यल्प हे ।जो व्यक्ति भगवान की सेवा के निमित्त इस भौतिक जगत के यथार्त मूल्य को जानता है जिसे भौतिक जगत से मोह नही है तथा जो इंद्रियतृप्ति के लिए भौतिक जगत को स्वीकार न करके इसका परित्याग करता है,उहि साहसी वास्तविक त्यागी अथवा सन्यासी हे यह भौतिक जगत भगवान की भौतिक शक्ति का विस्तार हे ।अतएव यह सत्य है सर्प तथा रज्जु के दृष्टान्त के द्वारा कभी कभी जो निष्कर्ष निकाला जाता है कि जगत मिथ्या हे ।

उक्तकथनभागवत पंडित वीरेन्द्र शुक्ल ने शिकारपुर में जारी श्रीमद भागवत के तृतीय दिवस की कथा में कहा ।
शुक्ल ने प्रह्लाद चरित्र चरित्र को सुनाते हुए कहा कि प्रह्लाद जिसने राक्षस कुल में जन्म लेने के बाद भी भगवान का नाम लेना नही छोड़ा और इसका पिता हिरण्यकश्यप जो भगवान को अपना परम शत्रु मानता है ।जिसने पुत्र को समझाया न मानने पर मारने का प्रयास किया पर वो सफल न हुआ तब प्रह्लाद से पूछा तेरे भगवान यदि सब जगह में हे तो क्या इस खम्बे में भी हे प्रह्लाद ने कहा इस खम्बे में भी हे तब हिरण्यकश्यप ने खम्बे पे खड्ग का प्रहार किया तो नरसिंह भगवान प्रकट हुए और उन्होंने हिरण्यकश्यप को मार डाला और पहलाद को गोदी में बैठा लिया ।
इसके बाद समुद्र मंथन वामन अवतार की कथा सुनाई ।
भागवत श्रवण करने के लिया भारी संख्या में भक्त पहुच रहे हे ।सुन्दर सुन्दर झांकियो का भी दर्शन कर भक्त बड़े प्रफुल्लित हुए ।
कल कृष्ण जन्म की कथा होगी आयोजक समस्त ग्रामवासी शिकारपुर ने सभी भक्तों से अधिक से अधिक संख्या में आने की अपील की ।

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