सदर फ्लाइओवर की गलत डिजाइन ने बढ़ाया सिरदर्द, रिपोर्ट तैयार

सदर फ्लाइओवर की परेशानी हल होने का नाम नहीं ले रही। गलत डिजाइन के कारण हुई समस्या के हल के लिए वीएनआईटी के ट्रांसपोर्ट और इंजीनियरिंग विभाग से चर्चा कर हल निकालने का प्रयास किया जा रहा था। वीएनआईटी ने रिपोर्ट तैयार कर ली है, लेकिन किसे सबमिट करे, उसे ही समझ में नहीं आ रहा। सभी विभाग अपने क्षेत्र से बॉल दूसरे क्षेत्र में डाल रहे हैं। हालांकि वीएनआईटी की ओर से हल के लिए कुछ सुझाव भी दिए गए हैं। 

एक्सिडेंट स्पॉट के कारण डायवर्ट किया यातायात
मानकापुर और काटोल नाका चौक से एलआईसी चौक तक 3.8 किमी का उड़ानपुल के निर्माण कार्य का ठेका 18 जनवरी 2017 को ठेकेदार को दिया गया था। इसका टेंडर लगभग 218 करोड़ का है। उद्घाटन में भी कई समस्याएं चलती रहीं। इसके बाद यातायात पुलिस विभाग की ओर से भी पुल के अंत में एक्सिडेंट स्पॉट डिटेक्ट किया, जिसके बाद यातायात डायवर्ट किया गया।

यह है मामला
एनएचएआई की ओर से बनाए गए 218 करोड़ के फ्लाइओवर पर एक्सिडेंट स्पॉट की स्थिति सामने आई, तो आरबीआई चौक से एलआईसी चौक की ओर जाने वाले यातायात को लिबर्टी की ओर डाइवर्ट किया जा रहा है। दैनिक भास्कर में कुछ दिन पहले ही खबर प्रकाशित की गई थी, जिसमें एक्सिडेंट स्पॉट और और डाइवर्शन से नागरिकों के प्रभावित होने संबंधी तथ्य प्रकाशित किए गए थे। इसके बाद वीएनआईटी को विश्लेषण कर रिपोर्ट में सुझाव मांगे गए। सूत्रों के अनुसार, वीएनआईटी के यातायात विभाग ने रिपोर्ट तैयार कर ली है, लेकिन सबमिट किसे करनी है, यह उसे समझ में नहीं आ रहा है। एनएचएआई की ओर से महामेट्रो को रिपोर्ट देने की बात कही जा रही है, तो महामेट्रो प्रशासन इस संबंध में कोई भी हस्तक्षेप हाेने से साफ इनकार कर रहा है। 

पुलिस यातायात विभाग ने मांगे थे सुझाव 
यातायात पुलिस विभाग ने इसके हल के लिए वीएनआईटी के यातायात और इंजीनियरिंग विभाग से सुझाव देने की बात कही थी। इसकी रिपोर्ट तैयार होने के बाद यह रिपोर्ट एनएचएआई को दी जानी थी, क्योंकि इसमें यातायात विभाग केवल यातायात सुगम करने के लिए सहायता कर सकता है। कोई नया निर्माण करना या योजना को क्रियान्वित करने का कार्य यातायात विभाग का नहीं है।

महामेट्रो को देंगे रिपोर्ट
इस पुल के निर्माण के समय भी महामेट्रो से चर्चा की जा रही थी। पुल बनने के बाद भी उनसे चर्चा की गई, जिसमें उनकी ओर से कुछ सुझाव रखे थे। अब वीएनआईटी की रिपोर्ट महामेट्रो को ही दी जाएगी। हमारे पास रिपोर्ट आएगी तो भी हम उनसे ही चर्चा करेंगे।- अभिजीत जिचकार, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई

प्रोजेक्ट हमारा नहीं
प्रोजेक्ट हमारा नहीं है एनएचएआई का है। इसलिए इसकी रिपोर्ट हमें नहीं मिलेगी। एनएचएआई की ओर से हमसे जो सहयोग मांगा है, हमने वह किया है। आगे भी अगर सहयोग मांगते हैं तो हम करेंगे।  -अखिलेश हलवे, डीजीएम (कॉर्पोरेट), महामेट्रो

हमने सॉल्यूशन दिए हैं
हमने कुछ सॉल्यूशन दिए हैं जिसमें लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन यह है कि कुछ मार्गों को वन वे करना होगा। इससे पुल की डिजाइन में ज्यादा छेड़छाड़ नहीं हाेगी। दूसरा पुल के डिवाइडर को आगे तक लेकर जाएं। हमारे शहर में अर्बन मेट्रोपॉलिटन ट्रांसिट अथॉरिटी नहीं है। यह दिल्ली और अन्य शहरों में होती है। इसमें कोई बड़े निर्माण या प्रोजेक्ट से पहले उस विषय से संबंधित सभी विशेषज्ञों स्टेक होल्डर और शैक्षणिक संस्थानों के साथ प्रोजेक्ट की चर्चा की जाती है। साथ ही 15 दिन में सभी को नॉर्म्स के आधार पर रिपोर्ट देनी होती है। उसके बाद कार्य किया जाता है। यदि यह हमारे शहर में होता है, तो इस तरह की समस्याओं की काेई गुंजाइश नहीं होगी। -विश्रुत लांडगे, ट्रांसपोर्ट विभागाध्यक्ष, वीएनआईटी

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