दिल्ली चुनाव / मुफ्त बिजली-पानी देने को राज्यों के पास पैसों की कमी नहीं : संजय बारू

नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा चुनाव के रुझाव नतीजों में परिवर्तित हो रहे है, जिसमें आम आदमी पार्टी (आप) को बहुमत मिलती दिख रही है। दिल्ली की तरह बाकी राज्य भी मुफ्त पानी और बिजली देने के मॉडल पर उतर सकते हैं। मनी भास्कर ने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के प्रधान सचिव रहे संजय बारू से फ्री बिजली और पानी के मुद्दे पर बाचतीच की। संजय बारू के मुताबिक दिल्ली के अलावा बाकी राज्य भी फ्री बिजली और पानी देने की योजना शुरू करते हैं, तो यह एक सराहनीय कदम होगा। उन्होंने कहा कि राज्यों के पास फ्री-बिजली और पानी देने के लिए पैसों की कमी नहीं है। बशर्ते राज्य सरकारों के पास इसके लिए इच्छाशक्ति होनी चाहिए और बेहतर तरीके से प्लानिंग करनी होगी। बारू के मुताबिक राज्यों को जीएसटी और अन्य स्रोतो से राज्यस्व मिलता है। ऐसे में राज्यों की तरफ से फ्री बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए पैसों की कमी बहाना है


नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा चुनाव के रुझाव नतीजों में परिवर्तित हो रहे है, जिसमें आम आदमी पार्टी (आप) को बहुमत मिलती दिख रही है। दिल्ली की तरह बाकी राज्य भी मुफ्त पानी और बिजली देने के मॉडल पर उतर सकते हैं। मनी भास्कर ने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के प्रधान सचिव रहे संजय बारू से फ्री बिजली और पानी के मुद्दे पर बाचतीच की। संजय बारू के मुताबिक दिल्ली के अलावा बाकी राज्य भी फ्री बिजली और पानी देने की योजना शुरू करते हैं, तो यह एक सराहनीय कदम होगा। उन्होंने कहा कि राज्यों के पास फ्री-बिजली और पानी देने के लिए पैसों की कमी नहीं है। बशर्ते राज्य सरकारों के पास इसके लिए इच्छाशक्ति होनी चाहिए और बेहतर तरीके से प्लानिंग करनी होगी। बारू के मुताबिक राज्यों को जीएसटी और अन्य स्रोतो से राज्यस्व मिलता है। ऐसे में राज्यों की तरफ से फ्री बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए पैसों की कमी बहाना है

दिल्ली सरकार का बिजली पानी की सब्सिडी पर खर्च

दिल्ली सरकार की ओर से जिस वक्त चार सौ यूनिट बिजली बिल पर 50 प्रतिशत छूट दी जाची थी, उस वक्त दिल्ली सरकार को 1600-1700 करोड़ रुपये सब्सिडी देनी होती थी। लेकिन दौ सौ यूनिट तक बिजली मुफ्त करने और फिक्स्ड चार्ज हटाने के बाद दिल्ली सरकार का बिजली सब्सिडी बिल ढाई हजार करोड़ रुपए सालाना हो गया था।दिल्ली में कुल 47 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं। बिजली विभाग के अधिकारी बताते हैं कि चार सौ यूनिट तक 50 प्रतिशत छूट देने के फैसले के कारण केजरीवाल सरकार को हर साल 1600-1700 करोड़ रुपये का बोझ उठाना पड़ता था। आंकड़ों के मुताबिक 2015-16 में सरकार ने पानी और बिजली सब्सिडी के लिए 1,690 करोड़ जारी किए थे। सिर्फ पानी की सब्सिडी पर करीब 450 करोड़ वार्षिक खर्च होते हैं. 2018-19 में अरविंद केजरीवाल सरकार ने 1699 करोड़ रुपये सिर्फ बिजली की सब्सिडी के लिए जारी किए थे।

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