पीओके की तरह 10 एकड़ भूमि के लिए जिला बनने के 21 वर्ष बाद भी 2 गांवों में सीमा विवाद

बिलासपुर से अलग होकर कोरबा को जिला बने 21 साल हाे गए हैं, लेकिन पीओके की तरह पाली ब्लॉक व कोटा ब्लॉक के दो गांवों के

बिलासपुर से अलग होकर कोरबा को जिला बने 21 साल हाे गए हैं, लेकिन पीओके की तरह पाली ब्लॉक व कोटा ब्लॉक के दो गांवों के बीच सीमा का विवाद अब तक बरकरार है। 10 एकड़ सरकारी जमीन पर दोनों गांव के लोग अपना-अपना दावा कर रहे हैं। कब्जे काे लेकर आए दिन विवाद होता है। राजस्व विभाग ने टीम बनाकर सीमांकन कराया, लेकिन सीस पंचायत के ग्रामीण मानने को तैयार नहीं हैं। अब वन विभाग ने इस जमीन पर पौधारोपण के लिए ट्रैक्टर से जुताई करवाई तो ग्रामीण विरोध करने पहुंच गए। इसके बाद वन अमले को वापस लौटना पड़ा।

काेरबा जिले का गठन 25 मई 1998 को हुआ था। पहले कोरबा जिला बिलासपुर जिले का हिस्सा हुआ करता था। पाली ब्लॉक का क्षेत्रफल 1577.25 वर्ग किलोमीटर है। इसकी सीमा बिलासपुर जिले के कोटा ब्लॉक से जुड़ी है। पाली से पोड़ी होते हुए सड़क रतनपुर निकलती है। इसी मार्ग पर एक छोर में ग्राम पंचायत ढुकुपथरा व दूसरी ओर कोटा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सीस है। दोनों ही गांव के बीच सीमा को लेकर विवाद होते रहता है। दो बार राजस्व विभाग सीमांकन करवा चुका है। बिलासपुर कमिश्नर ने वर्ष 2008 में राजस्व विभाग की टीम बनाकर सर्वे कराया था, लेकिन सीस पंचायत के ग्रामीणों ने मानने से इनकार कर दिया। शुक्रवार व शनिवार को भी वन विभाग ने जमीन पर पौधारोपण के लिए ट्रैक्टर से जुताई कराई और सीमेंट के पोल भी गिरा कर काम रुकवा दिया।

सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का किया प्रयास

ग्राम पंचायत सीस व ढुकुपथरा की जिस जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। उस पर अतिक्रमण का प्रयास भी हो चुका है। ढुकुपथरा के ग्रामीण इसे खाली रखना चाहते हैं। ताकि चारागाह या अन्य काम में आ सके। कई बार सीस के ग्रामीण भी अतिक्रमण करने का प्रयास कर चुके हैं। पिछले साल बारिश के समय जमीन को लेकर विवाद हुआ था, लेकिन पुलिस ने मामला राजस्व विभाग को सौंप दिया था।

सीस पंचायत की आबादी 4200

ग्राम पंचायत सीस की आबादी 4200 है। यहां 1900 मतदाता हैं। अब इस गांव में शामिल सागरपार को नई पंचायत बनाया गया है। सीस व सागरपार उप तहसील रतनपुर में आते हैं। यहां के ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के इस पार की जमीन हमारी है। ढुकूपथरा गांव के लोगों का दावा सही नहीं है। इसी तरह ढुकुपथरा की आबादी लगभग 1200 है।

प्रशासन गंभीर नहीं इसलिए बढ़ा है विवाद

दोनों गांव की सीमा विवाद को निपटाने के लिए राजस्व विभाग के अधिकारी गंभीर नहीं हैं। इसके कारण यह समस्या हो रही है। वर्ष 2008 के बाद ग्रामीणों ने शिकायत की, लेकिन अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। इस संबंध में कटघोरा एसडीएम सूर्यकिरण तिवारी व पाली तहसीलदार विश्वास राव मसके से चर्चा करने का प्रयास किया गया, लेकिन दोनों ने काॅल रिसीव ही नहीं किया।

सीमा क्षेत्र का विवाद आपसी सहमति से निपटाया जाए: सरपंच

ग्राम पंचायत ढुकुपथरा के सरपंच राजकुमार बिंझवार का कहना है कि सीमा क्षेत्र का विवाद दोनों गांवों से आपस में बात कर निपटा लें। इसका प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन से भी सहयोग लिया जाएगा।

कभी भी हो सकती है अप्रिय घटना, प्रशासन जल्द ले सुध

अधिवक्ता सुरेन्द्र कंवर का कहना है कि दोनों गांव के बीच कभी भी अप्रिय घटना हो सकती है। प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है। कई बार ग्रामीण आमने-सामने आ चुके हैं। इस बार सीमांकन के बाद सीमा तय करने के लिए दोनों गांव के लोगों को एक साथ बिठाने की जरूरत है।

ग्रामीणों से चर्चा हुई है समाधान करेंगे: विधायक

पाली-तानाखार के विधायक मोहित केरकेट्टा का कहना है कि सीमा विवाद को लेकर ढुकुपथरा के ग्रामीणों से चर्चा हुई है। जल्द ही समस्या का समाधान कराया जाएगा। राजस्व विभाग के अधिकारियों को इस संबंध में कार्रवाई करने कहा गया है। राजस्व मंत्री से भी चर्चा की जाएगी। ग्रामीणों को किसी तरह की परेशानी न हो इसका प्रयास किया जाएगा। 

दोनों गांव के बीच गुजरी ये सड़क है सीमा पर नहीं मान रहे ग्रामीण।

विवादित जमीन पर ट्रैक्टर जुताई के समय विरोध करने पहुंचे ढुकुपथरा के ग्रामीण।

पौधारोपण के लिए जमीन पर वन विभाग ने चलवा ट्रैक्टर तो ग्रामीणों ने विरोध कर काम रुकवा दिया

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