सटई अस्पताल ने डेढ़ घंटे देरी से महिला को किया रैफर, रास्ते में ही हो गया प्रसव


लगातार खुले में हाे रहा प्रसव, पिछले सप्ताह एक ही दिन में दाे स्थानाें पर खुले में हुअा था प्रसव सटई क्षेत्र…

लगातार खुले में हाे रहा प्रसव, पिछले सप्ताह एक ही दिन में दाे स्थानाें पर खुले में हुअा था प्रसव

सटई क्षेत्र में भैरा गांव की एक महिला का जिला अस्पताल पहुंचने से पहले प्रसव हो गया। इस बार महिला के परिजनों ने उसे डेढ़ घंटे पहले सटई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचा दिया था। वहां के नर्सिंग स्टाफ ने महिला का चैकअप करने में समय लगा दिया। इस कारण सटई से जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसका प्रसव हो गया।

जानकारी के अनुसार भैरा गांव की शोभा पति तुलसीदास कुशवाहा उम्र 20 वर्ष को रविवार की देर रात प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजनों ने साढ़े 9 बजे सटई के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचाया। पर यहां के नर्सिंग स्टाफ ने महिला का चैकअप करने में ही करीब डेढ़ घंटे का समय खराब कर दिया। जब वहां के स्टाफ को कुछ समझ नहीं आया तो उन्होंने महिला काे 108 वाहन को बुलाते हुए जिला अस्पताल के लिए रैफर कर दिया। लेकिन महिला को रास्ते में ही प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। बच्चा उल्टा होने के पर वाहन के ईएमटी डॉ. अरविंद्र मिश्रा ने महिला का सुरक्षित प्रसव कराते हुए आगे के इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया। अब जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं और जिला अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।

सिविल सर्जन गांव स्तर के कर्मचारियाें काे ठहरा रहे जिम्मेदार

जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आरएस त्रिपाठी ने बताया कि गर्भवती महिला के 9 माह कब पूरे हो रहे हैं, इस बात की जानकारी स्वास्थ्य विभाग में कार्य कर रहे निचले अमले को हाेती है। इन कर्मचारियों की लापरवाही के कारण प्रदेश सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाएं प्रसूताओं को समय पर नहीं मिल पा रही हैं। यही कारण है कि कभी गर्भवती का रास्ते में, कभी वाहन में तो कभी अस्पताल परिसर में ही प्रसव हो जाता है। इस संबंध में पिछले दिनों सिविल सर्जन डॉ. त्रिपाठी ने सीएमएचओ से बात की, पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

सीधी बात

डॉ. विजय पथौरिया, सीएमएचओ

सिविल सर्जन निचले स्तर के कर्मचारियाें काे जिम्मेदार बता रहे वहीं सीएमएचअाे समस्या के लिए महिलाअाें के परिजनाें की लापरवाही काे कारण बता रहे

लगातार खुले में
हाे रहे हैं प्रसव

7 फरवरी काे ही शहर की 22 वर्षीय भारती पति राकेश अहिरवार को देर रात प्रसव पीड़ा होने पर 20 मिनट तक 108 वाहन नहीं मिला तो वे ऑटो से लेकर ही निकल पड़े। परिजन ऑटो से उतार ही रहे थे कि जिला अस्पताल के गेट पर प्रसव हो गया। इसी दिन नौगांव क्षेत्र में मातौल गांव की माया पति रामप्रसाद कुशवाहा को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजन 108 वाहन से जिला अस्पताल लेकर आ ही रहे थे कि रास्ते में उसका प्रसव हो गया। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

परिजनाें की लापरवाही है समस्या की वजह

{ लगातार खुले में महिलाओं के प्रसव होने के मामले सामने आ रहे हैं?

– महिला का प्रसव होने से 12 घंटे पहले पीड़ा शुरू होती है। इस मामले में हितग्राही और उनके परिजन लापरवाही करते हैं और मरीज को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाते। यदि यह लोग समय पर अस्पताल पहुंचने लगें तो यह समस्या ही नहीं आएगी।

{ जननी वाहन समय पर न पहुंचने के कारण महिलाओं को ऑटो या स्वयं के वाहन से क्याें अाना पड़ रहा है।

– एक जननी वाहन एक दिन में कम से कम 4 महिलाओं को प्रसव के लिए संबंधित अस्पताल पहुंच रहा है। हो सकता है कि 100 में से एक या दो मरीजों को समय पर वाहन उपलब्ध न हो पाया हो। जिले के अधिकांश मरीजों को वाहन समय पर उपलब्ध हो रहा है।

{ सिविल सर्जन का कहना है कि निचले स्तर के कर्मचारियों की सक्रियता से समस्या का हल हो सकता है?

– नहीं एेसा नहीं है, विभाग के कर्मचारी ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में पहुंचकर कार्य कर रहे हैं। हितग्राही यदि उन कर्मचारियों को जानकारी ही नहीं देगा तो वह मदद कैसे कर पाएंगे।

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