केजरीवाल ने संभाल ली दिल्ली की सत्ता, विधानसभा में कौन होगा विपक्ष का नेता?

साल 2015 के चुनाव में बाद भाजपा ने रोहिणी से विधायक निर्वाचित हुए विजेंद्र गुप्ता को यह जिम्मेदारी दी थी. हालांकि तब एक तथ्य यह भी था कि भाजपा के केवल तीन विधायक ही विधानसभा पहुंच पाए थे. इस बार तस्वीर दूसरी है. पार्टी ने आठ सीटें जीती हैं.

  • भाजपा ने अब तक नहीं किया ऐलान
  • पार्टी ने जीती हैं 8 विधानसभा सीटें

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने प्रचंड जीत दर्ज कर लगातार तीसरी बार सरकार बना ली. अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली, वहीं उनके साथ पिछली सरकार में मंत्री रहे सभी मंत्रियों ने भी पद एवं गोपनीयता की शपथ ग्रहण की. इन सबके बीच विधानसभा में विपक्ष की कमान कौन संभालेगा, क्या विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी पिछली दफे नेता विपक्ष की भूमिका में रहे विजेंद्र गुप्ता पर भरोसा जताएगी या किसी और को जिम्मेदारी दी जाएगी, यह तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है.

साल 2015 के चुनाव में बाद भाजपा ने रोहिणी से विधायक निर्वाचित हुए विजेंद्र गुप्ता को यह जिम्मेदारी दी थी. हालांकि तब एक तथ्य यह भी था कि भाजपा के केवल तीन विधायक ही विधानसभा पहुंच पाए थे. इस बार तस्वीर दूसरी है. पार्टी ने आठ सीटें जीती हैं. इन सीटों पर जीत दर्ज कर पहुंचे विधायकों में से तीन विधायक काफी अनुभवी माने जाते हैं. बदरपुर के विधायक रामबीर सिंह बिधूड़ी, करावल नगर विधायक मोहन सिंह बिष्ट के साथ ही विजेंद्र गुप्ता भी नेता विपक्ष बनने की रेस में हैं.

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अनुभव के मानक पर देखें तो बिष्ट और बिधूड़ी, दोनों ही विजेंद्र गुप्ता पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं. ये दोनों ही चौथी बार विधायक चुने गए हैं, जबकि गुप्ता का यह महज दूसरा टर्म है. हालांकि वह कई बार पार्षद जरूर रहे हैं. गुप्ता ने पिछली दफे कम सीटें होने के बावजूद विधानसभा में विधायकों का अच्छे तरीके से नेतृत्व किया, इसका लाभ उन्हें मिल सकता है. विधानसभा में पार्टी का नेता कौन होगा, यहा पार्टी का आलाकमान तय करता है. इसलिए देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी किस नेता पर भरोसा करती है.

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मोहन सिंह बिष्ट अनुभवी और तेज तर्रार नेता माने जाते हैं. साल 1976 में भारतीय जनसंघ में शामिल होकर अपनी सियासी पारी की शुरुआत करने वाले बिष्ट साल 1992 में आरएसएस से जुड़े. पहली बार साल 1998 में चुनाव लड़े और जीते. इसके बाद वह साल 2013 तक लगातार विधायक रहे. 2015 में उन्हें शिकस्त खानी पड़ी थी. वहीं, रामबीर सिंह बिधूड़ी साल 1993 में पहली बार बदरपुर से विधायक बने थे.

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