सुप्रीम कोर्ट ने देवेंद्र फडणवीस के चुनावी हलफनामे में जानकारी छुपाने के मामले में सुरक्षित रखा फैसला

महाराष्‍ट्र (Maharashtra) के पूर्व मुख्‍यमंत्री और बीजेपी (BJP) नेता देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने हलफनामे में दो मामलों की जानकारी नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले की समीक्षा याचिका में कहा कि ये मुकदमा मेरे भाग्य पर मुहर लगाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आज फैसला सुरक्षित रख लिया है.

नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी हलफनामे (Affidavit) में आपराधिक मामलों को छुपाने के मामले में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) की और से दायर पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. पुनर्विचार याचिका पर फडणवीस की ओर से पेश वकील मुकुल रोहतगी (Mukul Rohatgi) ने तीन जजों की पीठ से कहा कि फडणवीस ने हलफनामे में कोई गलत या झूठी जानकारी नहीं दी थी. उन पर गलत मुकदमा चलाया जा रहा है. याचिका में फडणवीस ने कहा की ये मुकदमा मेरी किस्मत पर मुहर लगाएगा. ये मामला संविधान के अनुच्‍छेद-21 को प्रभावित करता है. इस मामले में पु्नर्विचार होना ही चाहिए.
बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने मामले में फडणवीस को दी थी क्‍लीनचिट
जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा, दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की पीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है. सुप्रीम कोर्ट ने 1 अक्टूबर, 2019 को फडणवीस को झटका देते हुए कहा था कि निचली अदालत (Trial Court) उनके खिलाफ दायर मुकदमे को नए सिरे से देखे. तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई (Ex-CJI Ranjan Gogoi) की अध्यक्षता वाली पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) के फैसले को खारिज करते हुए यह आदेश दिया था. बता दें कि बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने फडणवीस को इस मामले में क्‍लीनचिट दे दी थी.
जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा, दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की पीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है. सुप्रीम कोर्ट ने 1 अक्टूबर, 2019 को फडणवीस को झटका देते हुए कहा था कि निचली अदालत (Trial Court) उनके खिलाफ दायर मुकदमे को नए सिरे से देखे. तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई (Ex-CJI Ranjan Gogoi) की अध्यक्षता वाली पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) के फैसले को खारिज करते हुए यह आदेश दिया था. बता दें कि बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने फडणवीस को इस मामले में क्‍लीनचिट दे दी थी.


सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता सतीश उइके की ओर से दायर उस याचिका को भी खारिज कर दिया था, जिसमें फडणवीस का चुनाव रद्द करने की मांग की गई थी.
चुनाव रद्द करने की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता और वकील सतीश उइके (Satish Uike) की उस याचिका को भी खारिज कर दिया था, जिसमें फडणवीस की ओर से चुनावी हलफनामों में आपराधिक मामलों की जानकारी छुपाने के लिए उनका चुनाव रद्द करने की मांग की गई थी. इसके बाद उइके ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था. याचिकाकर्ता का आरोप था कि फडणवीस ने विधानसभा चुनाव 2014 में अपने ऊपर विचाराधीन दो आपराधिक मुकदमों की जानकारी छिपाई थी. इसलिए उनका चुनाव रद्द किया जाना चाहिए. बता दें कि फडणवीस पर ये दोनों मुकदमे 1996 और 1998 में दर्ज कराए गए थे. हालांकि, दोनों मामलों में उनके खिलाफ आरोप तय नहीं किए जा सके थे.



फडणवीस की ओर से कहा गया था कि मुख्यमंत्री और राजनीतिक लोगों के खिलाफ 100 मुकदमे रहते हैं. किसी के चुनावी हलफनामे में नहीं देने पर कार्रवाई नहीं हो सकती.
नागपुर में दायर दो मुकदमों की नहीं दी थी जानकारी
फडणवीस पर 2014 के चुनावी हलफनामे में दो आपराधिक मुकदमों (Criminal Cases) की जानकारी छिपाने का आरोप है. ये मुकदमे नागपुर (Nagpur) के हैं, जिनमें एक मानहानि और दूसरा ठगी का है. याचिका में फडणवीस को अयोग्य करार देने की मांग की गई थी. मामले की सुनवाई के दौरान फडणवीस की ओर से कहा गया था कि मुख्यमंत्री और राजनीतिक लोगों के खिलाफ 100 मुकदमे रहते हैं. किसी के चुनावी हलफनामे में नहीं देने पर कार्रवाई नहीं हो सकती. वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया था कि उन्होंने चुनावी हलफनामे में जानकारी छिपाई है. इसलिए कार्रवाई होनी ही चाहिए. इस पर कोर्ट ने पूछा था कि जानकारी जानबूझकर छिपाई गई या गलती से ऐसा हुआ.

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