भाजपा को प्रदेश में सत्ता में आना है तो नए प्रदेश अध्यक्ष ब्रह्मदत्त शर्मा को राष्ट्रवाद और समरसता के रंगों से होली खेलना होगी

दिव्य चिंतन

हरीश मिश्र

मध्य प्रदेश में सत्ता गंवा बैठी भाजपा चिंतन में है और संघ मंथन में। प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान एक सर्वमान्य नेता है। इससे इंकार नहीं किया जा सकता । शिवराज एक ऐसे नेता हैं, जो जन-जन से जुड़े हुए हैं। शिवराज के राजनीतिक विरोधी भी उनकी सहजता और सरलता के कायल हैं किंतु वोटों के गुणा भाग में और सत्ता के अहंकार में शिवराज के कंठ पर सरस्वती विराजमान हुई और बुद्धि, ज्ञान, चातुर्य,योग्यता, कर्मठता और दक्षता में निपुण माई के लालों का अपमान कर बैठेजब अंजलि में जल लेकर ब्रह्मपुत्रों ने श्राप दिया तो सत्ता का 15 साल का साम्राज्य ध्वस्त हो गयामध्य प्रदेश में सत्ता में वापसी के लिए महलों से निकलकर शिवराज सड़कों पर हैं__ भाजपा सत्ता में वापसी के लिए संगठन के महत्वपूर्ण पदों पर चाणक्य के वंशजों से अक्षत, रोली, चंदन से तिलक कर शाप मुक्ति का आशीर्वाद मांग रही है। यदि मूल्यांकन किया जाए तो कोई भी राजनीतिक दल किसी भी जाति का तिरस्कार कर सत्ता सिंहासन पर विराजमान नहीं हो सकता। मध्यप्रदेश में भाजपा ब्रह्म"कमल" से महक रही है। "ब्रह्म" कमल काफी कम तापमान में खिलता है। मध्यप्रदेश में इस समय राजनीतिक तापमान काफी कम है और भाजपा अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है । तब प्रदेश नेतृत्व ने ब्रह्मदत्त शर्मा को भाजपा प्रमुख की कमान सौंपते हुए ब्रह्म "कमल" खिलाने का प्रयास किया है। इस फूल के कई औषधीय उपयोग भी हैं। इसके राइज़ोम में एन्टिसेप्टिक होता है। जिसका उपयोग जले-कटे पर किया जाता है। पिछले विधानसभा चुनाव में शिवराज की वाणी से जो घाव माई के लालों के दिलों में लगा उसका उपचार ब्राह्मणों का सम्मान कर किया जा रहा है। बुंदेलखंड के "परशुराम" गोपाल भार्गव को नेता प्रतिपक्ष की ताजपोशी इसलिए की गई कि वह कमलनाथ की सत्ता को भस्म कर "अनाथ" कर सकें। दूसरी तरफ स्वयंसेवक सुहास भगत को संगठन को पुनःजागृत करने का दायित्व दिया गया है । संभागीय संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी को समन्वय का दायित्व सौंपा गया है और प्रदेश की बागडोर ब्रह्मदत्त शर्मा को। शर्मा मुरैना के हैं और उस माटी की पहचान है वहां की खस्ता गजक , दूसरी कड़क ऊंची आवाज़ । उन्हें गजक का स्वाद एक-एक कार्यकर्ता के साथ बांटना होगा___और ऊंची कड़क आवाज में एक-एक कार्यकर्ता में जोश भरना होगा ।

ब्रह्मदत्त शर्मा अपने आप में बहुत ही गुणवान हैं, इसीलिए उन्हें दायित्व सौंपा गया, किंतु उनको सामूहिक दृष्टिकोण का भाव जागृत करना होगा । बड़े-बड़े समझदार और योग्य व्यक्ति इसी कारण असफल होते देखे जाते हैं कि वह संगठन में उत्तर दायित्व मिलने के बाद ताल-मेल नहीं बैठा पाते । शर्मा राम के अनुयाई हैं राम से संगठन की प्रेरणा लेना चाहिए_*श्री राम जी ने धर्म की जय के लिए शक्ति सामर्थ्य और संख्या में विराट असुरों को पराजित करने के लिए सापेक्ष आदर्श अपनाया। श्रीराम राक्षसों के वध का प्रण करते हैं और असुरता के प्रतिकार के लिए भिन्न-भिन्न आश्रमों में जाकर वहां के साधकों को जाग्रत करते हैं। भगवान राम सहयोग देने और प्राप्त करने में कुशल हैं । उनके संगठन का अर्थ न तो आतंक है और न रूखी सैद्धांतिकता । वे प्रेम, सद्भावना, संवेदना के आधार पर जन-जन को सूत्रबद्ध कर अपने प्रयास में सफल होते हैं । ऋषि, वानर, रीछ के साथ गीधराज को भी अपना सहयोगी बना लेते हैं ।

गीधराज सों भेट भइ, बहु बिधि प्रीति बढ़ाय ।

ब्रह्मदत्त शर्मा को निश्चित रूप से प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में रहे नरों में उत्तम नरोत्तम मिश्र, बंगाल से काला जादू सीख कर आए कैलाश विजयवर्गीय, टाइगर शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर,नंद कुमार, प्रभात झा, राकेश सिंह जैसे कद्दावर नेताओं से तालमेल बैठाकर संगठन चलाना होगी। संगठन में ब्राह्मणों के अतिरिक्त बनिया, क्षत्रिय, दलितों को दायित्व सौंपना होंगे।
यदि प्रदेश मे भाजपा को वापस आना है, होलिका में रंगोत्सव मनाना है तो राष्ट्रवाद, समरसता के रंगों ( सभी समाज के व्यक्तियों को उत्तरदायित्व देना होगा) से होली खेलनी होगी । तभी नगर पालिका, मंड, पंचायत, सहकारिता चुनाव में सफलता प्राप्त होगी।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s