Shahdol : प्रदेश के इस जिले की आंनगबाड़ी केन्द्रो में ठीक नहीं है हालात, पानी की भी नहीं है बेहतर व्यवस्था

Feb, 20 2020 12:15:52 (IST)

कहीं किराए के भवन में तो कहीं जर्जर मकान में बैठ रहे हैं नौनिहाल
331 आंगनबाड़ी के पास नहीं है खुद का भवन, 248 केन्द्रों में नहीं है सुविधाघर
कहीं दरवाजे निकाल ले गए तो कहीं जर्जर हो गए सुविधाघर

शहडोल. सरकार की मंशा है कि गर्भवती महिलाओं व शून्य से छह वर्ष तक के बच्चों की बेहतर निगरानी हो और उन्हे समय-समय पर पौष्टिक आहार सहित अन्य स्वास्थ्य लाभ मिल सके। इसके लिए शहरी क्षेत्रों के साथ ही ग्रामीण अंचलो में भी आंगनबाड़ी केन्द्रो का संचालन किया जा रहा है। जिले में संचालित इन आंगनबाड़ी केन्द्रो की स्थिति बहुत ठीक नहीं है। जिले में संचालित लगभग डेढ़ हजार आंगनबाडी केन्द्रो में से तीन सैकड़ा केन्द्रो के पास स्वयं का भवन ही नहीं है तो लगभग ढ़ाई सौ आंगनबाड़ी सुविधाघर विहीन है। जिन आंगनबाड़ी केन्द्रो में स्वयं के सुविधाघर होने का विभाग का दावा कर रहा है उन सुविधाघरों की स्थिति भी बद से बदतर है। ऐसे में महिलाओं व बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां तक कि बच्चे खुले में शौच करने के लिए मजबूर हैं।
बेहतर व्यवस्था नहीं
जिले के आंगनबाड़ी केन्द्रो में पेयजल की कोई स्थाई व्यवस्था नहीं है। कहीं टंकी में तो कहीं डिब्बे में किसी ने किसी माध्यम से पानी भरकर रखा जाती है। इसी पानी से काम चलाया जा रहा है। विद्यालय परिसर में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्र वहां लगे जलापूर्ति के माध्यम से काम चला रहे हैं तो किराए के भवन में संचालित भवनों की जलापूर्ति मकान मालिक द्वारा की जाती है। इसके अलावा स्वयं की कोई व्यवस्था नहीं है।
उपयोगहीन है सुविधाघर
जिले में संचालित लगभग 1599 आंगनबाड़ी केन्द्रो में से लगभग 1351 में सुविधाघर होने के दावे विभाग द्वारा किए जा रहे हैं। इन दावों की हकीकत यह है कि उक्त सुविधाघरो में से गिनती के सुविधाघर ही उपयोग लायक है। शेष के हालात ऐसे हैं कि किसी में दरवाजे ही नहीं है तो कोई सफाई के अभाव में चोक हो गए हैं। ज्यादातर सुविधाघर बनने के साथ ही अनुपयोगी हो गए हैं।
जिले की स्थिति
कुल आंगनबाड़ी केन्द्र 1599
मिनी आंगनबाड़ी केन्द्र 184
आंगनबाड़ी केन्द्र 1415
भवन विहीन केन्द्र 331
विभागीय भवन में संचातिल 1068
निर्माणाधीन 87
अप्रारंभ 34
इनका कहना है
भवन विहीन केन्द्रो की जानकारी पूर्व में मंगाई गई थी जिनकी प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। जैसे-जैसे भवन निर्माण की स्वीकृति मिल रही है भवन निर्माण कराया जा रहा है। वैकल्पिक व्यवस्था बनाकर जलापूर्ति की जा रही है। स्वयं के संसाधन उपलब्ध नहीं है।
मनोज लारोरकर, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, शहडोल।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s