महाकाल एक्सप्रेस में सफर…ऐसी हाईटेक कि ट्रेन चलते ही दरवाजा लॉक, धूम्रपान करने पर अपने आप रुक जाएगी

सुबह 7.45 बजे वाराणसी से उज्जैन आई, दोपहर 12.40बजे काशी के लिए रवाना हुई केसरिया परिधान में सजा 20 लोगों का केटरिंग…

सुबह 7.45 बजे वाराणसी से उज्जैन आई, दोपहर 12.40बजे काशी के लिए रवाना हुई

केसरिया परिधान में सजा 20 लोगों का केटरिंग अमला। जिम्मेदारी…ट्रेन में सवार होने वालेे हर यात्री को तिलक लगाना, फूल बरसाना। उनके लिए चाय, नाश्ता और पानी की व्यवस्था करना। इससे बढ़कर उन्हें सीट पर पहुंचकर बार-बार पूछना कि कुछ और तो नहीं चाहिए। हर कोच में केटरिंग मैनेजर, 20 लोगों का सफाई अमला भी। पानी की बोतल के साथ कागज के कप हर यात्री की सीट पर पहले से रखे थे। शाम 4 बजे चाय के बाद रात 8.30 बजे भोजन परोसा। यह उन व्यवस्थाओं का हिस्सा था जो आईआरसीटीसी की पहली ओवरनाइट ट्रेन काशी-महाकाल एक्सप्रेस में दी जा रही है।

यात्रियों को गर्म भोजन के साथ हाइजेनिक नाश्ता भी

केटरर ने ट्रे सजाकर स्वादिष्ट और गर्म भोजन के साथ बोतलबंद पानी भी यात्रियों को दिया। भोजन में कढ़ाई पनीर, दो पराठे सादे, जीरा राइस, दही, मिक्स वेज, अचार, नमक। इसे एक से ज्यादा बार भी ले सकते हैं। वाराणसी से इंदौर की ओर जाने पर यात्रियों को नाश्ते में दो कचोरी, दो सोहनपपड़ी, एक दालमोठ पैकेट, चाय, इंदौर से वाराणसी के लिए पोहा, दो आलूबड़े, दो सोहनपपड़ी, एक दालमोठ पैकेट और चाय दी।

सांसद फिरोजिया ने हरी झंडी दिखाकर रवाना की ट्रेन

उज्जैन स्टेशन पर सांसद अनिल फिरोजिया, महामंडलेश्वर स्वामी शांतिस्वरूपानंद महाराज, डॉ. अवधेशदासजी महाराज, बालयोगी उमेशनाथजी महाराज, महापौर मीना जोनवाल, निगम सभापति सोनू गेहलोत ने दोपहर 12.10 बजे ट्रेन की अगवानी की। उन्होंने पहली बार आए यात्रियों को महाकाल प्रसादी के रूप में पेड़े बांटे। इसके बाद हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

सुबह 8 बजे उज्जैन पहुंचना था, 7.45 बजे ही पहुंच गई

वापसी में दोपहर 12 बजे इंदौर से आकर दोपहर 12.40 बजे ट्रेन ने वाराणसी प्रस्थान किया। ट्रेन में थर्ड एसी के 9 कोच थे। हर कोच में 72 सीटें हैं। सुबह 5.20 बजे जैसे ही ट्रेन संत हिरदाराम नगर पहुंची। उसके पटरी की तरफ वाले दरवाजे लॉक हो गए। ऐसा किसी भी ट्रेन में सुरक्षा की दृष्टि से पहली बार हुआ है। यह पहली ट्रेन है, जिसमें स्मोक सिस्टम लगाया है यानी धूम्रपान करने पर ट्रेन अपनेे आप रुक जाएगी। हालांकि पहले दिन ऐसा नहीं हुआ। यात्रियों का कहना है ट्रेन हर स्टेशन पर बिफोर टाइम ही पहंुच रही है। ट्रेन को सुबह 8 बजे उज्जैन पहुंचना था लेकिन वह सुबह 7.45 बजे पहुंच गई थी।

ट्रेन में पहली बार हवाई जहाज जैसी सुविधाएं मिलीं

वाराणसी से इंदौर आने वाली काशी-महाकाल एक्सप्रेस 82401 शुक्रवार को पहली बार यात्रियों को लेकर सुबह 7.45 बजे उज्जैन स्टेशन पहुंची। सुबह 5.20 बजे ट्रेन संत हिरदारामनगर पर आई। कोच नं. बी-4 की सीट 53 बुक कर भास्कर ने संत हिरदारामनगर से उज्जैन के बीच 2.15 घंटे उन यात्रियों के साथ बिताए, जो वाराणसी, कानपुर और लखनऊ से सवार हुए थे। वाराणसी से बी-3 की 9 से 14 नंबर सीट पर सवार हुए 6 दोस्त एके सिंह, संजय विश्वकर्मा, मनोज शर्मा, विजय कुमार विंद, विनोद कुमार विश्वकर्मा और राहुल सिंह कहते हैं ट्रेन में पहली बार हवाई जहाज जैसी सुविधाएं मिलीं। आरामदायक गद्दे। स्वादिष्ट भोजन। आईआरसीटीसी ने पहली
बार यात्रा करने वाले हर यात्री को उपहार में छाता भेंट किया।

ढोल ढमाकों से ट्रेन की अगवानी की गई। ट्रेन में आए शिवभक्त जयकारे लगा रहे थे।

उज्जैन आने पर ढोल ढमाके से ट्रेन की अगवानी की

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.