10 साल बाद भी कुम्हरिया छेवलारी में स्कूल भवन बनना शुरू नहीं, अब लागत भी बढ़ी

पहले अतिक्रमण के चलते नहीं हो पाया था शाला भवन निर्माण उनाव से सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित कुम्हरिया…

पहले अतिक्रमण के चलते नहीं हो पाया था शाला भवन निर्माण

उनाव से सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित कुम्हरिया छेवलारी गांव में दस साल पहले तीन लाख बीस हजार रुपए की लागत से स्वीकृत स्कूल के भवन का निर्माण नहीं हो पा रहा है। भवन निर्माण की जिम्मेदारी पहले पालक शिक्षक संघ को दी गई थी। लेकिन अतिक्रमण के चलते निर्माण नहीं हो सका। वहीं अब इसकी लागत बढ़ गई है। जिससे इसका निर्माण नहीं हो पा रहा है।

बता दें कि सिमिरिया ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले गांव की आबादी तकरीबन तीन हजार से अधिक है। छह दशक पहले गांव के बच्चों की पढ़ाई लिखाई के लिए यहां एक कमरे एवं एक बरामदे का स्कूल भवन बना था। पचास साठ साल पुराना भवन अब जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। दस साल पहले शिक्षा के लोकव्यापीकरण की बयार चली, तो गांव को भी तीन कमरे वाले शाला भवन के निर्माण को भी स्वीकृति मिल गई। लगभग तीन लाख बीस हजार रुपए की राशि विभाग ने स्वीकृति प्रदान कर बजट का आवंटन दिलाया ओर शाला भवन निर्माण के लिए जिम्मेदार एजेंसी पालक शिक्षक संघ वर्तमान में शाला प्रबंधन समिति को बनाया गया।

पालक शिक्षक संघ से जुड़े गुरुजन गांव की नेतागिरी के चलते निर्माण कार्य शुरू भी नहीं करवा सके। उस वक्त निर्माण कार्य की मुख्य बाधा स्कूल भवन के लिए भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना थी, चूंकि जनप्रतिनिधियों ने उस वक्त ध्यान नहीं दिया। जिससे निर्माण नहीं हो सका। वहीं अब स्कूल का निर्माण दस साल पहले बने स्टीमेट के हिसाब से नहीं किया जा सकता। जिससे भवन का निर्माण अटका हुआ है। इस संबंध में महिला सरपंच मंजू कप्तान सिंह दांगी का कहना है कि सर्वशिक्षा अभियान का अमला निर्माण की लागत में हुई वृद्धि के मुताबिक बजट मुहैया नहीं करा रहा है। जिससे भवन का निर्माण पूरा नहीं हो पा रहा है।

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