भारत में अमेरिकी पैटर्न पर बढ़ रहे कोरोना केस, मई तक 13 लाख लोग हो जाएंगे बीमार: स्टडी

भारत में कोरोना वायरस (Coronavirus) के मामलों की स्टडी करने वाले COV-IND-19 स्टडी ग्रुप के रिसर्चर्स ने मौजूदा आंकड़ों की स्टडी के बाद ये आशंका जाहिर की है.

नई दिल्ली. पूरी दुनिया इस वक्त कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी की चपेट में है. भारत में इस वायरस से संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. देश में अब तक कोरोना के 563 कंफर्म केस सामने आ चुके हैं, जबकि 11 लोग इस वायरस से जान भी गंवा चुके हैं. भारत COVID-19 के संक्रमण के दूसरे और तीसरे स्टेज के बीच में है. सरकार इसके प्रसार को रोकने की हर संभव कोशिश कर रही है. हालांकि, वैज्ञानिकों ने आंशका जाहिर की है कि अगर देश में संक्रमितों की इस रफ्तार से बढ़ती रही, तो मई के दूसरे हफ्ते तक भारत में 13 लाख कोरोना के मरीज हो जाएंगे.



न्यूज़ एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट में ये जानकारी दी गई है. भारत में कोरोना के मामलों की स्टडी करने वाले COV-IND-19 स्टडी ग्रुप के रिसर्चर्स ने मौजूदा आंकड़ों की स्टडी के बाद ये आशंका जाहिर की है. इस ग्रुप के डेटा साइंटिस्ट्स का मानना है कि भारत में टेस्टिंग रेट बहुत कम है. सिर्फ 18 मार्च को ही देश में कोरोना टेस्ट के लिए 11,500 सैंपल मिले. इससे समझा जा सकता है कि जांच के लिए लोग सामने नहीं आ रहे हैं.

COV-IND-19 स्टडी ग्रुप के एक साइंटिस्ट बताते हैं, ‘अभी तक COVID-19 का कोई वैक्सीन अप्रूव नहीं हुआ है और न ही कोई दवा ईजाद की जा सकी है. इस स्थिति में भारत के फेज 2 और फेज 3 के बीच में प्रवेश करने से और भी विनाशकारी परिणाम होंगे, क्योंकि भारत का हेल्थ केयर सिस्टम पहले से ही दबाव में है.’

साइंटिस्ट के मुताबिक, अमेरिका या इटली जैसे अन्य देशों में ऐसा ही पैटर्न देखा गया. वहां COVID-19 धीरे-धीरे फैला और फिर अचानक तेजी से मामले सामने आने लगे.’ COV-IND-19 स्टडी ग्रुप ने कहा, ‘हमारा मौजूदा अनुमान भारत में शुरुआती चरण के आंकड़ों के आधार पर है, जो कि कम टेस्टिंग की वजह से है.’

क्या भारत में फॉलो हो रहा अमेरिका का पैटर्न?
COV-IND-19 स्टडी ग्रुप के मुताबिक, भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण अमेरिका की पैटर्न पर फैल रहा है. 19 मार्च तक COVID-19 मामलों की वृद्धि दर लगभग 13 दिनों के अंतराल के साथ अमेरिका के पैटर्न पर ही आगे बढ़ती दिख रही है. इस महामारी की शुरुआत में अमेरिका में इटली के 11 दिनों का अंतराल फॉलो हो रहा था.

COVID-19 से विशिष्ट रूप से कमजोर आबादी के जल्दी संक्रमित होने की पहचान की गई है. वहीं, बुजुर्गों और मेडिकल हिस्ट्री वाले लोगों को भी इस वायरस से संक्रमित होने का खतरा ज्यादा है, क्योंकि समय के साथ-साथ उनके शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ता जाता है.

भारत में कम सुविधाएं चिंताजनक
भारत का हेल्थ सिस्टम इस महामारी से लड़ने में अभी पूरी तरह से तैयार नहीं है. भारत में प्रति 1,000 लोगों पर अस्पताल के बेड की संख्या केवल 0.7 है. वहीं, फ्रांस में ये संख्या 6.5, दक्षिण कोरिया में 11.5, चीन में 4.2, इटली में 3.4, यूके में 2.9, अमेरिका में 2.8 और ईरान में 1.5 है.

कई लोग देश में टेस्टिंग किट की कमी का जिक्र करते हैं. भारत में 18 मार्च तक 12 हजार से अधिक लोगों की टेस्टिंग हुई थी. भारत की तुलना में बहुत कम आबादी के दक्षिण कोरिया में दो लाख 70 हजार व्यक्तियों की जांच हो चुकी है.

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