कर्मयोगियों को ऑनलाइन करें भुगतान

जबलपुर।

समाचार-पत्र के वितरक (कर्मयोगी) और पाठक का हमेशा से अटूट रिश्ता रहा है। वह वितरक जो शायद आपसे रोज सुबह नहीं मिलता, परंतु अनदेखे हुए भी वह रोज आपके घर पर दस्तक देता है। ठंड, गर्मी, बरसात सभी बाधाओं को पार करते हुए रोज आपकी सेवा के लिए आपके दरवाजे पर अनवरत आता है। ऐसे हालात में भी सुबह घर के दरवाजे पर अखबार मिलता है।

अखबार पढ़कर ही आपके दिन की शुरुआत होती है और फिर एक-एक घर में अखबार पहुंचाने के बाद ही चाय पी पाते हैं। इस समय जब देश कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा है, तब भी मीडिया और मीडिया से जुड़े लोग आपकी सेवा में तत्पर हैं, ताकि आप तक बेहतर से बेहतर खबरें समय से पहुंचाई जा सकें। हमारी इस आप तक पहुंचने की कड़ी में सबसे जिम्मेदार कड़ी है वह अखबार वितरक, जो आपके घर में अखबार डालता है। परंतु, पूरे देश में लॉक डाउन होने के कारण वह आपके दरवाजे पर अपना मासिक बिल लेने के लिए नहीं पहुंच पा रहा है। इससे उसे रोज अखबार खरीदने में परेशानी होती है। जानकारी के लिए अवगत करा दें कि उक्त व्यक्ति रोज विभिन्न अखबारों के काउंटर से नगद पैसे देकर अखबार खरीदता है। पूरे महीने आपकी सेवा करने के बाद अगले महीने आपसे पिछले महीने का बिल लेने आता है। परंतु लॉकडाउन होने के कारण वह आप तक नहीं पहुंच पा रहा है, जिस कारण वह पूंजी लगाने में असमर्थ हो रहा है। अतः इस समय आप उसकी सहायता उसके द्वारा दिए गए पेटीएम नंबर, गूगल पे नंबर या उसके खाते में आरटीजीएस द्वारा भुगतान करके करते हैं तो उसके लिए बहुत ही ज्यादा सुविधाजनक होगा। इस परिस्थिति में आप उसका साथ दीजिए, जिससे वह आपके यहां अनवरत अखबार पहुंचाने की सेवा करता रहे एवं आर्थिक तंगी का सामना न करते हुए अपने परिवार का भरण पोषण बेहतर तरीके से कर पाए।

आपका अखबार है सुरक्षित

दैनिक नईदुनिया अखबार की प्रिटिंग मशीन फुलीऑटोमेटिक है। मानकों का पूरा ध्यान रखा जाता है। इसलिए दैनिक नईदुनिया अखबार पूरी तरह से सुरक्षित है। प्रिंटिंग मशीन को सैनिटाइज किया जाता है। इसके अलावा अखबार के वितरण सेंटर पर भी वितरक बंधुओं को सैनिटाइज कर अखबार भेज रहे हैं।

पीएम ने भी की प्रिंट मीडिया की तारीफ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में प्रिंट मीडिया की सही और सटीक जानकारी देने के लिए तारीफ की है। सरकारी तंत्र ने भी प्रिंट मीडिया को अपने लॉकडाउन से बाहर रखा है। इसलिए प्रिंट मीडिया के अहम कड़ी वितरक बंधु को पूरा सहयोग करें।

इनका कहना है…

कर्मयोगी मनोज यादव का कहना है कि ऑन लाइन पेमेंट से ही ग्राहक को भी आराम है। ऑन लाइन भुगतान से ग्राहक को वितरक का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। तो वितरक को भी बेवजह की दौड़ से राहत मिलेगी।

कर्मयोगी सुशील साहू का कहना है कि आज हालात बदले हुए हैं। घर पर भी राशन सब्जी और दूध का इंतजाम उसे करना है और अखबार भी खरीदना है। ऐसे में ग्राहकों को वितरक से बात करके ऑन लाइन भुगतान करना चाहिए।

कर्मयोगी सुरेश छोटू का कहना है कि लॉक डाउन 21 दिन का है और ऐसी चर्चा है कि इसका समय और बढ़ेगा। ऐसे में ग्राहक और वितरक के बीच ऑन लाइन भुगतान राहत भरा होगा।

कर्मयोगी प्रकाश कोष्टा का कहना है कि अगर ग्राहकों से ऑन लाइन भुगतान मिलता रहा, तो वितरक इस विषम समय में भी अखबार घरों में पहुंचाता रहेगा।

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