इंग्लैंड में यूं हुई टीम इंडिया के कोच की ‘बेइज्जती’, भयानक सपने जैसा था वो वक्त

इंग्लैंड (England) का दौरा करना तब भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) के लिए बेहद चुनौतियों भरा अनुभव होता था.

नई दिल्ली. विराट कोहली की अगुआई में भारतीय टीम 2019 के विश्व कप में सेमीफाइनल तक का सफर तय कर सकी थी. टीम के चौथे नंबर के बल्लेबाज की समस्या ने तब खूब जोर पकड़ा था. यहां तक कि टीम के बल्लेबाजी कोच संजय बांगड़ को अपना पद तक छोड़ना पड़ा था. उसके बाद भारतीय टीम के सपोर्ट स्टाफ में विक्रम राठौड़ (Vikram Rathore) के रूप में नया नाम जुड़ा और उन्हें भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) का बल्लेबाजी कोच बनाया गया. मगर बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि बतौर बल्लेबाज विक्रम राठौड़ की इंग्लैंड में बहुत बेइज्जती हुई थी.



प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 50 का औसत था, लेकिन…

दरअसल, भारतीय टीम ने साल 1996 में इंग्लैंड का दौरा किया था. तब विक्रम राठौड़ (Vikram Rathore) बतौर ओपनर टीम इंडिया का हिस्सा थे. इतना ही नहीं, उस दौरे पर जाते वक्त राठौड़ की गिनती बेहतरीन बल्लेबाजों में की जा रही थी. ऐसा इसलिए भी था क्योंकि तब उनका प्रथम श्रेणी क्रिकेट का औसत 50 के करीब था. मगर इसके बाद इंग्लैंड के उस दौरे पर जो कुछ भी हुआ, वो राठौड़ के लिए किसी भयानक सपने से कम नहीं था.

टेस्ट सीरीज में बुरी तरह विफल
घरेलू क्रिकेट में बेहतरीन ओपनर की प्रतिष्ठा लेकर इंग्लैंड गए विक्रम राठौड़ (Vikram Rathore) को जल्द ही इस दौरे पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की कठोरता का अंदाजा हो गया. इस दौरे पर विक्रम राठौड़ इंग्लैंड के तेज गेंदबाज डोमिनिक कॉर्क के पसंदीदा शिकार बन गए. इस दौरे पर तीन टेस्ट मैच खेले गए, जिनमें विक्रम राठौड़ ने 20, 7, 15 और 4 रन बनाए. एक पारी में राठौड़ एबसेंट हर्ट रहे और एक पारी में उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला. दिलचस्प बात ये रही कि राठौड़ हर बार विकेट के पीछे आउट हुए.

ग्राहम थोर्पे का पहला अंतरराष्ट्रीय शिकार
इतना ही नहीं, टेस्ट क्रिकेट में लचर प्रदर्शन के बाद उम्मीद की जा रही थी कि विक्रम राठौड़ (Vikram Rathore) इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में कोई कमाल करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. हालांकि तीसरे वनडे में उन्होंने अर्धशतक जरूर लगाया और 95 गेंद पर 54 रन बनाए, लेकिन नतीजे पर इसका कोई असर नहीं हुआ. बाकी दो वनडे में उनके बल्ले से 23 और 7 रन निकले. दिलचस्प बात है कि तीसरे वनडे में उन्हें ग्राहम थोर्पे ने आउट किया जो अंततरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका पहला ही विकेट था. 82 वनडे में थोर्पे ने महज दो ही विकेट लिए हैं.

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