क्योंकि जीतनी है जंग / 169 कोरोना वॉरियर्स महिलाओं ने 8 दिन में बनाए 50 हजार मास्क

इन गांवों में हो रहा है प्रमुख काम: मेंडोरी में 10, रतुआ रतनपुर में 30, नजीराबाद में 12, रातीबड़ में 14

22 गांव की 169 कोरोना वॉरियर्स महिलाएं,घर के काम-काज निपटाकर मास्क बनाने के काम में जुट जाती हैं8 दिन में लगातार काम कर करीब 50 हजार मास्क बना दिए हैं। मकसद एक ही है- कोरोना को हराना

भोपाल.22 गांव की 169 कोरोना वॉरियर्स महिलाएं। घर के काम-काज निपटाकर मास्क बनाने के काम में जुट जाती हैं। इन्होंने 8 दिन में लगातार काम कर करीब 50 हजार मास्क बना दिए हैं। लक्ष्य तय नहीं है, लेकिन मकसद एक ही है- कोरोना को हराना। हमीदिया अस्पताल, सुल्तानिया, जेके हॉस्पिटल कोलार, पुलिस हैडक्वार्टर, नगर निगम, आदिवासी विभाग, प्रशासन, सतपुड़ा भवन, ग्राम पंचायत के साथ-साथ सेना को भी यहां से मास्क भेजे जा रहे हैं। एक मास्क की लागत 4 रुपए 50 पैसे आती है। इसमें कपड़ा, सिलाई और मेहनताना शामिल है। वितरित करने तक का खर्च मिला दें तो लागत करीब 6 रुपए हो जाती है। इसकी सप्लाई प्रति मास्क 10 रुपए होती है। यह मास्क री-यूजेबल हैं। इन महिलाओं को यह जिम्मेदारी जिला प्रशासन ने दी है। राज्य आजीविका मिशन से जुड़ी यह महिलाएं पहले सिर्फ घर में सिलाई-कढ़ाई का काम करती थीं।

इन गांवों में हो रहा है प्रमुख काम…

मेंडोरी में 10, रतुआ रतनपुर में 30, नजीराबाद में 12, रातीबड़ में 14, ईंटखेड़ी में 18, रायपुर में 9, कलखेड़ा में 6, इस्लाम नगर में 4, करोंदिया में 8, गिल्लोर में 4 और रुनाहा में 6 महिलाएं प्रमुख रूप से काम कर रही हैं। बाकी गांवों में एक-दो महिलाओं की टीम है। इन महिलाओं का समन्वय राज्य आजीविका मिशन की परियोजना प्रबंधक रेखा पांडे कर रही हैं।

सीख भी दे रहीं…सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए करती हैं काम
मेंडोरी की बीना तोमर इस कोशिश में रहती हैं कि इतना अधिक वक्त मिल जाए कि ज्यादा से ज्यादा मास्क बन जाएं। ईंटखेड़ी में चारों महिलाएं राधा, शिखा, राजकुमारी और अंगूरी सोशल डिस्टेंसिंग का पॉलन करते हुए काम कर रही हैं। ईंटखेड़ी की पिंकी जाट कहती हैं कि इस काम में उनके पूरे परिवार का सहयोग मिल रहा है। कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने बताया कि मास्क के लिए आजीविका मिशन के लिए बनाए गए समूह की महिलाओं की मदद ली जा रही है, उनको मास्क बनाने की ट्रेनिंग दिलाई गई है। जो मास्क तैयार किए जा रहे हैं, उसे स्वास्थ्य विभाग की मंजूरी के बाद ही बनाया जा रहा है।

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