जब पीएम मोदी ने नर्स को किया फोन और पूछा- कोरोना के मरीजों का कैसे दूर करती हैं डर

कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुणे के डॉ. नायडू सांसर्गिक रोगांचे रुग्णालय (नायडू हॉस्पिटल) में ड्यूटी कर रहीं नर्स छाया से बात की.

नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) ने पूरी दुनिया को घरों में कैद कर दिया है. भारत में भी कोरोना के संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ती जा रही है. भारत में अब तक 873 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं और लगातार यह आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है. पीएम मोदी ने भी देश के सभी लोगों से अपील की है कि वह घरों में ही रहे, जिससे इस बीमारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों में जाने से रोका जा सके. कोरोना के डर से भले ही देश की ज्यादातर आबादी घरों में कैद हो गई हो, लेकिन कुछ आवश्यक सेवाओं को लोगों की मदद के लिए चालू रखा गया है. इसमें मेडिकल सेवाओं से जुड़े लोग सबसे आगे हैं. इनमें डॉक्टर, नर्स, लैब टेक्नीशियन और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोग शामिल हैं. इन कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुणे के डॉ. नायडू सांसर्गिक रोगांचे रुग्णालय (नायडू हॉस्पिटल) में ड्यूटी कर रहीं नर्स छाया से बात की.



बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने कोरोना वायरस के संक्रमण के दौरान मुस्तैदी से डटे डॉक्टरों और नर्सों की सराहना की और उनका आभार प्रकट किया. फोन पर पांच मिनट की हुई बातचीत की शुरुआत में पीएम मोदी ने सिस्टर छाया से उनका हालचाल पूछा. प्रधानमंत्री मोदी ने सिस्टर छाया से पूछा कि वह अपना ध्यान अच्छे से रख रही हैं या नहीं. सिस्टर ने उन्हें बताया कि वह पूरी तरह से स्वस्थ्य हैं और मरीजों के साथ ही अपना भी ध्यान रख रही हैं.

इसके बाद पीएम मोदी ने उनसे पूछा कि वह अपने परिवार को यह मनाने में कैसे सफल हुईं कि वह कोरोना के मरीजों की देखभाल करने जा रही हैं.उन्होंने पूछा कि जब आप हॉस्पिटल के लिए निकलती हैं तो आपके परिवार के सदस्यों को चिंता तो होती होगी. इस पर सिस्टर छाया ने कहा जी सर, चिंता तो होती है. लेकिन देश जिस दौर से गुजर रहा है उसमें हमारा काम पहले जरूरी है. हमें लोगों की मदद के लिए आगे आना ही होगा. मेरा परिवार समझता है कि मेरी जरूरत पहले क्या है.

पीएम मोदी ने सिस्टर से पूछा कि जब कभी भी कोई मरीज कोरोना से पीड़ित आता है तो वह काफी डरा हुआ होता होगा. इस पर सिस्टर छाया ने कहा, हां बहुत डरे होते हैं. एडमिट करने से लिए बोलते ही वह और डर जाते हैं. इसके बाद हम उनसे बात करते हैं और उनका डर खत्म करने की कोशिश करते हैं. हम उनको समझाते हैं कि अगर उनकी पॉजिटिव आए तो भी डरने की जरूरत नहीं है. उन्होंने बताया कि इस अस्पताल से सात मरीज अच्छे होकर जा चुके हैं. सिस्टर छाया ने बताया कि हर मरीज ठीक हो सकता है बस वह डॉक्टरों का साथ दे. उन्होंने बताया कि अभी नौ मरीज़ हैं उनकी तबीयत भी अच्छी है. तो डरने की बात नहीं है.

पीएम मोदी ने पूछा कि जब आप किसी मरीज को एडमिट होने के लिए बोलती होंगी तो उनके परिजन आप लोगों से नाराज भी होते होंगे. इस पर सिस्टर छाया ने कहा, हम मरीज के परिजनों को अंदर आने ही नहीं देते हैं. क्योंकि क्वारिंटीन है तो उनसे तो हमारी बात नहीं होती.इस पर पीएम मोदी ने भी कहा कि मरीजों के परिजनों को अस्पताल में आने नहीं दिया जाना चाहिए.

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