नई पीढ़ी को रामायण दिखाकर स्वजन दिला रहे मानवता की सीख

जबलपुर।

शनिवार 28 मार्च से रामानंद सागर कृत कालजयी धारावाहिक रामायण का दूरदर्शन पर पुनर्प्रसारण प्रारम्भ हो गया है। शनिवार को सुबह-सुबह 9 बजे जैसे ही रामायण धारावाहिक का प्रशारण शुरू हुआ वैसे ही स्वजनों ने नई पीढ़ी के अपने बच्चों को भारत की संस्कृति और धर्म व मानवता की सीख दिलाने के लिए उनके साथ टीवी के सामने बैठ गए। धारावाहिक शुरू होने के बाद सभी ने इसे ध्यानपूर्वक देखा।

दरअसल सरकार ने नागरिकों की मांग पर इस धारावाहिक को ऐसे समय शुरू किया है जब देश में पूरी तरह कर्फ्यू जैसा माहौल है। आज से 35 वर्ष पूर्व भी यह धारावाहिक दूरदर्शन पर चालू हुआ था। तब इसे देखने के लिए अघोषित कर्फ्यू जैसा माहौल बन जाता था। अब कर्फ्यू के दौरान इसे फिर शुरू किया गया है।

कलयुगी कोरोना के खिलाफ युद्धः

शासन ने इसे ऐसे वक्त शुरू किया है जब लोग घरों में हैं। दरअसल इसके कुल एपिसोड की संख्या के हिसाब से भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण की कड़ी तोड़ने के लिये अपने-अपने गृह-प्रवास की संभावित अवधि का अनुमान स्व-विवेक से लगा लीजिए। बहरहाल, जैसे त्रेतायुग का राम-रावण महायुद्घ था, वैसे ही कलयुग में महामारी कोरोना से अनवरत महायुद्घ चल रहा है। वह बीआर चौपड़ा कृत द्वापरयुगीन महाभारत थी, ये आज की महाभारत है, जिसमें कुरुक्षेत्र समस्त विश्व के साथ समग्र-भारत है, और योद्घा शेष विश्वजन की भांति हर भारतीय। अस्त्र-शस्त्र और युद्घ-कौशल के लिये सबके पास हैं- सोशल डिस्टेंसिंग, गृह-प्रवास, साबुन, हैंड-वॉश, सैनिटाइजर, मास्क के साथ लॉकडाउन, कर्फ्यू आदि के पालन के अति आवश्यक संकल्प। इसलिये आक्रमण का शंखनाद कीजिये और परजीवी कोरोना नामक महादानव को अपने शरीर के भीतर प्रवेश से रोक दीजिये। अब इस युद्ध-कौशल से ही ह्यूमन की जय और वायरस की पराजय होगी। रामभक्त हनुमान का सिद्घमंत्र है- नाशै रोग हरै सब पीरा जो सिमिरै हनुमत बलबीरा।

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