कोरोनावायरस / लॉकडा‌उन से डरे मजदूर सवा लाख में दिल्ली से ट्रक रिजर्व कर लौट रहे हैं घर

ना भूख की चिंता, ना कोरोना का डर, सिर्फ यही तमन्ना किकैसे पहुंचे घर
कहीं ट्रक चल न दे इस डर से खाना लेने भी ट्रक से नीचे नहीं उतर रहे मजदूर

ना भूख की चिंता, ना कोरोना का डर, सिर्फ यही तमन्ना की कैसे जल्दी अपने घर पहुंचे। ट्रक पर भेड़-बकरी की तरह सवार दिल्ली के उत्तम नगर से सवा लाख रुपए में ट्रक रिजर्व कर भागलपुर जाने वाले मजदूर खुद को काफी बेबस महसूस कर रहे थे। ट्रक पर सवार इन मजदूरों के चेहरे पर ना तो कोरोना का खौफ था ना ही भूख का अहसास। हर आंखें कुछ बयां कर रही थी। मंगलवार को ट्रक पर सवार लगभग 70 मजदूरों के चेहरे पर बेबसी, भूख और प्यास से सूखे ओठ और निवाले के लिए बिना अपनी जगहों से हिले दर्जनों हाथ हमें भूख लगी है यह तो मान रहे थे लेकिन ट्रक से उतरना नहीं चाह रहे थे। ट्रक में कसम कस मजदूरों की प्राथमिकता ना तो कोरोना से सोशल डिस्टेंसिंग की थी और ना ही भूख की। उन्हें तो सिर्फ चिंता थी घर पहुंचने की। भोजन लेकर खड़े कुछ संस्था द्वारा ट्रक से नीचे उतरने के निवेदन पर मजदूरों ने कहा कि नीचे नहीं उतरूंगा, क्योंकि कहीं मेरे उतरते ही मेरी जगह पर कोई और ना कब्जा कर ले। दरअसल दिन भर दिल्ली से ट्रकों पर सवार होकर मजदूर अपने-अपने घर की ओर जाते दिखे। जबकि दर्जनों मजदूर पीठ पर समानों का बोझ लिए पैदल सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर बेगूसराय पहुंचे थे। ये लोग इतने थके थे कि सड़क पर चलने वाले हर किसी लोकल लोगों से मदद मांग रहे थे कि कोई किसी भी वाहन पर उन्हें चढ़ा दे।

कानपुर में खाने के बाद पानी भी नहीं मिला

हर-हर महादेव चौक पर लोगों को सूखा खाना बांटने वाले एक ग्रुप ने एक ट्रक को रोका, उसमें लगभग 70 मजदूर सवार थे। सभी भूखे थे, लेकिन कोई ट्रक से नीचे उतरने को इसलिए तैयार नहीं था कि सड़क पर पैदल चलने वाले कहीं उनकी जगह पर कब्जा ना कर लें। लाख कहने के बाद भागलपुर जाने वाले कृष्णमोहन, मुरारी, राकेश सहित अन्य मजदूर ने बताया कि काफी परेशानी के बाद एक ट्रक हमें मिला। हमलोगों ने इसके लिए ट्रक वाले को सवा लाख रुपए भी दिए हैं, कानपुर में खाना खाने के बाद हमें पानी भी नहीं मिला है, लेकिन क्या करूं, ट्रक से नीचे उतरने के बाद दूसरे लोग ट्रक पर सवार हो जाते हैं, इससे भला है हम भूखे रहें लेकिन अपने घर तो पहुंच जाएं।

पुलिस ने उतरने को कहा, लेकिन ट्रक ड्राइवर नहीं उतरा तो एक भी मजदूर नहीं उतरे

दिल्ली से चलकर सहरसा जाने वाले मजदूरों से भरे ट्रक को तीन के तीन बजे फल मंडी के पास जब पुलिस ने रोका और पूछा कि क्या भूख भी लगी है, तो सबों ने कहा हां भूख तो लगी है। लेकिन कोई ट्रक से नीचे नहीं उतरा। पुलिस के काफी कहने पर वे नीचे नहीं उतरे। पूछने पर कमलेश पासवान, घनश्याम पासवान सहित अन्य ने बताया कि 27 को दिल्ली से चला, चलने के बाद कई जगहों पर ट्रक ड्राइवर ने रास्ते में ही नीचे उतार दिया। कहीं खाना खाने रुके तो ट्रक ड्राइवर ट्रक लेकर भाग गया। क्या पता यहां खाने उतरे और ट्रक ड्राइवर, ट्रक लेकर निकल गया तो हमारा क्या होगा। जिसके बाद पुलिस ने ड्राइवर को भी नीचे उतारा और सबों ने एक साथ खाना खाया।

दिल्ली में तो पानी भी मिलना मुश्किल हो गया था
उत्तमनगर में रहने वाले कमलेश पासवान, घनश्याम कुमार, बेचन यादव आदि ने अपना दुखड़ा सुनाते हुए कहा कि 20 मार्च से ही हमें काम मिलना बंद हो गया था। दो तीन दिन तो अपने बचाए गए रकम की सहायता से परिवार वालों का पेल पाला फिर हमारे सामने भोजन का संकट हो गया। पानी नहीं मिल रहे थे, मकान मालिक ने भी मकान खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया। किराना दुकानदार जो कल तक उधार दे रहे थे उन्होंने राशन देने से मना कर दिया। सरकार की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं थी। 24 को पूरे देश में लॉकडाउन डाउन की घोषणा हो गई तो हमारे सामने यातायात का भी संकट आ गया।

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