खुले में घूम रहे बाहर से लौटे मजदूर, प्रशासन बेफिकर, ग्रामीण चिंतित

क्वारंटाइन के मामलों में ग्रामीण क्षेत्रों में दिख रही लापरवाही, लोग नहीं कर रहे नियमों का पालन


गांधीग्राम । कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयास अभी भी कमजोर दिखाई पड़ रहे हैं। खास तौर से दूसरे शहरों से लौट रहे मजदूरों को क्वारंटाइन करने के मामले खासी लापरवाही दिखाई दे रही है। इस बात को लेकर ग्रामीणों इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि क्षेत्र में एक भी कोरोना संक्रमण से पीड़ित मिल गया तो लोगों की परेशानी बढ़ जाएगी। सिहोरा तहसील के गांधीग्राम में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें बाहर से आए मजदूरों को क्वारंटाइन किया गया है लेकिन वे खुलेआम पूरे गांव में धूम रहे हैं।

ग्राम पंचायत गांधीग्राम के अंतर्गत ग्राम माह्ला में बड़ी संख्या में दिहाड़ी मजदूर दूसरे प्रांत और शहरों से वापस लौटे हैं। इन मजदूरों की घर वापसी पर ग्रामीणों को एतराज नहीं है लेकिन लोग दहशत में इसलिए हैं कि ये मजदूर बेखौफ पूरे गांव में घूम रहे हैं, जबकि प्रशासन ने इनके घरों में कोविड-19 का पोस्टर लगाकर 14 दिन तक घर पर ही रहने के निर्देश दिए हैं। लेकिन इन निर्देशों का पालन स्वयं ये मजदूर भी नहीं कर रहे हैं साथ ही प्रशासन ने भी पोस्टर लगाकर अपने फर्ज की इतिश्री कर ली है। ग्रामवासियों का कहना है कि अब जब लॉकडाउन की वजह से रोजी-रोटी कमाने का जुगाड़ नहीं है तो उनके लिए शहर किस काम का है। आज हर किसी के पास फोन है और जब दिहाड़ी मजदूर अपने घरवालों से बात करते हैं तो चिंता में पड़ जाते हैं। अकसर घरवाले भी कहते हैं कि किसी तरह से घर आ जाओ फिर देखेंगे।


अलग रखा जाए ऐसे परिवारों को

ग्रामवासियों का कहना है कि जो भी दिहाड़ी मजदूर परिवार सहित बाहर से आ रहे हैं। उनको शासन प्रशासन उनको शासकीय स्कूलों में या धर्मशालाओं में क्वारंटाइन अवधि तक देखरेख में रखें। किंतु आलम यह है कि स्वास्थ्य विभाग इस दिशा में कोई प्रयास नहीं कर रहा है। ग्राम पंचायत के प्रधान आदि आकर केवल घर में रहने के लिए कह देते हैं, किंतु बाहर से आए ये लोग स्वछंद होकर घूम रहे हैं। माह्ला से गांधीग्राम सुबह से बाइक में भी घूम रहे हैं। इससे ग्रामवासियों में बड़ी चिंता और भय का वातावरण भी है।


घर का सहारा

बड़े शहरों से मजदूरों की घर वापसी के पीछे एक वजह यह भी है कि उन्हें लगता है कि बड़े शहर में इस समय उनका कोई मददगार नहीं है। गांव पहुंच जाएंगे तो परिवार और समाज का साथ मिल जाएगा। तीन महीने का राशन और अन्य घोषणाओं की वजह से भी दिहाड़ी मजदूर वापस लौट रहे हैं।

गांव में हैं साधन


मजदूरों का मानना है कि गांव में खेती-बाड़ी करके भी कुछ दिनों तक जीविका चला लेंगे। बड़े शहरों में सरकार मुफ्त खाना देने की बात कर रही है, लेकिन खाना कहां मिल रहा है और कब तक मिलेगा, इसका पता नहीं है पुलिस भी सड़क पर निकलने नहीं दे रही है। बताया गया है कि यहां पांच दिनों में 4 परिवारों के लगभग 18 लोग छत्तीसगढ़ के रायपुर व अन्य स्थानों से आए की खबर हैं।

वर्जन….

माल्हा गांव में दूसरे राज्यों और शहरों से मजदूर आए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ इन्हें क्वारंटाइन किया गया है। जानकारी मिली है कि ये लोग नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। यह चिंता का विषय है। यदि लोग नहीं मानेंगे को कार्रवाई के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

अजय कोरी, सरपंच गांधीग्राम

माह्ला में बाहर से लोग लौटे हैं। उन्हें क्वारंटाइन कर घर पर ही रहने की हिदायत दी गई है। यदि बाहर से आए लोग नियमों का उल्लंघन करते पाए गए तो प्रशासन कार्रवाई करेगा।

डॉ. दीपक गायकवाड़, प्रभारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोसलपुर एवम बीएमओ

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