मुरैना / दुबई से लौटा युवक और उसकी पत्नी सर्दी-बुखार होने पर अस्पताल में भर्ती, दिल्ली से आए 348 मजदूर पुलिस से धक्कामुक्की कर भागे

धौलपुर मुरैना सीमा पर बैठी महिला, जिसे पुलिस ने आने नहीं दिया।

सीएमएचओ के निर्देश- 14 दिन सिर्फ होम आइसोलेशन में लोगों को चेक करें, इसलिए संदिग्ध लोगों के सैंपल लेने में हो रही देरी
बॉर्डर सील, ट्रकों से आए 348 मजदूरों को कॉलेज बिल्डिंग में ठहराया, पुलिसकर्मियों को धक्का देकर भागे मजदूर

दुबई के होटल में वेटर की नौकरी करने वाला मुरैना के महाराजपुरा का युवक 17 मार्च को अपने घर लौटा। 4 दिन पहले उसे सर्दी-जुकाम, बुखार की परेशानी हुई तब मंगलवार को उसका व उसकी पत्नी का सैंपल जांच के लिए भेजा गया। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि युवक इतने दिनों तक खुद को छिपाता रहा लेकिन अस्पताल गेट पर युवक नेबताया कि मैं चार दिन से वह अस्पताल के चक्कर काट रहा है, कोई सुनवाई नहीं हो रही।

इधर पोरसा में रहने वाले एक युवक का सैंपल भी जांच के लिए भेजा गया।अब तक कुल 9 सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। इनमें से सिर्फ 2 की रिपोर्ट ही नेगेटिव आई है। इधर बॉर्डर सील होने के बाद भी ट्रकों में बैठकर आए 348 मजदूरों को प्रशासन ने हाईवे किनारे स्थित एसआरडी कॉलेज में ठहराया था। इनका चेकअप कर भोजन दिया गया। इसी दौरान कुछ समाजसेवी भी चाय-नाश्ता भोजन लेकर पहुंच गए। इसके बाद भी देर शाम मौका मिलते ही यह मजदूर वहां तैनात चार-पांच पुलिसकर्मियों को धकियाते हुए अलग-अलग दिशाओं में भाग निकले।


संदिग्ध मरीजों का सैंपल लेने में बरत रहे कोताही
मुरैना में अभी तक 9 मरीजों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। यहां सैंपल लेने में अस्पताल प्रबंधन लापरवाही बरत रहा है क्योंकि सीएमएचओ डॉ. आरसी बांदिल के स्पष्ट निर्देश हैं कि चाहे आदमी देश से आए या विदेश से, उसे 14 दिन होम आइसोलेशन में रखो, उसके बाद ही सैंपल जांच के लिए भेजे जाएं।

नर्सिंग स्टाफ के सामने मास्क का संकट

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए शासन ने सीएमएचओ को 38 लाख रुपए का बजट दिया है। इसके बाद भी कोरोना वार्ड में ड्यूटी करने वाले डॉक्टर्स व नर्सिंग स्टाफ की स्वास्थ्य व सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी पीपी (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्युपमेंट) किट सिर्फ 40 खरीदी गई हैं। जबकि मुरैना के लिए अकेली 200 किट की डिमांड थी। किट की कमी की वजह से डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ को एक पीपी किट दो से चार-चार बार पहननी पड़ रही हैं। जबकि एम्स के नॉर्म्स के हिसाब से एक किट को अधिकतम 2 बार उपयोग किया जा सकता है। इसी प्रकार अस्पताल में काम करने वाले स्टाफ को ग्लव्स व मास्क भी हल्की गुणवत्ता के हैं। वहीं ऑटो क्लेब गाउन, टाई बैग भी कम संख्या में उपलब्ध हैं।

डॉक्टरों-नर्सों की चिंता… संक्रमण से परिजन को कैसे बचाएं
जिला अस्पताल के कोविड-19 की जांच व संक्रमित मरीजों के आइसोलेशन वार्ड में जुटे डॉक्टर और नर्सें इस समय मानसिक रूप से तनाव में हैं। दरअसल अस्पताल में 6-6 घंटे की ड़यूटी करने के बाद जब घर जाते हैं तो उनके लिए घर का पिछला दरवाजा खोला जाता है। डॉक्टर व नर्सों से परिवार के लोगों को संकमण का खतरा रहता है। डर है कि संक्रमण परिवार के वृद्धजन व बच्चों को प्रभावित न कर दे जबकि अस्पताल प्रबंधन को एम्स के नॉर्म्स के हिसाब से शहर के किसी होटल को डॉक्टर्स व नर्सों के लिए शेल्टर होम बनाकर उपयोग करना चाहिए। इसका निर्णय सीएमएचओ डॉ. आरसी बांदिल, सिविल सर्जन डॉ. एके गुप्ता बीते 5 दिन में नहीं ले सके हैं।

सीमा सील

मप्र-राजस्थान बॉर्डर सोमवार से सील है। मंगलवार को बॉर्डर पर आवाजाही पूरी तरह से बंद थी। लेकिन ट्रकों में बैठकर दिल्ली से झांसी जा रहे 348 मजदूरों को पुलिसकर्मियों ने राजघाट पर रोक लिया। एसपी डॉ. असित यादव, सीएसपी सुधीर सिंह कुशवाह फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। यहां उन्होंने मजदूरों से चर्चा की और उन्हें ट्रकों से ही हाईवे किनारे स्थित एसआरडी कॉलेज की बिल्डिंग में बनाए गए शेल्टर होम पहुंचवाया। यहां मौजूद आयुक्त अमरसत्य गुप्ता व अन्य लोगों की देखरेख में मजदूरों का चेकअप कर उन्हें खाना खिलाया गया। दोपहर बाद मजदूरों में अफवाह फैल गई कि उन्हें 14 दिन रखा जाएगा। इसके बाद शाम होते ही हय मजदूर कॉलेज बिल्डिंग से निकलकर पैदल-पैदल भाग निकले। कुछ पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश भी की लेकिन उन्होंने एक न सुनी। हालांकि अफसरों का कहना है कि हमने मजदूरों को बसों से झांसी रवाना किया है।

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