100 फीसदी खाद्यान्न निगम ने दान में लिया, भोजन बांटने वालों वालेंटियर्स को पुलिस ने रोका

जबलपुर।


शहर में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन के दौरान निजी व स्वयंसेवी संगठनों को भोजन या कच्ची सामग्री देने पर संभाग आयुक्त रवींद्र मिश्रा ने रोक लगाने के निर्देश दिए। दूसरे ही दिन मंगलवार को अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जबकि नगर निगम प्रशासन खुद 100 फीसदी राशन व कच्चा-पका भोजन दानदाताओं से ही प्राप्त कर रहा है। यह बात खुद निगम आयुक्त आशीष कुमार सिंह ने मानी है। उनके मुताबिक सुबह से शाम होने तक 11 हजार से ज्यादा का भोजन निगम के सभी जोन कार्यालयों की रसोई में बनाया गया। लेकिन इस बात की उन्हें जानकारी नहीं कि पके भोजन के हजारों पैकेट जो निगम कर्मचारी, पुलिस कर्मचारियों ने समाजसेवी संगठनों से लिए हैं, वो कहां उपयोग हुए। कलेक्टर भरत यादव ने इस बारे में स्पष्ट दिशा निर्देश दिए कि किसी भी संगठन को भोजन वितरण से नहीं रोका जाएगा।

10 लाख भी लिए और राशन भीः


– नगर निगम प्रशासन के पास खुद की राशि तक नहीं है जिससे वह गरीबों, असहायों व निराश्रितों को भोजन उपलब्ध करा सके। निगम प्रशासन को 10 लाख रुपए की मदद रेडक्रास सहायता कोष से मिली है। वहीं रोजाना कच्चा-पका भोजन तक सामाजिक संगठन वाले उपलब्ध करा रहे हैं। बावजूद इसके मंगलवार को सुबह से रात होने तक शहर के विभिन्न क्षेत्रों में गरीबों को भोजन का संकट देखने मिला।

यहां वालेटिंयर्स को नहीं मिला भोजनः


– अरिहंत होटल से रोजाना हजारों पैकेट पका भोजन लेने वाला निगम प्रशासन मंगलवार को जरूरत वाले क्षेत्रों में सप्लाई नहीं कर सका। वहीं अरिहंत होटल में जो वालेटिंयर्स भोजन वितरण के लिए पहुंचे थे उन्हें भी रोकना पड़ा। क्योंकि पुलिस सुबह से ऐसे वालेटिंयर्स को बाहर जाने नहीं दे रही थी। रांझी में स्वामी रामकृष्ण परमहंस वेलफेयर सोसायटी के सदस्यों को राशन सामग्री लेने गल्ला मंडी तक जाने नहीं दिया गया। जबकि इस सोसायटी को स्वयं कलेक्टर कार्यालय ने वितरण की अनुमति प्रदान की है।

– इसी तरह हेल्िपग हैंड्स संस्था के विनोद शर्मा ने बताया कि उनकी संस्था का कोई सदस्य भोजन वितरित नहीं कर सका। जबकि निगम और प्रशासन पिछले 10 दिन से उनकी संस्था से ही राशन प्राप्त कर रही है।


यहां बुरे हाल

– रांझी, बड़ा पत्थर, मेडिकल, धनवंतरि नगर सहित शहर के उन हिस्सों में जो संगठन भोजन वितरित करते आए थे, वहां लोग दिनभर भोजन को तरस गए। क्योंकि उन जगहों की जानकारी ही निगम के पास नहीं थी। सिर्फ आंकड़े ही बताए गए कि 11 हजार का भोजन तैयार हुआ। मेडिकल के सामने 300 मजदूरों को वॉक एंड क्लीन संस्था के अधिवक्ता अरविंद दुबे ने राशन व भोजन पहुंचाया। जबकि गढ़ा जोन कार्यालय में भी भोजन तैयार करने की जानकारी दी गई।

………….

दान दाताओं से ही निगम प्रशासन को सामग्री मिली है। यह जानकारी नहीं है कि पका भोजन भी निगम वाले ले रहे हैं। किसी संस्था को रोका नहीं जाएगा। इस बारे में कलेक्टर से चर्चा की जाएगी।

-आशीष कुमार, निगम आयुक्त

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