Coronavirus मरीजों के लिए क्यों जरूरी है वेंटिलेटर, जानिए दिल्ली-NCR के अस्पतालों का हाल

दिल्ली की बात करें तो भारत सरकार के अधीन आने वाले दिल्ली के छह अस्पतालों में इस समय कोरोना मरीजों (Coronavirus Patients) के लिए लगभग 400 वेंटिलेटर (Ventilator) उपलब्ध हैं. एम्स ट्रामा सेंटर (AIIMS Trauma Centre) में लगभग 260 वेंटिलेटर हैं. दिल्ली सरकार के सबसे बड़े अस्पताल एलएनजेपी (LNJP Hospital) में 102 वेंटिलेटर हैं.

नई दिल्ली. देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) के मरीजों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है. दिल्ली में हजरत निजामुद्दीन मरकज मामले के बाद अचानक संख्या बढ़ने लगी है. जानकार इस घटना के बाद भारत में भी कोविड-19 को चीन और इटली की तरह स्टेज तीन से जोड़कर देख रहे हैं. इन लोगों का दावा है कि आने वाले दिन भारत के लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं. अगर ये वायरस कम्युनिटी स्तर पर फैलता है तो भारत में स्थिति काफी खतरनाक हो सकती है. इस स्थिति में देश के अस्पतालों में वेंटिलेटर की जरूरत सबसे ज्यादा होगी. इसकी कमी दूर करने के लिए कई स्तर पर प्रयास शुरू हो गए हैं.
3 से 5 प्रतिशत केस में ही मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना वायरस से संक्रमित बहुत कम ही लोगों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है सिर्फ 3 से 5 प्रतिशत केस में ही मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन न्यूज 18 हिंदी से बातचीत में कहते हैं, ‘अभी तक दिल्ली में 120 मरीज में से सिर्फ एक ही मरीज वेंटिलेटर पर है.’
विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना वायरस से संक्रमित बहुत कम ही लोगों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है सिर्फ 3 से 5 प्रतिशत केस में ही मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन न्यूज 18 हिंदी से बातचीत में कहते हैं, ‘अभी तक दिल्ली में 120 मरीज में से सिर्फ एक ही मरीज वेंटिलेटर पर है.’

देश के सरकारी और गैरसरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की संख्या कितनी है, इसकी ठोस जानकारी नहीं है.
बता दें कि कोरोना वायरस के गंभीर मामलों में मरीज खुद से सांस नहीं ले सकते तो इस स्थिति में उन्हें वेंटिलेटर जैसे डिवाइस की जरूरत होती है. कंप्यूटर के जरिए कंट्रोल किए जाने वाले वेंटिलेटर की कीमत बाजार में 5 लाख रुपये से लेकर 15 लाख रुपये तक होती है. वेंटिलेटर की यह कीमत मॉडल और कंपनी पर निर्भर करतीी है.
वेंटिलेटर की संख्या कितनी है, इसकी ठोस जानकरी नहीं



देश केे सरकारी और गैरसरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की संख्या कितनी है, इसकी ठोस जानकारी नहीं है. लेकिन, अनुमान लगाया जा रहा है कि सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल को जोड़ दें तो भी यह 45 हजार से भी कम है. लॉकडाउन से कुछ दिन पहले ही सरकारी और गैरसरकारी अस्पतालों की ओर से तकरीबन 12 हजार वेंटिलेटर खरीदने के आर्डर दिए गए हैं.
अगर दिल्ली की बात करें तो भारत सरकार के अधीन आने वाले छह अस्पतालों में लगभग 400 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं. एम्स में लगभग 260 वेंटिलेटर हैं. सफदरजंग अस्पताल में भी 79 वेंटिलेटर हैं. इसी तरह आरएमएल अस्पताल के विभिन्न ब्लॉक को मिलाकर 64 वेंटिलेटर हैं. दिल्ली सरकार के सबसे बड़े अस्पताल एलएनजेपी में 2,053 बिस्तर हैं लेकिन वहां केवल 102 वेंटिलेटर हैं और उसमें भी 12 खराब हैं.

भारत सरकार के अधीन आने वाले दिल्ली के छह अस्पतालों में लगभग 400 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं.
वेंटिलेटर की उपलब्धता पर फटकार भी लगी

पिछले साल ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की उपलब्धता पर हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार से जवाब मांगा था. दिल्ली सरकार ने तब हाई कोर्ट को बताया था कि उसके अस्पतालों में 400 वेंटिलेटर वाले बेड हैं, जिसमें से 300 आईयूसी और 109 दूसरी जगहोंं पर हैं. इनमें से 52 वेंटिलेटर खराब हैं, जिसकी मरम्मत कराने को कहा गया है.
अगर नेशनल हेल्थ प्रोफाइल डाटा की बात करें तो इस समय भारत के सरकारी अस्पतालों में लगभग 18 हजार से 26 के बीच वेंटिलेटर्स उपलब्ध हैं. अगर आईसीयू बेड को जोड़े दें तो यह आंकड़ा लगभग 57 हजार तक पहुंच जाता है. अगर बात करें दिल्ली-एनसीआर की तो इस समय दिल्ली के अस्पतालों में 3 हजार आईसीयू बेड और तकरीबन 1500 वेंटिलेटर्स की और जरूरत पड़ेगी.

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