खास संदेश / पंजाब के कोरोना एपिसेंटर नवांशहर से अच्छी खबर, खौफ को फतेह कर फतेह सिंह बोला-घबराएं नहीं, बस कुछ घर में ही रहें

नवांशहर में पिता की मौत के बाद परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ सैंपलिंग में कोरोना पॉजिटिव मिले और अब ठीक हो चुक फतेह सिंह।

नवांशहर जिले में अब तक 19 लोग संक्रमित पाए गए, सबसे पहले संक्रमित व्यक्ति के रूप में बुजुर्ग पाठी की हो चुकी है मौत
पाठी की मौत के बाद35 साल के फतेह सिंह

दो सप्ताह पहले तक कोरोना मरीजों की तेजी से बढ़ती संख्या को लेकर अचानक देश व पंजाब का एपिसेंटर कहलाए नवांशहर से कोरोना के खिलाफ जंग जीतने में अहम पड़ाव पार कर लिया है। कोरोना पॉजिटिव पाए रागी बलदेव सिंह के बेटे फतेह सिंह ने कोरोना के खिलाफ जंग फतेह कर ली है।ठीक होने के बाद फतेह सिंह ने कोरोना के मरीजों को अपने पहले संदेश में कहा कि कोरोना होने पर घबराने की जरूरत नहीं है।

फतेह सिंह (35) नवांशहर के 18 पॉजिटिव मरीजों में से ठीक होने वाले पहले मरीज हैं और उनके परिवार के अन्य लोग भी अब ठीक होने शुरू हो गए हैं।कोरोना के खिलाफ जंग हिम्मत के साथ जीती जा सकती है। उनके 18 मार्च को पिता की मौत के बाद लिए गए सैंपल में जहां वह खुद संक्रमित पाए गए, वहीं परिवार के भी कई सदस्य पॉजिटिव पाए गए थे। इसके बाद 21 मार्च को उन्हें भी नवांशहर के सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया गया और रविवार को उनका सेकंड रिजल्ट भी निगेटिव आ गया है, जबकि बाकी परिवार के 4 सदस्यों के भी रिजल्ट निगेटिव हैं, जबकि सेकंड निगेटिव रिजल्ट का इंतजार किया जा रहा है।

ठीक होने के बाद फतेह सिंह ने कोरोना के मरीजों को अपने पहले संदेश में कहा कि कोरोना होने पर घबराने की जरूरत नहीं है।उन्होंने कहा कि कोरोना को लेकर अभी कोई स्पष्ट दवा नहीं बनी है, लेकिन आपकी हिम्मत व इच्छा शक्ति इस पर काबू पा सकती है। ये वायरस अधिक दिनों तक आप पर हावी नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि पौष्टिक आहार व डॉक्टरों की ओर से बताए परहेज औरअंदरुनी इच्छाशक्ति का ही नतीजा है कि वह तथा उनकी परिवार अब इस बीमारी से उभर रहा है।


डाइट का रखें ख्याल, बाहर न निकलें और हाथ धोते रहें
उन्होंने कहा कि कोरोना से बचाव के लिए जरूरी है कि हम अपने डाइट का ख्याल रखें। बिना वजह घरों से न निकलें। प्रशासन की ओर से दी गई हिदायतों का पालन करें। समय-समय पर हाथ धोते रहें और सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखें।

पंजाब में कोरोना की चेन की मुख्य कड़ी बना पाठी

20 फरवरी: नवांशहर का पाठी और उसके दो साथी धार्मिक कार्यक्रम के लिए जर्मनी गए।
26 फरवरी: तीनों जर्मनी से इटली पहुंचे।
6 मार्च: तीनों इंटरनेशनल एयरपोर्ट दिल्ली पहुंचे।
7 मार्च: बंगा के पठलावा स्थित अपने घर पहुंचे।
13 मार्च: स्वास्थ्य विभाग ने तीनों को निगरानी में रखा।
16 मार्च: पाठी की तबीयत बिगड़ी। स्वजन फगवाड़ा के प्राइवेट अस्पताल ले गए। डॉक्टर ने खांसी-जुकाम के साथ बुखार भी बताया।
17 मार्च: स्वजन जालंधर के पटेल अस्पताल ले गए। डॉक्टर ने रात को सिविल अस्पताल के लिए रेफर किया।
18 मार्च: नवांशहर के सिविल अस्पताल में पाठी ने दम तोड़ा। दो साथियों को भी निगरानी में रखा।
19 मार्च: रिपोर्ट में कोरोना से मौत की पुष्टि। इसी के साथ पंजाब में कोरोना से पहली मौत। बंगा अस्पताल व गांव पठवाला सील। साथ ही होशियापुर के गांव गढ़शंकर का गांव मोरांवाली सील किया गया। यहां के सात लोग बुजुर्ग के संपर्क में आए थे।
20 मार्च : श्री आनंदपुर साहिब की सीमाएं सील की गई, जब पता चला कि पाठी होला-महल्ला में कई जगह घूमा था।
21 मार्च: बुजुर्ग के परिवार के छह लोग पॉजिटिव पाए गए। इनमें बहू, दो बेटे, जमाई, बेटी व पोती शामिल है।
22 मार्च: सात नए मामले सामने आए। इनमें गांव का सरपंच भी शामिल है। ये सभी पाठी के संपर्क में थे।
23 मार्च: बुजुर्ग के पोते की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई।
24 मार्च: जालंधर के एक परिवार को तीन लोग और पाठी की दो पोतियों व एक दोहते की रिपोर्ट भी पॉजिटिव पाए गए। सभी पाठी के संपर्क में आए थे।

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